सपा के कद्दावर नेता पारसनाथ यादव जिले की सियासत के पारस भी थे और नाथ भी। उनकी राजनीति में चमक, पार्टी में धमक और प्रशासन में हनक थी। सरकार किसी भी दल की रही हो, जनहित के मुद्दों पर संघर्ष में वे आगे रहते थे। अपने जुझारू तेवर बल पर ही उन्होंने ग्राम पंचायत से देश की सबसे बड़ी पंचायत (संसद) तक का सफर तय किया। वह दो बार ग्राम प्रधान, एक बार जिला पंचायत सदस्य, तीन बार मंत्री, दो बार सांसद और सात बार विधायक रहे।
जौनपुर की सियासत के केंद्र में थे पारस, मंत्री लक्ष्मीशंकर की जब्त करा दी थी जमानत
उनकी अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने सिर्फ दो चुनावी सभाओं को संबोधित किया था, जिसमें एक सभा मल्हनी के कोलाहलगंज में पारसनाथ यादव के समर्थन में हुई थी। सपा के संस्थापक सदस्यों में रहे पारसनाथ वर्ष 1985 में पहली बार विधायक बने। इस कार्यकाल में उनके कार्यों का असर इस कदर रहा कि 1989 में जब वह जनता दल के सिंबल पर मैदान में उतरे तो उनके सामने खड़े कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री लक्ष्मीशंकर यादव की जमानत जब्त हो गई थी।
पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद को भी पारसनाथ यादव ने 2004 के लोकसभा चुनाव में पटखनी दी। वह खुद तो विभिन्न पदों पर रहे ही पत्नी और बहू को ब्लाक प्रमुख, बेटे को जिला पंचायत सदस्य भी बनाया। जनता से सीधे जुड़े होने के कारण सिर्फ पार्टी में ही नहीं, विपक्षी दलों में भी उनका भरपूर सम्मान था। यही कारण रहा कि जब निधन की खबर पहुंची तो विभिन्न दलों के नेताओं का उनके अंतिम दर्शन के लिए तांता लग गया।
इसे संयोग ही कहेंगे कि जनवरी की12 तारीख को जन्मे पारसनाथ यादव का निधन जून की 12 तारीख को ही हुआ है। कैंसर से पीड़ित पारसनाथ यादव का लंबे समय से उपचार चल रहा था। इस सिलसिले में वह इधर कई महीनों से अक्सर लखनऊ में ही रह रहे थे। बृहस्पतिवार की रात ही वह जौनपुर स्थित अपने आवास पर आए और उसके कुछ घंटे बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया। पारसनाथ यादव के करीबियों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में जब भी उनसे बात होती थी तो कहते थे कि 12 तारीख को जौनपुर आ रहा हूं अब वहीं मुलाकात होगी। मुलाकात भी हुई तो ऐसी कि न कोई कुछ बोल सका और न ही वह कुछ सुन सके।
पूर्व सीएम अखिलेश और शिवपाल ने जताया शोक
पूर्व मंत्री व मल्हनी विधायक के निधन की खबर मिलते ही सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर शोक जताया। उन्होंने पारसनाथ यादव के मंत्री पद पर शपथ ग्रहण समारोह और जौनपुर आवास पर पारिवारिक सदस्यों के साथ की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि पारसनाथ यादव जी के निधन पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि। दुख की इस घड़ी में हम सब शोकाकुल परिवार के साथ हैं। शिवपाल यादव ने भी ट्वीटर पर पोस्ट कर श्रद्धांजलि देते हुए पारसनाथ यादव के निधन को अपनी व्यक्तिगत क्षति बताई है।
71 वर्षीय पारसनाथ यादव वर्ष 1985 में दलित मजदूर किसान पार्टी (लोकदल) के सिंबल पर पहली बार विधानसभा के लिए बरसठी सीट से निर्वाचित हुए। इसके बाद इसी सीट से वर्ष 1989 का चुनाव भी जनता दल के टिकट पर जीता। वर्ष 1991 की श्रीराम लहर में सजपा उम्मीदवार के तौर पर शिकस्त खानी पड़ी थी, मगर 1993 में सपा-बसपा गठबंधन के साथ हुए चुनाव में वह मड़ियाहूं सीट से सपा के टिकट पर निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे। वर्ष
1996 में वह चौथी बार विधायक बने और फिर 1998 में लोकसभा के लिए निर्वाचित हो गए। वर्ष 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें हार मिली। वर्ष 2002 के चुनाव में वह जीत दर्ज करते हुए मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में बनी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। वह वर्ष 2004 में फिर लोकसभा के लिए चुन लिए गए। वर्ष 2009 के चुनाव में मैदान में उतरे पारसनाथ यादव को बाहुबली धनजंय सिंह के हाथों मात मिली। इसके बाद वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में मल्हनी से निर्वाचित होकर अखिलेश यादव की सरकार में कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली।
2014 में पार्टी ने पहले डॉ. केपी यादव को उम्मीदवार बनाया, मगर ऐन वक्त पर उनका टिकट काटकर फिर से पारसनाथ यादव पर दांव लगाया। यह चुनाव भले ही पारस हार गए, मगर सपा की सियासत में उनके ऊंचे कद का सबको अहसास हो गया था। वर्ष 2017 के चुनाव में प्रचंड मोदी-योगी लहर के बावजूद वह फिर से मल्हनी सीट पर निर्वाचित होकर लखनऊ पहुंचने में कामयाब रहे।