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लाइफलाइन बनी डेथलाइन: फोन पर नहीं आई एंबुलेंस, लोकेशन ही पूछते रहे कर्मचारी, तड़प-तड़प कर मरीं मां-बेटियां

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Wed, 29 Apr 2026 05:22 AM IST
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सार

Kanpur News: नजफगढ़ में जहर खाने वाली मां-बेटियों को एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं मिली। निजी वाहन से हैलट पहुंचने में हुई ढाई घंटे की देरी जानलेवा साबित हुई। परिजनों ने डीसीपी से शिकायत की। चौकी इंचार्ज ने निजी खर्च और वाहन से बच्चियों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे।

Kanpur Ambulance Staff Kept Asking for Location Over Phone Mother and Daughters Left Desperate for Treatment
मां-बेटियों की फाइल फोटो और घटनास्थल पर मौजूद पुलिस - फोटो : amar ujala
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विस्तार

इसे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कहें या फिर बदइंतजामी। ग्रामीण क्षेत्र में 10 मिनट में पहुंचने का दंभ भरने वाली सरकारी एंबुलेंस का दावा महाराजपुर में एक बार फिर झूठा साबित हुआ। नजफगढ़ गांव में जहरीला पदार्थ खाने से अचेत हुईं चांदनी और उसकी बेटी पायल और ब्यूटी को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों के बार-बार फोन करने पर भी एंबुलेंस नहीं पहुंची।

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उन्हें निजी वाहन से स्वास्थ्य केंद्र से हैलट तक पहुंचाने में करीब ढाई घंटे का समय बर्बाद हो गया। तब तक तीनों की सांसे थम गईं। चांदनी के भाइयों का आरोप था कि अगर समय से अस्पताल पहुंच जाते, तो शायद तीनों जिंदा होते। इससे पहले भी 23 अप्रैल को छतमरा चौराहे पर गश खाकर गिरे मजदूर को 45 मिनट तक एंबुलेंस नहीं मिली थी। इससे उसकी जान चली गई थी।

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हालत बिगड़ने पर कई बार फोन किया गया
नजफगढ़ निवासी चांदनी और उसकी बेटियों पायल और ब्यूटी की मौत हो गई। पड़ोस में रहने वाले भाई धर्मेंद्र, जितेंद्र और प्रताप का कहना था कि उन लोगों को करीब 7.30 बजे जानकारी हुई, तो एंबुलेंस बुलाने के लिए 108 डायल किया। आरोप है कि शुरू में फोन उठने पर लोकेशन आदि पूछा गया, लेकिन गाड़ी नहीं आई। इसके बाद बहन की हालत बिगड़ने पर कई बार फोन किया गया।

Kanpur Ambulance Staff Kept Asking for Location Over Phone Mother and Daughters Left Desperate for Treatment
कानपुर सुसाइड केस - फोटो : amar ujala

नाजुक हालत देखते हुए हैलट रेफर कर दिया
लेकिन एक घंटे बाद तक गाड़ी नहीं आ सकी। इस पर उन लोगों ने गांव के एक युवक की कार से आठ किमी दूर सरसौल स्थित सीएचसी पहुंचाया। वहां डॉक्टर ने नाजुक हालत देखते हुए हैलट रेफर कर दिया। भाइयों का आरोप है कि बहन और भांजियों को जल्दी अस्पताल पहुंचाने के लिए डॉक्टर से मिनन्त की। आरोप है कि इस पर डॉक्टर ने सीएचसी में खड़ी एंबुलेंस के चालक को फोन किया, लेकिन कोई नही आया।

समय से अगर अस्पताल पहुंच जाते, तो जान बचाई जा सकती थी
इस तरह वह लोग निजी वाहन से करीब 9.45 बजे तीनों को हैलट लेकर पहुंचे वहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। भाइयों का आरोप है कि हैलट में डॉक्टरों का कहना था कि वह लोग समय से अगर अस्पताल पहुंच जाते तो जान बचाई जा सकती थी। आरोप है कि घर से लेकर हैलट तक के बीच पहुंचने में करीब इलाज मिलने में ढाई घंटे का समय लग गया। अगर एंबुलेंस समय से आ जाती, तो तीनों की जान बचाई जा सकती थी।

Kanpur Ambulance Staff Kept Asking for Location Over Phone Mother and Daughters Left Desperate for Treatment
कानपुर सुसाइड केस - फोटो : amar ujala

थाना प्रभारी महाराजपुर से जांच के निर्देश दिए
तीनों भाइयों ने एंबुलेंस के न आने का आरोप मॉर्चुरी पहुंचे डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता से भी लगाया। इस पर उन्होंने थाना प्रभारी महाराजपुर से जांच के निर्देश दिए। इसी तरह महाराजपुर में लू के थपेड़ों के चलते बाइक से गश खाकर गिरे नरवल के मंधना निवासी मजदूर सुनील को 45 मिनट तक एंबुलेंस के न पहुंचने पर उसकी मौत हो गई थी।

चौकी इंचार्ज ने अपनी कार से पोस्टमॉर्टम भेजे शव
परिवार की आर्थिक स्थिति सही न होने की वजह से पोस्टमॉर्टम भेजे जाने वाले वाहन का परिजन इंतजाम न कर सके। इसके बाद सुनहला चौकी इंचार्ज प्रवीण कुमार ने अपनी निजी कार से दोनों बच्चियों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाए।

