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विकास दुबे ने सीओ को ही क्यों सबसे वीभत्स तरीके से मारा, इस वजह से थी खुन्नस, पुलिस भी हैरान

अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 12 Jul 2020 08:35 AM IST
kanpur encounter Vikas dubey brutally killed DSP Devendra Mishra 22 years of rivalry between Vikas and DSP
Kanpur encounter - फोटो : अमर उजाला
शहीद डीएसपी देवेंद्र कुमार मिश्र की नृशंस हत्या के पीछे उनकी दहशतगर्द विकास दुबे से 22 साल पुरानी रंजिश की वजह सामने आई है। देवेंद्र मिश्र जब कल्याणपुर थाने में सिपाही थे तो उनका विकास से आमना-सामना हुआ था। दोनों ने एक-दूसरे पर बंदूक तान ली थी। 

 
kanpur encounter Vikas dubey brutally killed DSP Devendra Mishra 22 years of rivalry between Vikas and DSP
Kanpur encounter - फोटो : अमर उजाला
ट्रिगर भी दबाया था लेकिन दोनों ओर से फायर नहीं हो पाया था। इसके बाद देवेंद्र ने विकास को जमकर पीटा था और हवालात में डाल दिया था। ये खुलासा खुद विकास ने उज्जैन से कानपुर लाए जाने के दौरान एसटीएफ की पूछताछ में किया था। 
 
kanpur encounter Vikas dubey brutally killed DSP Devendra Mishra 22 years of rivalry between Vikas and DSP
Kanpur encounter - फोटो : अमर उजाला
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक 1998 में विकास दुबे स्मैक की तीस पुड़िया और बंदूक के साथ कल्याणपुर इलाके से गिरफ्तार हुआ था। तत्कालीन थानेदार हरिमोहन यादव से थाने में ही विकास भिड़ गया था। उनके साथ मारपीट की थी। यह देखकर देवेंद्र मिश्र विकास से भिड़ गए थे। तभी से विकास उनसे रंजिश मानने लगा। 
 
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सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
देवेंद्र मिश्र को जब बिल्हौर सर्किल का चार्ज मिला तो विकास समझ गया कि उसको दिक्कत होगी। इसलिए उसने थानेदार विनय तिवारी के साथ साठगांठ की। दो जुलाई को देवेंद्र जब बिकरू गांव में दबिश देने गए तो विनय ने मुखबिरी कर दी। विकास को मौका मिल गया और उसने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। 
 
kanpur encounter Vikas dubey brutally killed DSP Devendra Mishra 22 years of rivalry between Vikas and DSP
vikas dubey news - फोटो : amar ujala
विधायकों ने पैरवी कर दिया था धरना
इस मामले में तत्कालीन विधायक भगवती सागर और राजाराम पाल (दोनों बसपा से) ने थाने पहुंचकर विकास दुबे की पैरवी की थी। पुलिस जब उनकी बात मानने को तैयार नहीं हुई तो दोनों नेताओं ने थाने में धरना दिया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विकास के राजनीतिक रिश्ते कितने गहरे थे।
 
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