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‘मौत का पुल’: अंधेरी रात, आंधी-तूफान और नीचे बिछी लाशें, शोर में दब गईं आखिरी चीखें तक, रुला देंगी ये तस्वीरें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
Published by: Himanshu Awasthi
Updated Sat, 30 May 2026 09:53 AM IST
सार
Hamirpur Bridge Accident News: बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का सेगमेंटल स्पैन गिरने की घटना ने न केवल छह मजदूरों की जान ली, बल्कि पीछे छोड़ गई अनगिनत दर्द भरी दास्तानें। कहीं पिता अपने बेटे को नहीं बचा पाया, तो कहीं चार बेटियों ने अपने एकमात्र सहारा पिता को खो दिया।
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Betwa Bridge Accident in Hamirpur
- फोटो : amar ujala
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हमीरपुर जिले में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे ने कई परिवारों को जिंदगीभर का दर्द दे दिया। स्वासा गांव निवासी राजेंद्र सिंह के लिए यह कभी न भरने वाला जख्म बन गया। तेज आंधी और बारिश के बीच वह अपने बेटे पुष्पेंद्र की आखिरी चीख तक नहीं सुन सके। राजेंद्र सिंह पुल निर्माण स्थल पर गनमैन की ड्यूटी करते हैं।
उसके नाम लाइसेंसी बंदूक होने से ठेकेदार ने उनको सुरक्षा की जिम्मेदारी दी थी। बाद में उन्होंने अपने बेटे पुष्पेंद्र को भी गार्ड के रूप में काम पर लगवा लिया। पिता-पुत्र दोनों रात में ड्यूटी करते थे। रोज साथ घर से निकलते और सुबह साथ लौटते थे। बृहस्पतिवार रात भी दोनों ड्यूटी पर थे। देर रात मौसम अचानक बिगड़ गया। तेज आंधी के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई।
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Betwa Bridge Accident in Hamirpur
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पैर फिसला और वह नदी में जा गिरे
इस पर राजेंद्र ने बंदूक को भीगने से बचाने के लिए बेटे पुष्पेंद्र को थमा दिया। पुष्पेंद्र बंदूक लेकर पास खड़ी हाइड्रा मशीन में बैठ गया। उधर राजेंद्र आंधी से बचने का प्रयास करने लगे। इसी दौरान पैर फिसला और वह नदी में जा गिरे। किसी तरह बाहर निकलकर आगे बढ़े तभी जोरदार धमाका हुआ। पीछे मुड़कर देखा, तो पुल का एक हिस्सा भरभराकर गिर चुका था।
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पैर फिसला और वह नदी में जा गिरे
जिस जगह स्लैब गिरी थी, वहीं नीचे हाइड्रा मशीन खड़ी थी। यह देख राजेंद्र बिलख पड़े। उन्होंने हादसे को याद करते हुए कहा कि बेटे ने जरूर आवाज लगाई होगी, लेकिन आंधी का शोर इतना था कि कुछ सुनाई नहीं दिया। हादसे के बाद से गांव में मातम पसरा हुआ है। राजेंद्र बार-बार यह कहकर बिलख रहे थे कि काश वह उस वक्त बेटे तक पहुंच पाते, तो शायद उसे बचा लेते।
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Betwa Bridge Accident in Hamirpur
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पापा ने दिया बेटों सा प्यार कहते हुए बिलख पड़ीं बेटियां
हादसे ने अचपुरा गांव निवासी गनमैन राजेश पाल के परिवार की खुशियां भी छीन ली हैं। खबर घर पहुंची तो बदहवास हालत में परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। यहां मलबे के बीच पिता को तलाशती बेटियों की आंखों में सिर्फ आंसू और बेबसी थी। बेटियां यह कहते हुए फफक कर रो रही थीं कि पापा हम बहनों को बेटों सा प्यार देते थे। हमारी खुशी के लिए मेहनत करते थे।
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पापा हमेशा कहते थे- मेरी बेटियां ही मेरे बेटे हैं
राजेश पाल की चारों बेटियां पिता की मौत की खबर सुनकर बेसुध हो गईं। बड़ी बेटी शिवानी ने कांपती आवाज में कहा कि हमारा कोई भाई नहीं है। पापा हमेशा कहते थे कि मेरी बेटियां ही मेरे बेटे हैं। शिवानी ने आंसू पोंछते हुए बताया कि पिता अपनी दोनाली बंदूक के सहारे गनमैन की नौकरी करते थे। उसी कमाई से घर चलता था, बेटियों की पढ़ाई होती थी और भविष्य के सपने बुने जाते थे। परिवार के पास आमदनी का कोई दूसरा साधन नहीं है।
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