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तस्वीरें : काशी आए प्रवासी नहीं भूल पाएंगे यहां का स्वागत-सत्कार
Wed, 23 Jan 2019 10:14 AM IST
shashikant misra
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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Published by: shashikant misra
Updated Wed, 23 Jan 2019 10:14 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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काशी में आने वाले अतिथियों का स्वागत बेहद ही भव्य ढंग से किया गया। प्रवासियों के आते ही उनको शहनाई की धुन सुनाई दी। सभी प्रवेश द्वारों पर बुंदेलखंड झांसी का राई नृत्य हो रहा था। वहीं बंगाल उड़ीसा और झारखंड में प्रचलित आदिवासी नृत्य छाऊ भी देखने को मिला। साथ ही महोबा के प्रसिद्घ नृत्य में पाई डंडा लोक नृत्य भी देखने को मिला है। कुछ ऐसी ही नजारा तीन दिवसीय प्रवासी भारतीय दिवस के दौरान देखने को मिल रहा है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : amar ujala
बाबतपुर एयरपोर्ट से लेकर ऐढ़े गांव स्थित टेंट सिटी (बालेश्वर अग्रवाल नगर), दीनदयाल हस्तकला संकुल से काशी के घाटों पर पूरे ठाठ-बाट के साथ अपनों का स्वागत किया गया। अतिथि देवो भव: की परंपरा का पालन करने वाली काशी वैभवशाली सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत के साथ दुनिया भर से आए मेहमानों के सत्कार में खिल उठी है।
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प्रवासियों के स्वागत के लिए लंबे समय से की जा रही तैयारियां सोमवार को मुकम्मल नजर आईं। जिधर भी देखा, काशीवासी बांहें फैलाए अपनों की आवभगत को उत्सुक रहे। जगह-जगह लगाए गए अलग-अलग देशों के राष्ट्रीय ध्वज, उनके स्वागत के लिए लगाए गए होर्डिंग, सजाए गए बाजार और दीवारों पर उकेरी गई यहां की खासियतों को देखकर प्रवासी बरबस बोल रहे हैं-काशी ऐसी है। इसमें अनगिन रंग हैं। कभी सोचा न था। हमारा भाग्य है कि हम ये सब न देख रहे हैं, उल्लास को महसूस कर रहे हैं।
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काशीवासी प्रवासियों को संस्कृति, सभ्यता और अध्यात्म के अद्भुत, अविस्मरणीय और अलौकिक दर्शन कराकर उन्हें कभी न भूलने वाली यादें दे रहे हैं। ये यादें उनके जेहन में सदियों तक जीवंत रहेगी। काशी के लोग ही नहीं, यहां के दर-ओ-दीवार ने भी अपने आतिथ्य परंपरा का परदेसियों का मान रख रही हैं।
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सामंजस्य को देखकर प्रवासी निहाल हो रहे हैं। उन्हें सही मायनों में वसुधैव कुटुंबकम की भावना दिख रही है। प्रवासियों की मेहमाननवाजी में पूरी काशी नए कलेवर और रंग में नजर आ रही है। चमकती सड़कों से लेकर बोलती दीवारें, रौशनी से जगमगाते घाटों पर बने महल से लेकर सीढ़ियां जैसे एक नई ही आभा में प्रवासियों के स्वागत के लिए तैयार हैं। इस कलेवर में लोक संस्कृति के रंग भी हैं।