मेरठ का लाल मेजर मयंक विश्नोई देश पर कुर्बान हो गया। जैसे ही उनकी शहादत की खबर मिली तो परिवार में कोहराम मच गया और पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं पूरी कॉलोनी में सन्नाटा छा गया। इस दौरान दोनों बड़ी बहनें बेसुद हो गईं। इसके बाद शहीद के घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लग गया और किसी की भी आंखों से आंसू नहीं थम रहे थे।
शोपियां में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान लगी थी गोली
मेरठ के कंकरखेड़ा शिवलोकपुरी निवासी मेजर मयंक विश्नोई (30 वर्ष) जम्मू कश्मीर के शोपियां में राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। 27 अगस्त से उनका उधमपुर स्थित सैन्य अस्पताल में इलाज चल रहा था। परिजनों के मुताबिक, आतंकियों से मुठभेड़ करते समय उनके सिर में गोली लगी थी। मेजर मयंक विश्नोई आईएमए देहरादून से 2013 में पास आउट हुए। इसके बाद उनकी पहली पोस्टिंग वर्ष-2017 में मध्य प्रदेश के महू में लेफ्टिनेंट पद पर हुई। वह 44 बटालियन की राजपूत रेजीमेंट में थे। वर्ष-2019 में उन्हें मेजर बना दिया गया।
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शहीद मेजर मयंक
- फोटो : अमर उजाला
उनके घायल होने की खबर मिलने के बाद ही पिता वीरेंद्र विश्नोई, माता मधु विश्नोई और पत्नी स्वाति उधमपुर स्थित सैन्य अस्तपाल पहुंच गए थे। 27 अगस्त के बाद से लगातार डॉक्टरों की टीम उन पर नजर बनाए हुए थी। हालांकि, मेजर मयंक कुछ बोल नहीं पा रहे थे।
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Martyr Major Mayank vishnoi, शहीद मेजर मयंक विश्नोई
- फोटो : अमर उजाला
परिजनों का कहना है कि लगातार ब्लड प्रेशर उनका कम होता जा रहा था और वह वेंटीलेंटर पर थे। शनिवार तड़के मयंक वीरगति को प्राप्त हो गए। परिवार में दो बहन तनु और अनु के बाद मयंक सबसे छोटे थे।
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Martyr Major Mayank vishno, शहीद मेजर मयंक विश्नोई
- फोटो : अमर उजाला
बताया गया कि उनके पिता वीरेंद्र विश्नोई भी सेना में सूबेदार से वर्ष-1998 में सेवानिवृत्त हुए। उनकी शहादत की खबर घर पहुंचते ही दोनों बहनें बेसुध हो गई। वहीं आसपास में मयंक के शहीद होने की खबर सुनते ही घर पहुंचने वालों का तांता लग गया।
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Martyr Major Mayank vishno, शहीद मेजर मयंक विश्नोई
- फोटो : अमर उजाला
रविवार को पहुंचेगा पार्थिव शरीर
पिता-माता शनिवार शाम को उधमपुर से मेरठ पहुंच गए। वहीं, मेजर मयंक विश्नोई का पार्थिव शरीर रविवार दोपहर तक मेरठ लाया जाएगा। सैन्य अधिकारियों ने मयंक के घर पहुंचकर जानकारी ली।