वाराणसी में एसटीएफ की जांच में सामने आया कि पांच आरोपियों ने ऐसा नेटवर्क फैलाया कि नई दिल्ली, बिहार, झारखंड, कोलकाता, असम, त्रिपुरा और पूर्वांचल सहित पश्चिमी के कई जिलों तक कोविड से संबंधित नकली रेमडिसिविर इंजेक्शन, कोविड वैक्सीन, कोविड टेस्ट किट पहुंच गई।
वाराणसी में खुलासा: प्रेग्नेंसी टेस्ट किट का रैपर बदल बनाते थे रैपिड कोविड किट, गिरोह ऐसे चलाता था जानलेवा धंधा
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टीम ने छापा मारा तो तीन कमरे में फैली दवाइयों के रैपर, नकली रैपिड कोविड टेस्ट किट 10800, नकली कोविड वैक्सीन 1600, नकली रेमिडिसिविर इंजेक्शन 1550, सिलिंग मशीन चार, रैपर आदि पैकेजिंग मैटेरियल्स और केमिकल भरी 6000 शीशी और खाली शीशी दो कार्टून बरामद हुई। ड्रग विभाग के सहायक आयुक्त औषधि केजी गुप्ता ने नकली दवाओं की पुष्टि की।
एसटीएफ की पूछताछ में गिरोह के सरगना राकेश थावानी ने बताया कि खाली शीशी में ग्लूकॉन-डी पॉउडर डालकर पैक कर देते थे और उस पर रेमडिसिविर इंजेक्शन का रैपर लगा देते थे। एक शीशी तैयार करने में लगभग 100 रुपये का खर्च आता था, जिसे 3000 रुपये में बेचते थे। खाली शीशी में डिस्टिल वाटर भरकर उस पर कोविड वैक्सीन का रैपर लगा देते थे, इसकी एक शीशी तैयार करने में लगभग 25 रुपये खर्च आता था और इसे 300 रुपये में बेचते थे।
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प्रेग्नेंसी टेस्ट किट को कोविड में बदलने का खर्च था 40 रुपये, 500 में थे बेचते
आरोपियों ने एसटीफ को बताया कि कोविड टेस्ट किट तैयार करने के लिए दिल्ली से प्रेग्नेंसी टेस्ट किट मंगाते थे। इसे तैयार करने में लगभग 40 रुपये का खर्च आता था, इसे 500 रुपये में बेचते थे। एसटीएफ के एएसपी विनोद कुमार सिंह के अनुसार इंजेक्शन, वैक्सीन और कोविड किट को तैयार करने का काम राकेश थावानी, शमशेर सिंह एवं संदीप शर्मा उर्फ मक्कू का था और इसे बेचने का काम दिल्ली निवासी लक्ष्य जावा, विजय कुमार, यश कुमार आदि का था।
लक्ष्य जावा ने पूछताछ में बताया कि वाराणसी में तैयार नकली इंजेक्शन, वैक्सीन एवं किट को बेचने का काम उसके साथ दिल्ली के ही रहने वाले अरुण शर्मा, अरुण पाटनी, मानसी, रणवीरव, गुरजीत, गुरबाज आदि मिलकर करते थे। काफी मात्रा में नकली रेमडिसिविर इंजेक्शन, कोविड वैक्सीन, कोविड टेस्ट किट तैयार कर बेची गईं। जिससे करोड़ों रुपये का मुनाफा हुआ है।