फैक्टरी खुलते ही सूखने लगी थी रिश्ते की स्याही: कभी पैन किंग के नाम से मशहूर थे विक्रम कोठारी, फिर ऐसे शुरू हुआ पतन का दौर

अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 05 Jan 2022 10:27 AM IST
Vikram Kothari
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विक्रम कोठारी ने सफल कारोबारी के रूप में जो भी शोहरत और पहचान कमाई थी, बैंक घोटालों ने उनकी फजीहत करा दी थी। इतना ही नहीं जिस पेन कंपनी रोटोमैक ग्लोबल से सफल उद्यामी बने, वही कंपनी दोनों भाइयों के बीच विवाद की जड़ भी बनी। सूत्रों के अनुसार विक्रम कोठारी अपने पिता द्वारा खड़ी की गई कंपनी पान पराग का पैसा रोटोमैक में लगाने लगे थे। यह बात उनके भाई दीपक कोठारी को अखरने लगी थी। इसी वजह से दीपक ने यस ब्रांड से मिनरल वाटर की फैक्टरी लगाई। इसके बाद दोनों में वैचारिक मतभेद इतना बढ़ गया कि नौबत बंटवारे की आ गई। दीपक के हिस्से पान पराग आया तो विक्रम के हिस्से रोटोमैक कंपनी आई। विक्रम कोठारी ने रोटोमैक कंपनी की स्थापना 90 के दशक में की थी। बंटवारे के बाद जब कंपनी पूरी तरह से उनके हिस्से में आई तो उन्होंने कारोबार और तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया। रोटोमैक कंपनी ने बाजार में तेजी से पकड़ बनानी शुरू कर दी। देश ही नहीं विदेश में भी कंपनी का नाम बिकने लगा था। इसके बाद विक्रम कोठारी ने फॉरेन ट्रेड, रियल इस्टेट, फूड, सॉफ्टवेयर समेत तमाम कारोबार में निवेश किया।
 
विक्रम कोठारी
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पैन किंग के नाम से मशहूर थे विक्रम कोठारी
विक्रम कोठारी रोटोमैक की सफलता के साथ 90 के दशक में पेन किंग के नाम से कारोबार जगत में मशहूर हुए। उन्होंने 38 देशों में रोटोमैक पेन का कारोबार फैलाया था। उनके ब्रांड के दबदबे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सलमान खान और रवीना टंडन जैसे फिल्म स्टार ब्रांड एंबेसडर थे। रोटोमैक ब्रांड की शुरुआत उन्होंने 1992 में की थी। विक्रम कोठारी मशहूर उद्योगपति मनसुख भाई कोठारी के बेटे थे। जिन्होंने पान पराग नाम के गुटखा की शुरुआत की थी। 
 
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विक्राम कोठारी (फाइल फोटो)
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मनसुख भाई के बाद विक्रम ने यह काम संभाला। पान पराग की मार्केटिंग के कारण विक्रम कोठारी को कई अवार्ड भी मिले। कानपुर के गुटखा किंग का टाइटल भी उन्हें पान पराग के कारण ही मिला। प्रॉपर्टी के विवाद में उनका और भाई दीपक कोठारी के बीच बंटवारा हो गया। इसमें 1973 में शुरू हुआ पान पराग गुटखा का कारोबार दीपक कोठारी के हिस्से में चला गया। विक्रम कोठारी के हिस्से में स्टेशनरी का व्यापार आ गया। 
रोटोमैक समूह के मालिक विक्रम कोठारी
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... और शुरू हुआ पतन का दौर
रोटोमैक कंपनी का करीब दो दशक तक बाजार में सिक्का चला। 2010 से इस कंपनी का पतन शुरू हो गया। वजह बताई जा रही कि इस समय तक देश में कई बड़ी पेन कंपनियां बाजार में आ चुकी थीं। उधर, विक्रम कोठारी ने जिन दूसरे कारोबारों में पैसा लगाया, उनमें भी सफलता नहीं मिली। इसके चलते विक्रम ने कंपनी की हैसियत से ज्यादा लोन ले डाले। कंपनियां दिवालिया हो गईं। मामला (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) एनसीएलटी में पहुंच गया। फरवरी 2018 में विदेश जाने की खबरों के बीच सीबीआई ने पहले विक्रम को और बाद में राहुल को गिरफ्तार कर लिया।
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vikram kothari
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शहर का सबसे बड़ा बैंकिंग फ्रॉड विक्रम के नाम 
विक्रम कोठारी ने कारोबार जगत में बड़ा नाम कमाया लेकिन शहर का सबसे बड़ा बैंकिंग फ्रॉड भी इन्हीं के नाम रहा। इन्होंने बजट नाम से वाशिंग पाउडर भी निकाला। इसके अलावा डायमंड के कारोबार में भी हाथ आजमाया। कारोबार को खड़ा करने के लिए अलग-अलग बैंकों से 3800 करोड़ का लोन लिया। पेनाल्टी, ब्याज मिलाकर यह रकम सात हजार करोड़ से ज्यादा हो गई। 
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