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कानपुर सुसाइड केस - फोटो : amar ujala

एंबुलेंस सेवा 108 का कंट्रोल रूम लखनऊ में है। इसमें निजी कर्मी काम करते हैं। महाराजपुर में एंबुलेंस के पहुंचने में देरी क्यों हो रही है। इसके बारे मे संबंधितों से जानकारी लेकर मुख्यालय भेजी जाएगी।  -डॉ.हरिदत्त नेमी, सीएमओ

जेठ का आरोप- समोसे की लड़ाई के बाद से अलग हुए थे पति-पत्नी
चांदनी के जेठ शिव सिंह ने बताया कि भाई राकेश काफी शराब पीता था, जिसकी वजह से उसके और चांदनी के बीच में कई बार अनबन हुई। पांच साल पहले चांदनी ने भाई राकेश से समोसा मंगाया था, वह समोसा नहीं लेकर आया तो दोनों में रात भर विवाद हुआ। उसके बाद चांदनी ने अपने परिजन को बुला लिया और उनके साथ वह मायके चली गई। करीब चार महीने से भाई राकेश भी घर से बिना बताए कहीं चला गया है।

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कानपुर सुसाइड केस - फोटो : amar ujala

मां बोली- पति ने बेटी की जान लेने की कोशिश की तो तोड़ा था रिश्ता
मां शांति ने बताया कि चांदनी का पति राकेश शराब का लती था। अक्सर नशे में धुत होकर घर आकर मारपीट था। करती तो उसे और बेटियों को मारता पीटता आरोप है कि जब छोटी बेटी ब्यूटी करीब छह माह की थी तभी पति ने नशे में उसे छत से फेंकने का प्रयास किया था। चांदनी पति को छोड़कर मायके में उनके साथ रह रही थी। करीब एक वर्ष पहले पति से लिखा-पढ़ी में अलगाव हो गया था।

काम में सहयोग करने की बात कह स्कूल नहीं गईं थीं बेटियां
नानी शांति देवी ने बताया कि मंगलवार पायल और ब्यूटी स्कूल के लिए तैयार नहीं दिखीं। पूछने पर कहा कि नानी आज हमारा मन नहीं है। हम मम्मी के साथ घर के काम में सहयोग करेंगे। इतना कहकर दोनों बेटियां अंदर मां के पास चली गई थीं। वहीं, मामी रानी देवी ने बताया कि सुबह करीब सवा नौ बजे पारिवारिक देवर की आवाज सुनकर जब वह बाहर निकलीं तो उन्हें चांदनी के मुंह से झाग निकलता दिखा। दोनों बेटियां बेसुध सी थी।

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कानपुर सुसाइड केस - फोटो : amar ujala

बच्चियों ने जान देकर फिर चुकाई घरेलू तनाव की कीमत
चांदनी और उसकी बेटियों पायल व ब्यूटी के शवों का बुधवार को पोस्टमार्टम होगा। पुलिस ने शवों को हैलट की मांचुरी में रखवा दिया है। पारिवारिक तनाव के बीच उठे विवाद का असर सीधे बच्चों की सुरक्षा पर पड़ता दिख रहा है। सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर घरेलू कलह या तनाव की कीमत बच्चे कब तक चुकाते रहेंगे।

  • 19 अप्रैल को किदवईनगर के ब्लॉक में शशिरंजन तिवारी ने की थी जुड़वां बेटियों की हत्या।
  • जनवरी 2026 को घाटमपुर में सुरेंद्र ने खाना न बनने पर बेटे लवांश और पत्नी रूबी को मार डाला।
  • फरवरी 2024 को चकेरी की कांशीराम कालोनी में निशा ने बेटी आशनी को मार डाला था।
  • अप्रैल 2023 को सजेती के बीबीपुर में मनोज ने बेटी मंजीता की हत्या की थी।
  • 1 सितबंर 2022 को मकनपुर में रागिनी सक्सेना ने बेटी अंशी व प्रियांशी को मार आत्महत्या की थी।
  • दिसंबर 2021 को इंदिरानगर में डॉ. सुशील ने पत्नी, तीन बच्चों को जहर देकर खुदकुशी की थी।
  • अप्रैल 2017 को घाटमपुर के सरगांव में रेखा ने बेटी अंशिका को जहर देकर मार दिया था।
  • जुलाई 2016 को महाराजपुर के फतेहपुर निवासी पिंकी ने बेटी परी को जहर देकर खुद जान दे दी थी।

 

Kanpur Ambulance Staff Kept Asking for Location Over Phone Mother and Daughters Left Desperate for Treatment
कानपुर पुलिस - फोटो : अमर उजाला

ऐसे मामलों में शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखता है लेकिन अंदर ही अंदर चल रही खींचतान स्थिति को भयावह बना देती है। ऐसे मामलों से बचने के लिए समय पर काउंसिलिंग, संवाद और पारिवारिक सहयोग बेहद जरूरी है।  -पूनम सिंह, मंडलीय मनोवैज्ञानिक

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