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वाराणसी में गंगा दशहरा, इन तस्वीरों को नहीं देखा तो क्या देखा
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Tue, 06 Jun 2017 02:11 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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पतित पावनी गंगा के अवतरण दिवस पर रविवार को काशी में उत्सव मनाया गया। कहीं ‘मंगल’ तो कहीं दिन भर ‘दंगल’ हुआ। अस्सी घाट से लगे मछली बंदर मठ के सामने 11 सौ कन्याओं की पूजा की गई। शीतला घाट, राजघाट पर आरती-पूजा और अनुष्ठानों के जरिए गंगा की अविरता-निर्मलता के संकल्प दोहराए गए। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरे..
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गंगा दशहरा पर सांझ ढलते ही गंगा तटों पर अनुष्ठान, आरती और अभिषेक के जरिए आस्था के मेले लगने लगे। बांधों, नहरों और नालों के चलते वेग शून्यता के कगार पर पहुंची गंगा की मुक्ति के लिए आह्वान किया गया। शीतला घाट पर गंगोत्री सेवा समिति की ओर से गंगा की महाआरती की गई। सौ से अधिक पुरुष-महिला एनसीसी कैडेट्स ने गंगा तट की सफाई की।
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शीतला घाट पर 51 लीटर दूध से मां गंगा का अभिषेक किया गया। समिति के संस्थापक पं. किशोरी रमण दुबे के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों ने महाआरती की। रिद्धि-सिद्धि के रूप में देव कन्याएं चंवर डुला रही थीं। गौरी केदार सेवा समिति की ओर से केदार घाट पर स्वच्छ गंगा मिशन, नमामि गंगे और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं
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गंगा दशहरा पर रविवार की देर शाम राज्यपाल राम नाईक ने वैदिक मंत्रोच्चार से पतित पावनी गंगा की पूजा की। पत्नी के साथ पहुंचे राज्यपाल ने गंगा के अभिषेक के बाद पावन धारा के प्रदूषित होने पर अफसोस जताया। कहा कि गंगा को भगीरथ ने लंबे तप के बाद पृथ्वी पर उतारा था। यह हिंदुस्तान के लोगों का फर्ज बनता है कि इसे बचाकर रखा जाए। फूलों की अल्पनाओं, रंगोलियों और रंग-बिरंगे वंदनवारों से सजे घाट पर उन्होंने गंगा आरती देखी।
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राज्यपाल ने अविरलता-निर्मलता के मसले पर कहा कि गंगा को निर्मल बनाने के लिए सामूहिक प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने काशी की महिमा का भी बखान किया। कहा कि काशी में रहकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां के गंगा जल की एक बूंद अगर कंठ में चली जाए तब भी मुक्ति मिल जाती है, सनातनधर्मियों की ऐसी धारणा रही है। जो गंगा इतनी पवित्र और आस्था का प्रतीक है, उसकी धारा को दूषित कर दिया गया है।