मेरठ के रोहटा थाना क्षेत्र में अनुसूचित जाति की छात्रा के अपहरण और हत्या के मामले में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। शुक्रवार को पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को पुलिस ने सिवाया टोल प्लाजा पर रोक दिया।
Meerut: गांव सील-पीड़ित परिवार को मिली सुरक्षा, आज आ सकते हैं संजय सिंह, दिग्गजों में जुबानी जंग जारी
मेरठ छात्रा हत्याकांड में नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज मामले में उत्तर प्रदेश के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है।
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पुलिस कार्रवाई पर लगाए आरोप, एसएसपी पर कसा तंज
चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया और वरिष्ठ अधिकारियों का व्यवहार उचित नहीं था। उन्होंने कहा कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी किसी दबाव में कार्य कर रहे थे।
उन्होंने नामजद आरोपियों के साथ-साथ कथित लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की मांग की। एसएसपी के पौधारोपण संबंधी बयान पर भी उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पेड़ लगाना अच्छी बात है, लेकिन उसकी छांव में कौन बैठेगा, यह समय बताएगा। साथ ही धरने के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की भी मांग की।
गांव और टोल प्लाजा पर रहा कड़ा सुरक्षा घेरा
घटना के बाद छात्रा के गांव और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई। रोहटा जाने वाले प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर वाहनों की जांच की गई। सुरक्षा कारणों से मीडिया और जनप्रतिनिधियों के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई। वहीं सिवाया और भूनी टोल प्लाजा पर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा और प्रत्येक वाहन की जांच की गई।
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बयान जारी कर दलित, पिछड़े और अन्य उपेक्षित वर्गों से कानून हाथ में न लेने और संवैधानिक व्यवस्था के तहत न्याय की लड़ाई लड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी अन्याय की स्थिति में अदालत का सहारा लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठन और राजनीतिक दल अपने राजनीतिक हितों के लिए लोगों को आंदोलनों में शामिल करते हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वह मायावती का सम्मान करते हैं, लेकिन जब न्याय नहीं मिलता और संविधान की भावना के अनुरूप कार्रवाई नहीं होती तो लोगों को सड़क पर उतरना पड़ता है।
अखिलेश यादव और इकरा हसन ने सरकार पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर छात्रा के परिवार के साथ तस्वीरें व संदेश साझा करते हुए पुलिस कार्रवाई और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नामजद आरोपियों पर अपेक्षाकृत हल्की धाराएं लगाई गई हैं, जबकि आंदोलन में शामिल लोगों पर गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उन्होंने पुलिस के व्यवहार को भी कठघरे में खड़ा किया। इस दौरान सांसद इकरा हसन भी मौजूद रहीं।
प्रतिनिधिमंडल ने डीएम और एसएसपी को सौंपा मांगपत्र
धरना समाप्त होने के बाद आजाद समाज पार्टी के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा, निष्पक्ष जांच, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की दोबारा जांच, आवश्यकता पड़ने पर गंभीर धाराएं जोड़ने, परिवार के एक सदस्य को नौकरी, शस्त्र अनुज्ञापत्र और आर्थिक सहायता देने की मांग की। साथ ही धरना-प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार लोगों को राहत देने की भी मांग उठाई।
प्रतिनिधिमंडल की मांग के बाद छात्रा के घर पर दो पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई। ग्रामीण क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक अभिजीत कुमार ने कहा कि पीड़ित परिवार से मुलाकात कराई गई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
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आज मेरठ आ सकते हैं संजय सिंह
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह के शनिवार को मेरठ पहुंचने की संभावना है। पार्टी के जिला अध्यक्ष ने इसकी जानकारी दी है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मेरठ में प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज के मामले में उत्तर प्रदेश के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर पंद्रह दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप मानवाधिकारों के उल्लंघन की ओर संकेत करते हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान बिना उकसावे के बल प्रयोग किया गया और हिरासत में लिए गए लोगों के साथ मारपीट की गई। आयोग ने मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।