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तस्वीरेंः बनारस में आयोजित पर्यावरण कुंभ को इन खास बातों के लिए रखा जाएगा याद
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 04 Dec 2018 10:45 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में आयोजित दो दिवसीय पर्यावरण कुंभ का समापन हो गया। इस वैचारिक कुंभ के उद्घाटन या समापन सत्र में भले ही मुख्यमंत्री न पहुंचे हों लेकिन दोनों दिन यहां भीड़ उमड़ी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजना के मुताबिक पांच वैचारिक कुंभों की योजना के तहत काशी में आयोजित पर्यावरण कुंभ में ऐसी कई सारी चीजें हुईं जिसे याद रखा जाएगा। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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पर्यावरण कुंभ में पर्यावरणविदों ने उपभोक्तावाद से सामने आने वाली कठिनाइयों का जिक्र किया और भविष्य सुरक्षित करने के उपाय सुझाए। इस पर्यावरण कुंभ में पर्यावरण की चुनौतियों, उसके संरक्षण पर गहन चिंतन मनन किया। विकास के अंधाधुंध दौड़ती भागती जिंदगी के कारण संकट में इस प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों को पुन:संरक्षित करने के लिए एक बार फिर से भारतीय दर्शन, धर्म की ओर लौटने का आह्वान किया गया। कुंभ में आए वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों ने कई पहलुओं पर चिंतन मनन किया तो पर्यावरण के लिए कार्य करने वाले समाजसेवियाें, सामाजिक संस्थाओं ने लोगाें को प्रेरित करने का काम किया।
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दो दिवसीय पर्यावरण कुंभ में एक खास विचारधारा से जुड़े वक्ता ही दिखाई पड़े। पर्यावरण कुंभ के दौरान इसकी चर्चा रही कि आयोजन से स्थानीय और प्रतिष्ठित पर्यावरणविदों को विचार व्यक्त करने के लिए नहीं बुलाया गया। उद्घाटन समारोह में उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा पहुंचे तो वहीं समापन सत्र में प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री दारा सिंह चौहान ने शिरकत की। इस पर्यावरण कुंभ में देश भर से आए करीब दो हजार पर्यावरणविद व वैज्ञानिकों ने शिरकत की।
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पर्यावरण कुंभ में सबसे खास बात रही यहां लगी प्रदर्शनी। विद्यापीठ के खेल मैदान में पर्यावरण कुंभ के लिए जर्मन हैंगर तकनीक से बने पंडालों में पर्यावरण संरक्षण और रक्षा के लिए चित्रों की प्रदर्शनी के साथ स्टॉलों को जगह दी गई। छात्र-छात्राओं के बीच रेत से बने समुद्रमंथन और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उकेरी गई आकृति यहां आए हुए लोगों को अपने मोहपाश में खींचती रही। कुंभ में आये युवा पर्यावरणविदों के साथ छात्र-छात्राएं पूरे दिन यहां और भव्य पंडाल की सेल्फी लेते देखे गए।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में लगे पर्यावरण कुंभ के तहत प्रदर्शनी में दूसरे दिन कठपुतली शो मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। लखनऊ से आई टीम ने कठपुतली के माध्यम से बेहतरीन ढंग से पर्यावरण के महत्व को समझाया। नृत्य, संगीत, हास्य के समन्वय के इस कठपुतली शो में कलाकारों ने लोगों को संदेश दिया कि छोटे-छोटे प्रयासों से हम सब पर्यावरण के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। प्राकृतिक संपदा को अपनी थाती बनाए रख सकते हैं।
