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फ्रेंडशिप डे: हमेशा एक-दूसरे के सुख और दुख में दिया साथ, पढ़ें दोस्ती के कुछ खास किस्से

पुजा सिंह , अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 05 Aug 2018 05:23 PM IST
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Friendship Day specail story of friends from varanasi
varanasi - फोटो : अमर उजाला
दोस्ती सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि एक अहसास है। वो एहसास जिसमें एक की खुशी में दूसरा हंसता है। दुख किसी का भी हो आंसू सबके छलकते हैं। आपकी दोस्त या सहेली... कभी मां की तरह पीठ थपथपाती है तो कभी आपको टीचर की तरह फटकार लगाती है। गुस्सा होने पर रूठे दोस्त को मनाती है तो टांग खींचकर सताती भी है। कहते हैं दोस्ती से बड़ी कोई नेअमत नहीं। बात सही भी है, क्योंकि दोस्तों के बिना जिंदगी बड़ी नीरस लगने लगती है। एक दूसरे की टांग खींचना, साथ में घूमना-फिरना, बिना किसी बात के खिलखिला कर हंसना और मुसीबत पड़ने पर आधी रात को भी दोस्त के लिए खड़े हो जाना, एक सच्चा दोस्त ही कर सकता है। अगस्त के पहले रविवार को मनाए जाने वाले फैंडशिप डे के मौके पर हम ऐसे ही दोस्ती से आपको रूबरू करा रहे हैं...। आगे की स्लाइड्स में देखें...



 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
भाई में दिखा दोस्त जैसा रिश्ता : पांडेयपुर निवासी चित्रकार पूनम राय अपने बड़े भाई नरेश राय को अपना सबसे बड़ा दोस्त मानती है, जिन्होंने उनके जीवन में हुए हादसे के बाद उन्हें एक दोस्त, भाई व पिता सभी तरह संभाला। पूनम कहती हैं दोस्त का मतलब सिर्फ दोस्ती निभाना नहीं होता है, सच्चा दोस्त वो होता है जिनके साथ हम सारे रिश्ते निभा सकते हैं। दोस्त वो है जो हमारे भावनाओं को समझे। नरेश राय कहते हैं मित्र का मतलब है जो हमारे दुख सुख में शामिल रहा। उनका मानना है कि घर परिवार में ऐसी मित्रता बनी रहे तो सभी के घर आबाद रहेंगे। 

 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला

किसी हूर की ख्वाहिश में, किसी ने शब्दों का दरिया उडे़ला है। ‘दिलदार के लिए मेरे लबों पर न कविता, शायरी के अल्फाज आए, तुम जैसी दोस्त के मिलने के बाद...’। छोटा लालपुर निवासी एक निजी कंपनी में काम करने वाली सिम्मी बताती हैं कि शादी के बाद एक ऐसा दौर आया जब मुझे अपने पति से अलग होना पड़ा तब मेरे अंधेरे पथ पर मेरी दोस्त सोनम द्विवेदी ने मुझे सहारा दिया। 20 सालों से ज्यादा का समय हो गया उस वाकिये को पर आज भी मेरी दोस्त मेरे साथ खड़ी रहती है, सुख दुख में कभी भी उसकी जरूरत हुई उसने मेरा साथ कभी नहीं छोड़ा।



 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
इनकी दोस्ती है 45 साल पुरानी : जंगमबाड़ी निवासी शंकर व खारीकुंआ निवासी सीताराम की दोस्ती 45 साल पुरानी है। जिन्होंने जीवन के अनेक पहलुओं को एक साथ जीया। यह सिलसिला बरसों चला और वक्त से साथ रिश्ता गहराता चला गया। इन दोनों के सामने ऐसी कई परिस्थितियां आई जब घरवालों ने साथ नहीं दिया लेकिन दोनों एक दूसरे का सहारा बनकर खड़े रहे। आज भी कभी मौका मिलता है तो दोनों दोस्त साथ बैठकर पुराने दिनों को याद करते हैं। 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला

शादी के बाद भी नहीं टूटी दोस्ती : खोजवां निवासी आर्य महिला पीजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर पर कार्यरत स्वाति मिश्रा कहती हैं अमूमन लोग कहते हैं कि लड़कियों की दोस्ती बस शादी से पहले तक होती है। लेकिन ऐसा नहीं है। वह कहती हैं कि मेरी सहेली मेनका तिवारी के साथ मेरी दोस्ती कक्षा नौ से आज तक बरकरार है। शादी होने के बाद मेनका विदेश चली गई बावजूद इसके मेरी संस्था को खड़ा करने में उसने मेरा आर्थिक सहयोग किया। स्कूल में हमें बैक बेंचर के नाम से जाना जाता था। मेनका कहती हैं जब भी कोई परेशानी हुई उसी का ख्याल आया। मानसिक रूप से जब भी जरूरत पड़ी स्वाति मेरे साथ खड़ी रही। 
 
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