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UP: नूरजहां की सराय, चीनी का रौजा, जोहरा बाग और कांच महल का होगा कायाकल्प, 20 करोड़ रुपये से लगेगा मरहम
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 03 Apr 2026 10:53 AM IST
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सार
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने आगरा की उपेक्षित ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए 20 करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनाई है। चीनी का रौजा सहित 14 स्मारकों का जीर्णोद्धार कर उनकी खोई चमक वापस लाने की तैयारी है।
अमर उजाला में प्रकाशित खबरें
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संरक्षण के अभाव में अपनी चमक खो रही ऐतिहासिक विरासतों के जख्मों पर 20 करोड़ रुपये से मरहम लगेगा। जर्जर हो रहे नूरजहां की सराय, चीनी का रौजा और जोहरा बाग आदि धरोहरों में एक बार फिर रौनक लौटेगी। छोटे-बड़े 14 स्मारकों के संरक्षण के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 20 करोड़ रुपये की लागत से कार्ययोजना बनाई है।
इस वर्ष एएसआई का मुख्य ध्यान यमुना किनारे स्थित उन गुमनाम धरोहरों पर रहेगा जो अब तक उपेक्षित थीं। पिछले दो वर्षों से खंडहर में तब्दील हो चुके जोहरा बाग का संरक्षण अब उसके थ्रीडी मॉडल के आधार पर किया जाएगा। यह मॉडल माल रोड स्थित एएसआई कार्यालय में सुरक्षित है। इसके अतिरिक्त ट्रांस-यमुना क्षेत्र में स्थित नूरजहां की सराय, चीनी का रौजा, अकबर के मकबरे का उत्तरी द्वार और कांच महल के जीर्णोद्धार की योजना भी शामिल है।
मुख्यालय को भेजा गया प्रस्ताव
आगरा मंडल की अधीक्षण पुरातत्वविद स्मिथा एस कुमार ने बताया कि स्मारकों के जो हिस्से पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, उन्हें दोबारा निर्मित नहीं किया जा सकता, लेकिन टूट-फूट की मरम्मत, दीवारों का प्लास्टर और अन्य संरक्षण कार्यों के लिए बजट को 15 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। ब्लू प्रिंट मुख्यालय भेजा जाएगा। बजट स्वीकृत होते ही कार्य शुरू हो जाएगा। साथ ही, कई स्मारकों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती भी की जाएगी।
विश्व धरोहरों में बढ़ेंगी पर्यटक सुविधाएं
विस्मृत स्मारकों के साथ-साथ विश्व प्रसिद्ध ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी में भी पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इन स्मारकों के रखरखाव के लिए एक वार्षिक संरक्षण योजना लागू है, जिसके तहत आगरा मंडल को प्रतिवर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये मिलते हैं।
अमर उजाला ने बयां किया पत्थरों का दर्द
राष्ट्रीय महत्व के इन स्मारकों की दुर्दशा को ‘अमर उजाला’ ने अपने विशेष अभियान ‘हर पत्थर एक कहानी’ के माध्यम से प्रमुखता से उजागर किया था। धरोहरों के ‘पत्थरों के दर्द’ और वहां व्याप्त अव्यवस्थाओं की खबरों का संज्ञान लेते हुए ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 20 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को मूर्त रूप दिया है।
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इस वर्ष एएसआई का मुख्य ध्यान यमुना किनारे स्थित उन गुमनाम धरोहरों पर रहेगा जो अब तक उपेक्षित थीं। पिछले दो वर्षों से खंडहर में तब्दील हो चुके जोहरा बाग का संरक्षण अब उसके थ्रीडी मॉडल के आधार पर किया जाएगा। यह मॉडल माल रोड स्थित एएसआई कार्यालय में सुरक्षित है। इसके अतिरिक्त ट्रांस-यमुना क्षेत्र में स्थित नूरजहां की सराय, चीनी का रौजा, अकबर के मकबरे का उत्तरी द्वार और कांच महल के जीर्णोद्धार की योजना भी शामिल है।
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मुख्यालय को भेजा गया प्रस्ताव
आगरा मंडल की अधीक्षण पुरातत्वविद स्मिथा एस कुमार ने बताया कि स्मारकों के जो हिस्से पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, उन्हें दोबारा निर्मित नहीं किया जा सकता, लेकिन टूट-फूट की मरम्मत, दीवारों का प्लास्टर और अन्य संरक्षण कार्यों के लिए बजट को 15 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। ब्लू प्रिंट मुख्यालय भेजा जाएगा। बजट स्वीकृत होते ही कार्य शुरू हो जाएगा। साथ ही, कई स्मारकों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती भी की जाएगी।
विश्व धरोहरों में बढ़ेंगी पर्यटक सुविधाएं
विस्मृत स्मारकों के साथ-साथ विश्व प्रसिद्ध ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी में भी पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इन स्मारकों के रखरखाव के लिए एक वार्षिक संरक्षण योजना लागू है, जिसके तहत आगरा मंडल को प्रतिवर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये मिलते हैं।
अमर उजाला ने बयां किया पत्थरों का दर्द
राष्ट्रीय महत्व के इन स्मारकों की दुर्दशा को ‘अमर उजाला’ ने अपने विशेष अभियान ‘हर पत्थर एक कहानी’ के माध्यम से प्रमुखता से उजागर किया था। धरोहरों के ‘पत्थरों के दर्द’ और वहां व्याप्त अव्यवस्थाओं की खबरों का संज्ञान लेते हुए ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 20 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को मूर्त रूप दिया है।