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नवरात्र विशेषः जानिए कन्या पूजन का महत्व और इससे मिलने वाले लाभ
शिखा पांडेय, कानपुर
Updated Wed, 21 Mar 2018 12:43 PM IST
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कन्या पूजन
नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। यदि कोई सच्चे मन से देवी मां की आराधना करते हुए कन्याओं का पूजन करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं बहुत जल्द पूरी होती हैं। जिस तरह बिना कलश पूजन के नवरात्र के सभी व्रत और अनुष्ठान अधूरे हैं उसी प्रकार कन्या पूजन करना आवश्यक है । कम ही लोगों को कन्या पूजन की सही विधि, कन्या पूजन के लाभ व इससे जुड़ी विशेष बातें पता होती हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ. नरेंद्र दीक्षित बता रहे हैं कि कन्या पूजन के दौरान किन सावधानियों को बरतना चाहिए जिससे धन-धान्य की प्राप्ति हो...
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कन्या पूजन से प्रसन्न होती देवी मां
कन्या पूजन
मान्यता है कि जप और दान से देवी इतनी प्रसन्न नहीं होती, जितनी कन्या पूजन से।
- एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य
- दो की पूजा से भोग और मोक्ष
- तीन की अर्चना से धर्म, अर्थ व काम
- चार की पूजा से राज्यपद
- एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य
- दो की पूजा से भोग और मोक्ष
- तीन की अर्चना से धर्म, अर्थ व काम
- चार की पूजा से राज्यपद
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कन्या पूजन
- पांच की पूजा से विद्या
- छ: की पूजा से छ: प्रकार की सिद्धि
- सात की पूजा से राज्य
- आठ की पूजा से संपदा
- नौ की पूजा से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति
- छ: की पूजा से छ: प्रकार की सिद्धि
- सात की पूजा से राज्य
- आठ की पूजा से संपदा
- नौ की पूजा से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति
यह है मान्यता
कन्या पूजन
माता के भक्त पंडित श्रीधर के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने नवरात्र के बाद नौ कन्याओं को पूजन के लिए घर पर बुलवाया। मां दुर्गा उन्हीं कन्याओं के बीच बालरूप धारण कर बैठ गई। बालरूप में आईं मां श्रीधर से बोली सभी को भंडारे का निमंत्रण दे दो। श्रीधर से बालरूप कन्या की बात मानकर आस-पास के गांवों में भंडारे का निमंत्रण दे दिया। इसके बाद उन्हें संतान सुख मिला।
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नवरात्रि में तीन प्रकार से कन्या पूजन का विधान
कन्या पूजन
प्रथम प्रकार- प्रतिदिन एक कन्या का पूजन अर्थात नौ दिनों में नौ कन्याओं का पूजन करें। इस पूजन को करने से कल्याण और सौभाग्य प्राप्ति होती है |
दूसरा प्रकार- प्रतिदिन दिवस के अनुसार संख्या अर्थात प्रथम दिन एक, द्वितीय दिन दो, तीसरे दिन तीन कन्याअों का पूजन करें। इस प्रकार कन्या पूजन से 45 कन्याअों का पूजन होगा। जिससे सुख व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है |
तीसरा प्रकार – नौ कन्या का नौ दिनों तक पूजन अर्थात नौ दिनों में 81 कन्याओं का पूजन। इस प्रकार से पूजन से पद, प्रतिष्ठा और भूमि की प्राप्ति होती है |
दूसरा प्रकार- प्रतिदिन दिवस के अनुसार संख्या अर्थात प्रथम दिन एक, द्वितीय दिन दो, तीसरे दिन तीन कन्याअों का पूजन करें। इस प्रकार कन्या पूजन से 45 कन्याअों का पूजन होगा। जिससे सुख व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है |
तीसरा प्रकार – नौ कन्या का नौ दिनों तक पूजन अर्थात नौ दिनों में 81 कन्याओं का पूजन। इस प्रकार से पूजन से पद, प्रतिष्ठा और भूमि की प्राप्ति होती है |

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