उत्तर प्रदेश के शामली में पिता-पुत्र की हत्या के आरोपी सिपाही विक्रांत और उसके पिता विरेंद्र सिंह और साथी मोनू को शामली पुलिस ने कोर्ट में पेश करने के बाद तीनों को जेल भेज दिया गया। इससे पहले पूछताछ में सिपाही ने हत्या की वारदात को लेकर कई बड़े खुलासे किए।
बड़ा खुलासा: सिपाही विक्रांत ने चलती कार में पिता-पुत्र को मारी थी गोलियां, खून के निशान मिटाने को किया था ये काम
गिरफ्तारी के बाद से ही इस हत्याकांड में हर दिन बड़े खुलासे हो रहे हैं। पुलिस पूछताछ में सिपाही ने बताया कि पिता-पुत्र को उसने चलती कार में गोली मारी थी। बागपत के जंगल में खून के निशान मिटाने के लिये कार की सीट और अपने कपड़े तक जला दिए थे ताकि पुलिस को कोई सुबूत ही न मिल पाए।
मूलरूप से सरधना के छुर गांव निवासी भूपेंद्र सिंह और उनके पुत्र अर्जुन की हत्या बुधवार शाम को शामली के मखमूलपुर गांव निवासी सिपाही विक्रांत और उसके परिवार ने लेनदेन के विवाद में कर दी थी। इस मामले में सिपाही का भाई अर्जुन शुक्रवार को जेल चला गया था।
पुलिस ने विक्रांत और उसके साथी मोनू से पूछताछ की तो उसने बताया कि 5.80 लाख रुपये के लेनदेन में वारदात की। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने शर्ट की राख और जली हुई सीट भी बागपत के जंगल से बरामद की है। आरोपी ने अवैध पिस्टल से गोली मारना बताया। वहीं, पुलिस की जांच में भी सर्विस पिस्टल से गोली नहीं चलने का दावा किया गया।
सवालों पर चुप रहा विक्रांत
कोर्ट में पेश करने से पहले मीडिया ने विक्रांत से हत्या की वजह व भूपेंद्र को दी गई रकम के बारे में कई सवाल किए गए, लेकिन विक्रांत ने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया और चुप ही खड़ा रहा।
पुलिस ने हत्या में प्रयोग की गई होंडा सिटी कार, सर्विस व अवैध पिस्टल और कारतूस व खोखे भी बरामद किए हैं। इस मामले में नामजद विक्रांत की पत्नी शिवानी और मां मुद्रेश को भी हिरासत में लिया था, लेकिन उन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।
जिसकी नौकरी के लिए दिए रुपये, उसे जाना पड़ा जेल
आरोपी सिपाही विक्रांत ने अपने भाई अर्जुन की नौकरी लगवाने के लिए जो रुपये भूपेंद्र को दिए थे, वही अर्जुन के जेल जाने का कारण बन गए। न तो रुपये ही मिले और जेल भी जाना पड़ा। नौकरी के लिए कितने रुपये दिए गए यह अभी भी स्पष्ट नहीं हुआ है। भूपेंद्र की मां सुरेश देवी का कहना है कि दो लाख रुपये दिए थे और अब विक्रांत 5.80 लाख मांग रहा था।