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चाचा-चाची का कत्ल: पुराने खून का हिसाब करना चाहती है बेटी, इसलिए 21 साल बाद खोली गई फाइल; शुरू से होगी जांच
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 09 Apr 2026 08:27 AM IST
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सार
21 साल पुराने दंपती हत्याकांड में फिर से जांच शुरू होते ही माफिया के भाई को जेल से लाकर पूछताछ की गई। बी-वारंट तामील होने के बाद आरोपी की रिहाई रुकी, अब पुराने खून के राज खुलने की उम्मीद बढ़ी।
डब्बन और माफिया अनुपम दुबे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मैनपुरी में 21 वर्ष पहले नवीगंज में दंपती की हत्या के मामले में आरोपी माफिया अनुपम दुबे के भाई डब्बन दुबे को मैनपुरी पुलिस बी वारंट लेकर बुधवार को फर्रुखाबाद जेल से लेकर आई। पुलिस ने डब्बन दुबे से हत्या के मामले में पूछताछ की और कोर्ट में पेश किया।
मोहम्मदाबाद फर्रुखाबाद के गांव सहसपुर निवासी कौशल किशोर दुबे और उनकी पत्नी कृष्णा देवी की नवीगंज क्षेत्र में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक दंपती के भतीजे और फर्रुखाबाद के माफिया अनुपम दुबे उसके भाई अनुराग उर्फ डब्बन दुबे सहित 6 लोगों के खिलाफ प्राथमिक की दर्ज की गई थी। लेकिन साक्ष्य ना मिलने की वजह से पुलिस ने एफआर लगा दी थी।
इसके बाद मृतक दंपती की पुत्री राधिका ने इस मामले में पुनः विवेचना के लिए एसपी गणेश प्रसाद साहा को प्रार्थना पत्र दिया था और शासन से भी गुहार लगाई थी। शासन के निर्देश पर मामले की दोबारा जांच के लिए टीम गठित की गई। जिसकी जांच बेवर पुलिस को दी गई। वहीं इसके बाद आरोपी पुनः विवेचना पर रोक लगाने के लिए हाई कोर्ट गए, लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया।
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मोहम्मदाबाद फर्रुखाबाद के गांव सहसपुर निवासी कौशल किशोर दुबे और उनकी पत्नी कृष्णा देवी की नवीगंज क्षेत्र में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक दंपती के भतीजे और फर्रुखाबाद के माफिया अनुपम दुबे उसके भाई अनुराग उर्फ डब्बन दुबे सहित 6 लोगों के खिलाफ प्राथमिक की दर्ज की गई थी। लेकिन साक्ष्य ना मिलने की वजह से पुलिस ने एफआर लगा दी थी।
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इसके बाद मृतक दंपती की पुत्री राधिका ने इस मामले में पुनः विवेचना के लिए एसपी गणेश प्रसाद साहा को प्रार्थना पत्र दिया था और शासन से भी गुहार लगाई थी। शासन के निर्देश पर मामले की दोबारा जांच के लिए टीम गठित की गई। जिसकी जांच बेवर पुलिस को दी गई। वहीं इसके बाद आरोपी पुनः विवेचना पर रोक लगाने के लिए हाई कोर्ट गए, लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया।
मैनपुरी पुलिस ने फर्रुखाबाद जेल में बंद डब्बन दुबे से पूछताछ के लिए कोर्ट से बी वारंट लिया और उसे मैनपुरी लेकर आई। 24 घंटे की रिमांड पर लेकर पुलिस ने बुधवार को डब्बन दुबे से पूछताछ की और मैनपुरी कोर्ट में पेश कर उसके बयान दर्ज कराए। वहीं अब पुलिस मथुरा जेल में बंद मुख्य आरोपी अनुपम दुबे से पूछताछ करने के लिए बी वारंट हासिल करने में लगी है।
चाचा-चाची हत्याकांड में बी-वारंट तामील होने से डब्बन की मुश्किलें बढ़ीं
मैनपुरी के कस्बा नवीगंज में छह अगस्त 2005 में माफिया अनुपम दुबे के चाचा कौशल किशोर और चाची पत्नी कृष्णा देवी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने पहले फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। अनुपम दुबे के साथ ही उसके भाइयों के जेल जाने के बाद कौशल किशोर की पुत्री राधिका ने शासन से दोबारा विवेचना की मांग की थी। शासन के आदेश पर दोबारा जांच शुरू हुई है।
मैनपुरी के कस्बा नवीगंज में छह अगस्त 2005 में माफिया अनुपम दुबे के चाचा कौशल किशोर और चाची पत्नी कृष्णा देवी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने पहले फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। अनुपम दुबे के साथ ही उसके भाइयों के जेल जाने के बाद कौशल किशोर की पुत्री राधिका ने शासन से दोबारा विवेचना की मांग की थी। शासन के आदेश पर दोबारा जांच शुरू हुई है।
इसमें मुख्य आरोपी माफिया अनुपम दुबे को और अनुराग दुबे उर्फ डब्बन को सह आरोपी बनाया गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मैनपुरी की अदालत से जारी बी-वारंट लेकर बेवर थानाध्यक्ष अनिल कुमार टीम के साथ कचहरी पहुंचे। उन्होंने सीजेएम न्यायालय से वारंट तामील कराने की अनुमति ली। इसके बाद जिला जेल पहुंचकर डब्बन के खिलाफ बी-वारंट तामील करा दिया। रिहाई परवाना जेल पहुंचने से पहले बी-वारंट पहुंचने से फिलहाल डब्बन दुबे की रिहाई रुक गई है। अब उसे हत्या के मुकदमे में भी न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। बता दें कि माफिया अनुपम दुबे मथुरा जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
क्या है बी-वारंट
बी-वारंट एक विशेष प्रकार का कानूनी आदेश है जो अदालत की ओर से तब जारी किया जाता है जब कोई आरोपी पहले से ही किसी अन्य मामले में जेल में बंद हो लेकिन उसे किसी दूसरे मामले में अदालत में पेश होने की आवश्यकता होती है। यह वारंट सुनिश्चित करता है कि ऐसे कैदियों को न्याय प्रक्रिया में शामिल किया जा सके, भले ही वे पहले से ही न्यायिक हिरासत में हों।
बी-वारंट एक विशेष प्रकार का कानूनी आदेश है जो अदालत की ओर से तब जारी किया जाता है जब कोई आरोपी पहले से ही किसी अन्य मामले में जेल में बंद हो लेकिन उसे किसी दूसरे मामले में अदालत में पेश होने की आवश्यकता होती है। यह वारंट सुनिश्चित करता है कि ऐसे कैदियों को न्याय प्रक्रिया में शामिल किया जा सके, भले ही वे पहले से ही न्यायिक हिरासत में हों।