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बेबसी: 650 किमी की दूरी तय कर रोजी-रोटी कमाने आए थे...मिली मौत, चंद कदम पर स्कूल, चपेट में आ सकते थे बच्चे

Sat, 25 Feb 2023 03:31 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 25 Feb 2023 03:31 PM IST
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Meerut Cold storage accident: school is few steps away, children could have come in the grip on gas
हादसे के बाद मजदूर - फोटो : अमर उजाला
मेरठ के शीतगृह में हादसे के बाद अस्पतालों में बेबस मजदूरों की आंखों से आंसू बह रहे थे। हर काेई बस यही पूछ रहा था कि हमारे सारे साथी ठीक तो हैं। जिसको भी पता चला कि सात मजदूरों की मौत हो चुकी है तो हर कोई बिलखने लगा। कुछ ने कहा- रोजी-रोटी कमाने आए थे, लेकिन मौत मिल गई। हादसे में बाल-बाल बचने वाले परिजनों को फोन कर बता रहे थे कि खौफनाक मंजर था, हम तो बच गए, लेकिन सात साथी चले गए। 


जम्मू से मेरठ आए मजदूर एक महीने के लिए 30 हजार रुपये की मजदूरी पर आए थे। सभी का सपना था कि एक महीने बाद मेहनत की कमाई ले जाकर परिवार को देंगे लेकिन यहां आकर सबकुछ लुट गया। जम्मू से गुरुवार रात ट्रेन से रवाना हुए सभी 27 मजदूर शुक्रवार सुबह आठ बजे मेरठ पहुंचे थे। रातभर सफर के बावजूद उन्होंने आराम करने की बजाय सुबह से ही काम शुरू कर दिया। दोपहर तक काम में लगे रहे, लेकिन उनकी यह खुशी मातम में बदल गई। 

 
Meerut Cold storage accident: school is few steps away, children could have come in the grip on gas
हादसे के बाद मजदूरों को निकालती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
शीतगृह में धमाके के बाद हर कोई जान बचाने को इधर-उधर दौड़ता रहा। लिंटर के मलबे के नीचे जो दबे उन्होंने अमोनिया का रिसाव होने के कारण वहीं पर तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। ठेकेदार जगदीश के साथ आए पिता यशपाल और बेटे श्याम सुंदर ने बताया कि पहली बार जम्मू से बाहर काम करने आए थे और इस बार ही मौत का सामना हो गया। दोनों ने बताया कि मौत को इतने नजदीक से देख लिया कि अभी तक यकीन नहीं हो रहा है कि हम बच गए। 

 
Meerut Cold storage accident: school is few steps away, children could have come in the grip on gas
मेरठ गैस हादसा - फोटो : अमर उजाला
मृतक कालूराम के भाई ने बताया कि उसकी शादी को अभी सात साल ही हुए थे। दो बेटी और एक बेटा है। परिवार से कहकर आया था कि 30 हजार रुपये कमाकर लौटेगा, लेकिन अब उसका शव ले जाना पड़ेगा। मृतकों के परिजनों को फोन कर सूचना दी गई तो परिवारों में कोहराम मच गया। मजदूरों ने बताया कि एक बोरा ढोने के लिए आठ रुपये तय किए गए थे।
 
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Meerut Cold storage accident: school is few steps away, children could have come in the grip on gas
सांसद राजेंद्र अग्र्वाल - फोटो : अमर उजाला

गैस रिसाव के सामने अपनों को बचाने की जद्दोजहद
मेरठ। शीतगृह में लिंटर गिरने के बाद 12 मजदूर किसी तरह बाहर तो निकल गए लेकिन उनकी नजरें भीतर ही अटकी हुई थीं। वे बार-बार लोगों से यही कह रहे थे कि हमारे साथी भीतर फंसे हुए हैं लेकिन गैस का रिसाव इतना है कि हम वहां रुक नहीं पाए। वे बार-बार शीतगृह में घुसने का प्रयास करते लेकिन गैस के रिसाव के चलते भीतर नहीं घुस पाए।  
 
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Meerut Cold storage accident: school is few steps away, children could have come in the grip on gas
मेरठ गैस हादसा - फोटो : अमर उजाला
डॉग स्कवायड की ली मदद 
मलबे में फंसे लोगों को तलाशने के लिए टीम ने डॉग स्कवायड की भी मदद ली। आशंका थी कि मलबे में अभी भी मजदूर दबे हुए हैं जिसके बाद डॉग स्कवायड टीम को भी लगाया गया।
 
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