अनोखे नजारे: 70 किलो वजनी कांवड़ के साथ डांस, तो कहीं पालतू कुत्ते भी हरिद्वार से लाए गंगाजल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांवड़ यात्रा में यूं तो हरिद्वार से जल लाना महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इस दौरान गंगाजल के साथ लाई जाने वाली कांवड़ों में सर्वाधिक कठिन ‘खड़ी कांवड़’ होती हैं। इस कांवड़ को लाने में परंपरागत नियमों का पालन किया जाता है। इसकी खास बात यह है कि इस कांवड़ को आरंभ से विश्राम तक खड़ा ही रखा जाता है। मुरैना और ग्वालियर क्षेत्र के 24 सदस्यों की टीम हाईवे से गुजरी।
टीम सदस्यों ने बताया कि क्षेत्र से लगभग 200 लोग हैं जो कांवड़ ला रहे है। पंचम सिंह ने बताया कि उनकी टीम में 24 सदस्य हैं। टीम 21 जुलाई को जल लेकर चले थे। खड़ी कांवड़ होने के कारण सतर्कता भी अधिक रहती है। तीन दिन में एक व्यक्ति नौ घंटे ही सोया है। भूप सिंह ने बताया कि वे 29 जुलाई की रात तक मुरैना पहुंच जाएंगे।
बाइक पर कांवड़
भूमिया पुल से 14 युवकों की टीम बाइक से कांवड़ ला रही है। टीम ने अपने ग्रुप का नाम ‘महाकाल ग्रुप’ बताया। टीम में यश, विशाल, राजीव, वासू, विनय, अमित, शिवांशु, सागर, करण ने बताया कि वे सभी छात्र हैं। ऐसे ही कई अन्य ग्रुप भी हाईवे पर नजर आए जो बाइक से कांवड़ लेकर पहुंचे हैं। इनमें ज्यादातर दिल्ली व हरियाणा के युवक हैं।
हाईवे पर पहुंची महाराष्ट्र की टीम
महाराष्ट्र के सांगली क्षेत्र के बाइकर्स की टीम भी मोदीपुरम बाईपास पर पहुंची। पांच बाइक पर दस युवक सवार थे। इन्होंने बाइक पर आगे और पीछे पीले झंडे लगा रखे थे। युवकों ने बताया कि तीन दिन में महाराष्ट्र पहुंच जाएंगे।
नवीं कक्षा के चार छात्रों ने उठाई वैकुंठी कांवड़
दिल्ली मंगोलपुरी निवासी चार किशोरों ने पहली बार भगवान शिव का नाम लेकर कांवड़ उठाई। साहिल, अमन, अभिषेक और मनीष ने बताया कि वे नौवीं कक्षा के छात्र है। इस बार उन्होंने कांवड़ लाने का प्रण लिया था। हरिद्वार से चलकर चारों छात्र बुधवार दोपहर कंकरखेड़ा खिर्वा बाईपास स्थित शिविर में पहुंचे।
रविवार 21 जुलाई को उन्होंने जल उठाया था। छात्रों ने बताया कि वे दसवीं कक्षा में अच्छे नंबर पाना चाहते हैं इसके लिए उन्होंने कांवड़ उठाई है। यात्रा को उन्होंने थोड़ा कष्टदायक बताया। उनकी कांवड़ का वजन लगभग 60 किलो है। जिसे राष्ट्रध्वज से सजाया गया था। साथ ही कांवड़ पर मास्क भी लगाए गए थे।
दादी की इच्छा पूर्ति के लिए नौ वर्षीय भविष्य लाया कांवड़
दादी की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए नौ वर्षीय बच्चा भविष्य अपने दादा के साथ हरिद्वार से कांवड़ लेकर आया। भोले का जयकारे लगाते हुए निरंतर गंणतव्य की ओर बढ़ता गया। न तो उसके चेहरे पर कोई सिकन थी और न ही पैरों में छाले।
हरियाणा के शरदनगर निवासी नौ वर्षीय भविष्य पुत्र रमेश के दादा मलखान सिंह ने बताया कि, भविष्य ने आठ माह में ही जन्म ले लिया था उस समय वह बेहद कमजोर और बीमार हो गया था। उस समय उसकी दादी अंगुरी ने बच्चे को सही करने लिए भोलेनाथ से कांवड़ लाने की मनोकामनाएं मांगी थी। जिसके बाद सब कुछ ठीक हो गया था। भविष्य नौ साल का हुआ तो उसने अपनी दादी की इच्छा की पूर्ति के लिए कांवड़ लाने का संकल्प लिया। जिसको पूरा करने के लिए वह हरिद्वार से कांवड़ लेकर आया है।

कमेंट
कमेंट X