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शहीदों की वीरांग्नाओं ने बांटा दर्द, बोलीं- 'हिम्मत न हारना प्रियंका, बच्चों को तुम्हारी जरूरत है'

Thu, 21 Feb 2019 03:19 PM IST
दुष्यंत शर्मा सचिन त्यागी, अमर उजाला, मेरठ
सचिन त्यागी, अमर उजाला, मेरठ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 21 Feb 2019 03:19 PM IST
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#pulwama, Martyrs widows shared pain with ajay wife, saying, your children  need you Do not give up
martyr ajay kumar wife
मेरठ के बसा टीकरी गांव के शहीद अजय कुमार के घर में शोक पसरा है। मिलने-जुलने वालों का तांता लगा है। दुख की घड़ी इतनी बड़ी है कि उसे बयां नहीं किया जा सकता। अजय की शहादत के साथ मेरठ के कुछ उन परिवारों का भी दर्द ताजा हो गया, जब उनके परिवार का कोई सदस्य सीमा से तिरंगे में लिपटा आया था...सालों पुराना वो खौफनाक दिन आज भी उन्हें सालता है। देश पर कुर्बान होने वाले इन शहीदों की वीर नारियों-बेटियों की अजय के परिवार के प्रति बेहद संवेदना है। देखें कैसे इन वीरांगनाओं ने पति की शहादत के बाद खुद को संभाला: -


 
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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
अपने पति को देश पर कुर्बान कर देने वाली इन वीर नारियों का कहना है कि इस दुख को कोई बांट नहीं सकता। न ही अपनों को भुलाया जा सकता है। इस दुख से निकलना ही सबसे बड़ा संघर्ष है। ये वीर नारियां प्रियंका से मिलकर उनको बताएंगी कि तमाम दुश्वारियों के बावजूद जिस तरह उन्होंने अपने बच्चों को योग्य बनाया। उसी तरह वह भी आगे बढ़ें और बेटे को कामयाबी की राह पर ले जाएं।

 
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सन् 1999 के कारगिल युद्ध में जब लांस नायक सत्यपाल सिंह ने अपनी शहादत दी थी तो उनकी उम्र महज 28 साल थी। वीर नारी बबीता देवी बताती हैं कि कई महीनों तक तो समझ में ही नहीं आया कि जिंदगी अब कैसे जिऊंगी। लेकिन बच्चों के भविष्य के खातिर हिम्मत जुटाई। दिक्कतें बहुर्त आईं, लेकिन हार नहीं मानी। अब बेटे पुलकित एमबीए कर रहे हैं और बिटिया दिव्या एमए। 

दोनों सेना में अफसर बनने के लिए तैयारी कर रहे हैं। दोनों को अपने पिता पर फख्र है। बबीता कहती हैं कि जिस दिन अजय के शहीद होने की खबर सुनी तो मुझे वो दिन याद आ गया, जब वो तिरंगे में लिपटकर आए थे। मेरी बेटी दिव्या भी उस वक्त ढाई साल की थी। बेटा पुलकित साढ़े तीन साल का। बबीता कहती हैं कि वे प्रियंका से मिलने उसके घर जाएंगी। बताएंगी कि हिम्मत रखो। अपने बच्चे के लिए जीओ। उसे कामयाब बनाओ।

 
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वीर नारी उर्मिला देवी - बच्चों के लिए खुद को मजबूत बनाया
1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे हस्तिनापुर के ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव। उनकी पत्नी वीर नारी उर्मिला देवी बताती हैं कि जब वे शहीद हुए तो बड़ी बेटी ज्योति आठ, बेटा संदीप सात और दीपक चार साल का था। उनके जाने के बाद परिवार की मदद से खुद को मजबूत बनाया। बच्चों के भविष्य की खातिर मजबूती से खड़ी हुई। फिलहाल बेटी की शादी हो चुकी है। 

बड़ा बेटा गैस एजेंसी देखता है और छोटा एमएससी कर रहा है।  उर्मिला कहती हैं कि सीआरपीएफ जवानों पर हमले से बहुत आहत थी। तभी ये मनहूस खबर भी सुनने को मिली कि यहां के अजय कुमार शहीद हो गए हैं। उर्मिला कहती हैं कि आसान नहीं है इतनी जल्दी खुद को संभालना, लेकिन प्रियंका को अपने सास-ससुर और बच्चे के लिए हौसला दिखाना होगा। मैं परिवार समेत इस वीर परिवार से मिलने गांव जाऊंगी।

 
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वीर बेटी आरती - ऐसे वीरों के लिए आगे आए समाज
साल 2006 में जम्मू के अनंतनाग में आतंकियों से मुकाबला करते हुए कंकरखेड़ा के देशपाल सिंह शहीद हुए थे। देशपाल सिंह की वीर बेटी आरती उस समय महज छह साल की थी। उनको बस कुछ ही बातें याद हैं। आरती ने बताया कि परिवार में मम्मी बबीता तोमर के अलावा कोई और बड़ा नहीं था। पापा के जाने के बाद मम्मी ने बहुत सी मुश्किलों का सामना किया। वह जब नौ साल की थी। उनकी मां की हत्या कर दी गई। 

उसके बाद परिवार में कोई नहीं रहा। आरती बताती हैं कि उनके मामा वीरसैन और मामी शिमला ने उनको बेटी की तरह पाला। पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष मेजर राजपाल ने बहुत मदद की। इन लाेगों की बदौलत मैं अपना ग्रेजुएशन पूरा कर चुकी हूं। फिलहाल एयरफोर्स में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रही हूं। आरती ने बताया कि अजय के बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ। उनके जाने के बाद प्रियंका के लिए एक नई जंग शुरू हो गई है। इस जंग को उसे अपने हौसले से जीतना होगा। ऐसे में सबको साथ खड़े होना होगा। सेना के अलावा सरकार और समाज भी ऐसे वीरों के लिए आगे आए।
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