मेरठ के दौराला स्थित पूर्व विधायक चंद्रवीर सिंह के शीतगृह के संचालन के लिए शनिवार सुबह मुहूर्त था। इसके चलते शीतगृह में सफाई चल रही थी। जम्मू के उधमपुर से आए मजदूर भी तैयारी में जुटे थे। सब ठीक चल रहा था। अचानक कंप्रेशर धमाके के साथ फट गया। इससे पांच मंजिला शीतगृह में एक हिस्से का लिंटर भरभराकर गिरने लगा। इसमें मजदूर दब गए। चीखपुकार के साथ भगदड़ मच गई। धमाके से पूरा दौराला क्षेत्र दहल गया। लोग मजदूरों को बचाने के लिए शीतगृह की तरफ दौड़े, लेकिन यहां अमोनिया गैस फैल चुकी थी।
शीतगृह में मौत का मंजर: धमाके के बाद मची चीख-पुकार, मलबे में दम तोड़ गईं सात जिंदगियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धमाका होते ही मचा शोर... भागो-भागो
कुछ मजदूरों ने बताया कि धमाका इतना तेज था, जैसे बम फट गया हो। कुछ लोग बम तो कुछ भूकंप का शोर मचा रहे थे। धमाके के बाद कई लोगों ने शोर मचाया- भागो-भागो। यहां से लोग सड़क की ओर दौड़े। इस दौरान एनएच-58 पर जाम की स्थिति बन गई।
चिल्लाए लोग....मलबे से मजदूरों को निकालो
हादसे के बाद आसपास के लोग काफी देर तक दहशत में रहे। घायल मजदूर बचने के लिए चीखपुकार कर रहे थे तो आसपास मौजूद लोग गैस की दुर्गंध के कारण परेशान थे। गैस के रिसाव के कारण कुछ लोग शीतगृह में तो घुसे, लेकिन मलबे वाली जगह तक नहीं पहुंच पाए। इसके बाद लोग चिल्लाते रहे कि मलबे में मजदूरों को निकालवा दो।
मलबा हटाने में जुटा रहा अफसरों का अमला
एडीजी, कमिश्नर और आईजी सहित अन्य आला अधिकारियों के साथ पूरा अमला मलबा हटाकर मजदूरों को बचाने में जुटा रहा। मास्क लगाकर अधिकारी निगरानी करते रहे। उन्होंने लाेगों को समझाया कि घबराने की बजाय सतर्क रहने की जरूरत है। मजदूर जहां काम कर रहे थे, वहीं के मलबे को पहले हटवाया गया।
देरी से पहुंची टीम
हादसे के बाद 30 मिनट की देरी से पुलिस और दमकल टीम पहुंची। इससे लोगों ने नाराजगी रही। गैस को तेज रिसाव होने पर पुलिस वाले मुंह पर रूमाल, कपड़ा या फिर मास्क लगाकर पहुंचे। वहीं दौराला में फायर स्टेशन की मांग कई बार उठ चुकी है। पिछले वर्ष पांच मार्च को दौराला में दिल्ली-सहारनपुर पैसेंजर की तीन बोगियों में आग लग गई थी। तब भी मांग उठी थी।
लगा जाम
हादसे के बाद हाईवे पर पुलिस तैनात कर दी गई। अधिकारियों के आदेश पर हाईवे को वनवे कर दिया गया। लगभग दो घंटे तक वाहनों का आवागमन प्रभावित रहा। वाहनों की लंबी कतारें लग गई। बवाव कार्य खत्म होने के बाद ही यातायात सुचारु हो सका।