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शुभ विवाह: शादी के कुछ दिन बाद विधवा हुई भाभी के साथ देवर ने लिए सात फेरे, छलके दुल्हन के आंसू

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Wed, 15 Dec 2021 03:54 PM IST
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Auspicious marriage:  brother-in-law took seven rounds with widowed sister-in-law
पुनर्विवाह में देवर-भाभी बने पति-पत्नी - फोटो : amar ujala
पुनर्विवाह को अशुभ या शान के खिलाफ सोच रखने वालों को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की बांदा शाखा ने को एक नई राह दिखाई। इसमें महासभा से बड़ी भूमिका क्षत्रिय समाज के उस बेटे और बेटी की है, जिसने तमाम कुरीतियों को दरकिनार कर देवर को पति और भाभी को पत्नी के रूप में अंगीकार कर लिया। भव्य मैरिज हाल में विधवा विवाह पूरी शाने-ओ-शौकत से हुआ। विधवा या पुनर्विवाह का खास कर बुंदेलखंड में रिवाज नहीं है। लेकिन क्षत्रिय महासभा ने इस पुरानी मान्यता को दरकिनार कर एक नया संदेश दिया है। मैरिज हाल में जब विधवा वंदना सिंह ने अपने ही देवर शुभम सिंह उर्फ मनीष के साथ सात फेरे लिए तो तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस नए जोड़ें को सभी ने दिल से बधाई दी। जयमाल पहनाकर उसे अपना जीवन साथी बना लिया। शुभम ने भी अपनी भाभी रही वंदना को शुभ मुहूर्त में अपनी पत्नी का दर्जा दे दिया। इसी के साथ क्षत्रिय समाज में एक नई शुरूआत हो गई। विवाहोत्सव में दोनों पक्षों के खानदानी और व्यवहारी शरीक थे। 


 
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देवर-भाभी बने पति-पत्नी - फोटो : amar ujala
मायके से भी अच्छा लगा ससुराल 
विधवा से पुन: सुहागन बनीं वंदना सिंह स्नातक हैं। शनिवार को अपने देवर के साथ सात फेरे लेने से पूर्व उसने बताया कि  शादी के कुछ महीने बाद ही पति की मौत ने उन्हें निराश कर दिया था। लेकिन सास-ससुर सहित ससुराल के सारे सदस्य उसके संकट मोचक साबित हुए। जब उसने देवर के साथ सात फेरे लिए तो आंखों से आंसू छलक उठे। 

 
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देवर ने की भाभी से शादी - फोटो : amar ujala
कम उम्र में हो गई थी विधवा 
ससुराल की भरपूर सराहना करते हुए वंदना ने कहा कि वहां का माहौल उसे मायके से भी ज्यादा अच्छा लगता था। खुशी जताई कि उसे फिर वही परिवार ससुराल के रूप में मिला है। वंदना ने कम उम्र में विधवा होने वाली युवतियों से कहा कि हौसला रखें और परिवार की मदद से नए जीवन की शुरूआत करें। 

 
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वर वधू को सभी ने दिया आशीर्वाद - फोटो : amar ujala
वंदना ने सभी का दिल जीत लिया
शुभम सिंह का कहना है कि ससुराल में सभी के साथ सम्मानजनक और प्रेमपूर्ण व्यवहार से वंदना ने सभी का दिल जीत लिया था। बड़े भाई के निधन से उनके जीवन में निराशा थी। किसी महिला के लिए अकेला जीवन काटना मुश्किल होता है। इसी सोच की वजह से शादी का फैसला लिया। समाज के लोगों ने इसमें मदद की। 

 
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शादी के कुछ दिन बाद ही हो गई थी वंदना के पति की मौत - फोटो : amar ujala
बुंदेली धरती से शुरु हुआ शुभ कार्य
क्षत्रिय महासभा के बांदा जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह परिहार सहित महासभा के तमाम पदाधिकारियों ने वर वधु दोनों को ही आशीर्वाद दिया। साथ ही कहा कि बुंदेली धरती से शुरू हुआ यह शुभ कार्य देश-प्रदेश तक फैलाया जाएगा। कहा कि कम उम्र में विधवा होने वाली बेटियों की उपेक्षा और दशा पर हम मूकदर्शक नहीं रह सकते। 
 
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