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अनोखी पहलः मुफलिसी के मारों के लिए काशी में रोटी बैंक, मिट रही सैकड़ों की भूख

Fri, 07 Jul 2017 10:47 AM IST
amarujala.com, written by तबस्सुम
amarujala.com, written by तबस्सुम Updated Fri, 07 Jul 2017 10:47 AM IST
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varanasi unique initiative Roti bank for hunger people
roti bank - फोटो : facebook
बनारस का ऐसा बैंक जहां रुपये-सिक्के नहीं, रोटी-चावल जुटाया जाता है और ये भोजन बिना किसी रकम और ब्याज के गरीब परिवारों को बांटा जाता है। काशी में पहली बार शुरू की गई यह अनूठी पहल यहां की तंग गलियों में धीरे-धीरे रंग लाने लगी है। आगे की स्लाइड्स में जानिए..
varanasi unique initiative Roti bank for hunger people
roti bank - फोटो : अमर उजाला
भूख क्या होती है, ये मुफलिसी से जूझ रहे लोगों से बेहतर कोई नहीं जान सकता। रोटी के टुकड़ों की तलाश में लोग कूड़े के ढेर तक को उधेड़ जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ था उस दिन भी, जब कासी के किशोर कांत तिवारी गंगा घाट पर बैठे थे और कुछ ही दूरी पर कूड़े के ढेर में कुछ बच्चे भोजन की तलाश में जूझ रहे थे। 
varanasi unique initiative Roti bank for hunger people
roti bank - फोटो : facebook
यही वो पल था, जब किशोर कांत ने महसूस किया कि कुछ ऐसा होना चाहिए जिससे घरों में बचा भोजन सीधे इन गरीब परिवार को मिल सके। इसी सोच की जमीन पर नींव पड़ी रोटी बैंक की। ये रोटी बैंक सामनेघाट के पास महेशनगर में है।
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varanasi unique initiative Roti bank for hunger people
kishor kant - फोटो : अमर उजाला
मूल रूप से बिहार के रहने वाले किशोर कांत तिवारी के संयोजन में अब तक 25 से अधिक लोग इस रोटी बैंक से जुड़ चुके हैं। किशोर कांत यूं तो गरीब बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं लेकिन फिलहाल पूरी शिद्दत से रोटी बैंक की अपनी योजना को साकार करने में जुटे हैं। वह लोगाें से रोजाना सिर्फ दो रोटी, सब्जी या अचार दान में मांगते हैं।
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varanasi unique initiative Roti bank for hunger people
roti bank - फोटो : अमर उजाला
अब तक 25 से अधिक लोग नियमित दानदाता के तौर पर जुड़ चुके हैं। जो रोजाना उनके बैंक में रोटी दान में देते हैं। बैंक की ओर से रोजाना शाम छह बजे के बाद लंका, अस्सी, सामनेघाट पर सड़क और घाट किनारे रहने वालों को रोटी-सब्जी और अचार बांटा जाता है।
 
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