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बिकरू कांड: विकास को मिल जाती थीं जमानतें, शासन अपील तक नहीं करता, चौंकाने वाला खुलासा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 14 Sep 2021 10:10 AM IST
Bikru Case: Vikas Dubey used to get bail, the government does not even appeal, shocking disclosure
बिकरू कांड: आठ पुलिस वालों की हत्यारा विकास दुबे - फोटो : अमर उजाला
विकास दुबे और उसके गैंग के सदस्यों को स्थानीय पुलिस, राजस्व और प्रशासनिक अफसरों का पूरा संरक्षण था। विकास की पत्नी जिला पंचायत सदस्य और बहू गांव की प्रधान थी, इनसे मदद के लिए लोग विकास का ही सहारा लेते थे। विकास पर 64 मुकदमे दर्ज थे लेकिन शासन की ओर से मुकदमों की पैरवी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। ज्यादातर मुकदमों में उसे हाईकोर्ट से जमानत और स्टे आसानी से मिल जाता रहा। शासन इसके खिलाफ अपील तक नहीं करता था। बिकरू कांड की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने पिछले माह शासन को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में शासन-प्रशासन की कई खामियों को उजागर किया है।रिपोर्ट में कहा कि विकास के किसी मुकदमे की कभी निष्पक्ष जांच नहीं हुई। चार्जशीट में गंभीर धाराएं हटा दी जाती थीं, मुकदमे की सुनवाई के दौरान ज्यादातर गवाह बयान से मुकर जाते थे, विकास और उसके साथियों को आसानी से जमानत मिल जाती थी।
Bikru Case: Vikas Dubey used to get bail, the government does not even appeal, shocking disclosure
विकास ने पुलिस के साथ खेली थी खून की होली - फोटो : amar ujala
विकास ने थाने में की थी भाजपा नेता की हत्या
विकास पर 64 मुकदमे दर्ज थे लेकिन शासन की ओर से कोई विशेष लोक अभियोजक नियुक्त नहीं किया गया। संतोष शुक्ला हत्याकांड का भी विकास पर आरोप था। पुलिस ने उसकी मदद की, उसे थाने से जाने दिया और जांच के नाम पर खानापूरी की गई। गवाहों के मुकर जाने और निष्पक्ष जांच न होने की टिप्पणी के साथ सेशन कोर्ट से 24 जून 2003 को विकास बरी हो गया था।

 
Bikru Case: Vikas Dubey used to get bail, the government does not even appeal, shocking disclosure
विकास दुबे कांड: आइपीएस अनंत देव, शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा - फोटो : amar ujala
सुप्रीम कोर्ट में भी नहीं की गई अपील
शासन की ओर से हाईकोर्ट में अपील तो की गई लेकिन सरकारी वकील की ओर से बहुत साधारण तरीके से पक्ष रखा गया। इस कारण हाईकोर्ट ने भी 30 अप्रैल 2008 को सेशन कोर्ट के आदेश को बहाल रखा। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील भी नहीं की गई। वहीं हत्या के एक मामले में कानपुर देहात के सेशन जज ने 14 जून 2004 को विकास को सजा सुनाई थी।

 
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विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala
विकास का आपराधिक इतिहास भी कोर्ट में नहीं किया गया पेश
अगले ही दिन हाईकोर्ट में आदेश के खिलाफ अपील दाखिल हुई और 16 जून को ही उसे हाईकोर्ट से जमानत भी मिल गई। विकास का आपराधिक इतिहास तक कोर्ट में पेश नहीं किया गया। विकास को जमानत या स्टे के नाम पर ज्यादातर मुकदमों में हाईकोर्ट से राहत मिलती गई और शासन की ओर से कोई ठोस कोशिश नहीं की गई।

 
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विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala
विकास पुलिस को उपलब्ध कराता था जरूरत की चीजें
न्यायमूर्तियों ने रिपोर्ट में लिखा है कि विकास दुबे और उसके गैंग को स्थानीय पुलिस, राजस्व और प्रशासनिक अफसरों का संरक्षण मिला था। दोनों एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे। विकास चौबेपुर पुलिस को रोजमर्रा की जरूरतें जैसे तख्त, पीने के पानी आदि की व्यवस्था कराता था। इसके बदले पुलिस उसको संरक्षण देती थी। विकास सर्किल के टॉप-10 अपराधियों की सूची में तो शामिल था लेकिन जिले की टॉप-10 में नहीं।
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