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नागकूप में है नागों का निवास, पाताल लोक जाता है रास्ता, नासा ने भी है माना
Sun, 30 Jul 2017 10:42 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 30 Jul 2017 10:42 AM IST
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नागपंचमी के पर्व पर शनिवार को वाराणसी के नागकूप पर कालसर्पदोष की शांति के लिए श्रद्धालु और नेमियों की भीड़ लगी रही। इस कूप के बारे में कई मान्यताएं प्रचलित हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी इसे स्वीकार किया है। आगे की स्लाइड में जानें नागकूप की पौराणिक मान्यता...
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नागकूप के अर्चक पं. अभिजीत ने बताया कि मान्यता है कि नागकूप में आज भी नागों का निवास है। इस कुएं का वर्णन तमाम धर्मशास्त्रों में वर्णित है जिनके अनुसार इस कूप के दर्शन मात्र से ही नाग दंश भय के साथ ही कालसर्प दोष से भी राहत मिलती है।
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उन्होंने बताया कि इसलिए इस कुंड का नाम नागकूप है जहां दर्शन मात्र से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। बताते हैं कि करकोटक नाग तीर्थ के नाम से जाने जाने वाली इसी जगह पर शेषावतार नागवंश के महर्षि पतंजलि ने व्याकरणाचार्य पाणिनी के भाष्य की रचना की थी।
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पूरे विश्व में काल सर्प दोष की सिर्फ तीन जगह ही पूजा होती हैं उसमे से ये कुंड प्रधान कुंड है। स्कंद पुराण के अनुसार यह वह स्थल है जहां से पाताल लोक जाने का रास्ता है। माना जाता है इस कूप के अंदर सात कूप हैं। इसे नासा ने भी स्वीकार किया है।
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शास्त्रार्थ समिति के महामंत्री डा. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि शास्त्रों के आंतरिक ज्ञान तथा कोड पत्र का ज्ञान पांडुलिपियां जो हैं उनका ज्ञान शास्त्रार्थ से ही होता है इसलिए इस परंपरा को जीवंत रखना काशीवासियों का दायित्व है। यहां नाग पंचमी पर हर साल हजारों लोगों की जुटान होती है।
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