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भैरों बाजार हादसा: कागजों में ऑल ओके, फिर किसकी लापरवाही से गिरी बिल्डिंग? डीए रिपोर्ट पर उठ रहे सवाल
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 24 Apr 2026 11:36 AM IST
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सार
आगरा के छत्ता वार्ड में मेट्रो मॉल निर्माण के दौरान पुरानी बिल्डिंग ढहने के मामले में एडीए की रिपोर्ट ने हादसे की जिम्मेदारी तय न करके कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में निर्माण को स्वीकृत बताया गया है, लेकिन सेट-बैक नियमों की अनदेखी और सुरक्षा लापरवाही को लेकर अब जांच और कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।
भैरों बाजार हादसा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के छत्ता वार्ड के भैरों बाजार क्षेत्र में कृष्णा मेट्रो मॉल के निर्माण स्थल पर पुरानी बिल्डिंग धराशायी होने के मामले में आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने अपनी रिपोर्ट तो पेश कर दी है, लेकिन इस रिपोर्ट ने कई गंभीर सवालों को जन्म दे दिया है। उच्चाधिकारियों को भेजी गई एडीए की आख्या के अनुसार निर्माण कार्य पूरी तरह स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप पाया गया है। हालांकि सब कुछ दुरुस्त था तो यह हादसा हुआ कैसे और इसकी जिम्मेदारी किस पर तय होगी, इसके बारे में कुछ नहीं कहा गया।
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दरअसल, एडीए की रिपोर्ट स्वीकार करती है कि भूखंड संख्या- 8/390 और 8/390/1 पर 4488.99 वर्गमीटर क्षेत्र में मानचित्र संख्या- एडीए/बीपी/24-25/0232 स्वीकृत है। नियमानुसार, निर्माणकर्ता किरधा अर्थ डेवलपर्स और कृष्णा भू विकास को सेट-बैक एरिया खाली करने के लिए पुरानी बिल्डिंग को पहले ही पूरी तरह ध्वस्त करना था। आरोप है कि बिल्डर ने पूरी बिल्डिंग गिराने के बजाय उसे अधूरा छोड़ दिया और पीछे के हिस्से में निर्माण शुरू कर दिया, जो हादसे का कारण बना।
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सहायक अभियंता प्रमोद कुमार की ओर से एडीए उपाध्यक्ष एम अरुन्मौली को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्माणकर्ता को वह पुरानी बिल्डिंग स्वयं ध्वस्त करनी थी। अब सवाल यह है कि जब बिल्डिंग खतरनाक थी तो उसे पहले ही क्यों नहीं गिरवाया गया। अब देखना यह है कि आगरा विकास प्राधिकरण उन बिल्डर्स पर क्या कार्रवाई करता है जिन्होंने सेट-बैक की जमीन को समय रहते साफ नहीं किया और सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर घनी आबादी वाले क्षेत्र में लोगों की जान जोखिम में डाली।
कई बार हो चुकी है निर्माण की शिकायत
एडीए के सूत्रों के अनुसार निर्माणाधीन मॉल की कई बार शिकायत हो चुकी है। अधिकारियों ने जांच की लेकिन उसमें काेई गड़बड़ी नहीं पाई गई। दावा किया गया कि निर्माण नक्शे के अनुरूप हो रहा है। यह तब है जब आगे की ओर ही सेट-बैक एरिया छोड़ा जाना था लेकिन उस एरिया में ही पुरानी बिल्डिंग तनी हुई थी। बिल्डिंग गिरने से पहले तक अधिकारियों ने कई बार निरीक्षण किया लेकिन किसी ने भी इस भवन के खतरे में होने या गिराए जाने पर न जोर दिया, न ही ध्यान। अब हादसे में में जानमाल का नुकसान न होने पर अफसर फिर से मामले में लीपापोती में जुट गए हैं।
एडीए के सूत्रों के अनुसार निर्माणाधीन मॉल की कई बार शिकायत हो चुकी है। अधिकारियों ने जांच की लेकिन उसमें काेई गड़बड़ी नहीं पाई गई। दावा किया गया कि निर्माण नक्शे के अनुरूप हो रहा है। यह तब है जब आगे की ओर ही सेट-बैक एरिया छोड़ा जाना था लेकिन उस एरिया में ही पुरानी बिल्डिंग तनी हुई थी। बिल्डिंग गिरने से पहले तक अधिकारियों ने कई बार निरीक्षण किया लेकिन किसी ने भी इस भवन के खतरे में होने या गिराए जाने पर न जोर दिया, न ही ध्यान। अब हादसे में में जानमाल का नुकसान न होने पर अफसर फिर से मामले में लीपापोती में जुट गए हैं।
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
- तीन साल पहले माईथान में हादसा हुआ था। बेसमेंट की खुदाई के दौरान कई मकान गिर गए थे। एक बच्ची की जान चली गई थी। कई दिन तक लोगों को घर छोड़कर रहना पड़ा था। तब बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई हुई थी।
- 15 दिन पहले किनारी बाजार में सराफ का शोरूम भरभराकर गिर गया था। तब भी सामने आया था कि नियमों की अनदेखी करके निर्माण कार्य कराया जा रहा था। मामले में एडीए ने तहरीर दी थी। मगर पुलिस ने तहरीर को वापस कर दिया था।
- तीन साल पहले माईथान में हादसा हुआ था। बेसमेंट की खुदाई के दौरान कई मकान गिर गए थे। एक बच्ची की जान चली गई थी। कई दिन तक लोगों को घर छोड़कर रहना पड़ा था। तब बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई हुई थी।
- 15 दिन पहले किनारी बाजार में सराफ का शोरूम भरभराकर गिर गया था। तब भी सामने आया था कि नियमों की अनदेखी करके निर्माण कार्य कराया जा रहा था। मामले में एडीए ने तहरीर दी थी। मगर पुलिस ने तहरीर को वापस कर दिया था।

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