देश की आध्यात्मिक-सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी के उमरहां में निर्माणाधीन विशाल साधना केंद्र स्वर्वेद महामंदिर अपने आप में अनोखा है। कारण ये कि यह मंदिर शिल्प और अत्याधुनिक तकनीक के अदभुत सामंजस्य का प्रतीक है। आज यहां इस मंदिर में विहंगम योग के 98वें वार्षिकोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे थे।
विश्वनाथ धाम के साथ ही यह महामंदिर भी काशी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व की शिखर पताका को और ऊंचा उठाने वाला है। फिलहाल यहां तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव मनाया जा रहा है। जिसमें आज पीएम मोदी भी शामिल होने के लिए पहुंचे और देश भर से जुटे श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
अगर बात करें इस मंदिर की तो यह वास्तुशिल्प का अद्भुत उदाहरण है। 64 हजार वर्ग फीट में बन रहे सात मंजिला महामंदिर का निर्माण करीब 18 साल पहले शुरू हुआ था। अब स्वर्वेद के दोहे मंदिर में अंकित किए जा रहे हैं। मुख्य गुंबद 125 पंखुड़ियों के विशालकाय कमल पुष्प की तरह है।
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स्वर्वेद महामंदिर
- फोटो : अमर उजाला
गुजरात में जीआरसी तकनीक द्वारा बनाए जा रहे नौ गुंबद नौ कमलों की तरह होगा। स्वर्वेद महामंदिर को देश का सबसे बड़ा मेडिटेशन सेंटर भी माना जा रहा है। महामंदिर परिसर में 100 फीट ऊंची सद् गुरुदेव की सैंड स्टोन की प्रतिमा भी स्थापित होगी।
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स्वर्वेद महामंदिर
- फोटो : अमर उजाला।
स्वर्वेद महामंदिर धाम में मई 2017 में 21 हजार कुंडीय स्वर्वेद उत्तरार्द्ध ज्ञान महायज्ञ हुआ था। उस वक्त इसे इतिहास के सबसे विशालतम यज्ञ की संज्ञा भी दी गई थी। विहंगम योग के जरिये नशा मुक्ति की राह प्रशस्त करने वाले आध्यात्मिक अभियान में हर वर्ष लाखों लोग जुड़ रहे हैं।
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स्वर्वेद महामंदिर।
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर से जुड़े संतों ने बताया कि तीन लाख वर्ग फीट में गुलाबी पत्थरों की नक्काशी के लिए 350 से ज्यादा शिल्पी जुटे हैं। प्राचीन स्थापत्य कला के समन्वय से बन रहे इस दिव्य आध्यात्मिक केंद्र की एक झलक पाने के लिए दुनिया के अनुयायी उत्सुक हैं।
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स्वर्वेद महामंदिर
- फोटो : अमर उजाला
महामंदिर में मकराना पत्थर पर स्वर्वेद के दोहे अंकित होंगे। 50 हजार वर्ग फीट पर वाटर जेट तकनीक से पांच हजार दोहे उत्कीर्ण हो रहे हैं। महामंदिर को खूबसूरत बनाने के साथ ही वास्तुशिल्प का भी पूरा ध्यान रखा गया है। पूर्व दिशा में प्रवाहित नहर जल राशि के रूप में स्थापित है।