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तस्वीरें: किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर ने काशी में किया पिंडदान, पूजन व तर्पण

Tue, 02 Oct 2018 03:06 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 02 Oct 2018 03:06 PM IST
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kinna akahada Mahamandaleshwar do pitrupaksh worship at kashi
varanasi - फोटो : amar ujala


किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में देश भर से किन्नर पीठाधीश्वरों व महंतों की जुटान मोक्ष की नगरी काशी में हुआ है। मंगलवार को पितरों को तारने के लिए किन्नर समाज की ओर से पिंडदान का अनुष्ठान किया।  इससे पूर्व भी किन्नर समाज की ओर से यह अनुष्ठान काशी में होता आया है। आगे की स्लाइड्स में देखें
kinna akahada Mahamandaleshwar do pitrupaksh worship at kashi
varanasi - फोटो : अमर उजाला


पितरों को तारने के लिए पिंडदान के क्रम में किन्नर समाज की ओर से देश भर से आए लोगों ने मंगलवार दोपहर में अनुष्ठान प्रारंभ किया। इससे पूर्व भी किन्नर समाज की ओर से यह अनुष्ठान काशी में दो वर्षों से होता आया है। इस वर्ष भी किन्नर समाज ने पितरों को तारने के लिए काशी स्थित पिशाचमोचन में सामूहिक पिंडदान का फैसला किया। 

 
kinna akahada Mahamandaleshwar do pitrupaksh worship at kashi
varanasi - फोटो : अमर उजाला

किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में देश भर से किन्नर पीठाधीश्वरों व महंतों की जुटान पिशाचमोचन कुंड पर मंगलवार सुबह से ही शुरू हो गई। सुबह दस बजे से विधि विधान पूर्वक श्राद्ध-तर्पण के आयोजन शुरू किए गए।

 
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kinna akahada Mahamandaleshwar do pitrupaksh worship at kashi
varanasi - फोटो : अमर उजाला
भारत में सिर्फ पिशाच मोचन कुंड पर ही त्रिपिंडी श्राद्ध होता है, जो पितरों को प्रेत बाधा और अकाल मृत्यु की बाधाओं से मुक्ति दिलाता है। इस कुंड का बखान गरुड़ पुराण में भी किया गया है। काशी खंड की मान्यता के अनुसार पिशाच मोचन मोक्ष तीर्थ स्थल की उत्पत्ति गंगा के धरती पर आने से भी पहले से है। 

 
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kinna akahada Mahamandaleshwar do pitrupaksh worship at kashi
धर्मकूप, मणिकर्णिका और दशाश्वमेध पर तर्पण-अर्पण और पिंडदान के लिए उमड़ेंगे वंशज - फोटो : अमर उजाला

मान्यता के अनुसार यहां स्थित पीपल के वृक्ष पर भटकती आत्माओं को बैठाया जाता है। इस दौरान पेड़ पर सिक्का रखवाया जाता है ताकि पितरों का सभी उधार चुकता हो जाए और पितर सभी बाधाओं से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर सकें और यजमान भी पितृ ऋण से मुक्ति पा सके।
 
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