सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Agra’s Spice Industry Provides Massive Employment but Lags in Exports

UP: सब्सिडी-क्लस्टर की जरूरत...मसालों की विदेशों तक फैलेगी महक, रोजगार को लगेंगे पंख

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 08 Jan 2026 10:27 AM IST
विज्ञापन
सार

तीखी मिर्च, धनिया या फिर गर्म मसाला। भोजन को स्वादिष्ट बनाने के साथ यह आगरा में हजारों लोगों को रोजगार दे रहा है। कारोबारियों का कहना है कि नई मशीनों, उद्यम शुरू करने के लिए सब्सिडी और मसाला क्लस्टर बन जाए तो विदेशों तक मसालों की महक फैलेगी।

Agra’s Spice Industry Provides Massive Employment but Lags in Exports
मसाले - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

आगरा में 50 से अधिक मसाला निर्माता इकाई हैं। इनमें 10-12 ब्रांडेड हैं। मसाला के 10 हजार से अधिक फुटकर विक्रेता हैं। एक लाख से अधिक लोगों को इससे रोजगार भी मिल रहा है। ब्रांडेड कंपनियों को छोड़ दिया जाए तो मसाला बिक्री प्रदेश भर में ही सिमटी है। मसाला उद्यम को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर बनाया जाने की जरूरत बढ़ गई है, जिससे नई तकनीकी वाली मशीनें स्थापित की जा सकें।
Trending Videos


मसाला उद्यमियों की मांग है कि मैन्युफैक्चरर्स यूनिट शुरू करने के लिए बिजली, पानी, सड़क और अन्य की सुविधा हो। सस्ती दर पर प्लॉट दिया जाए। मसाला फेयर भी लगाया जाए, जिसमें देश-विदेश से उद्यमी आएं। इससे निर्यात बढ़ सके। नए उद्यम लगाने, मशीनें खरीदने समेत अन्य के लिए सब्सिडी देने के साथ इनमें बढ़ोत्तरी भी की जाए। बढ़ते शहर को देखते हुए नई मसाला मंडी भी बनाई जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


मसाला मंडी बने, सस्ती दर पर प्लाट-दुकानें मिलें
नेशनल चैंबर की फूड प्रोसेसिंग एंड कोल्डस्टोरेज इंडिया डेवलपमेंट के चेयरमैन विकास चतुर्वेदी ने बताया कि मसाला मंडी की भी जरूरत है। अभी रावतपाड़ा में ही मसाला बाजार है। यहां स्थान और संसाधन भी सीमित हैं। मसाला मंडी बनने पर उद्यमियों को सस्ती दर पर प्लॉट या दुकानें आवंटित की जाएं। इससे उद्यम को गति मिलेगी।

टीटीजेड की बाध्यता से पिछड़ रहा मसाला उद्यम
फूड प्राेसेसिंग चैंबर के उपाध्यक्ष नितिन गोयल ने बताया कि मसाला उद्यम के विस्तार में टीटीजेड की बंदिशें बाधा बनी हुई हैं। बिजली कनेक्शन का भार तक नहीं बढ़वा सकते हैं। आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट नहीं लगा सकते हैं। बंदिशों को खत्म कर दें तो मसालों का भी निर्यात बढ़ाया जा सकता है।

मसालों की जैविक खेती का दिया जाए बढ़ावा
मसाला उद्यमी सिद्धार्थ अग्रवाल का कहना है कि मसालों में कीटनाशक मिलने पर सैंपल फेल हो जाता है, इसमें निर्माता कंपनी का कोई दोष नहीं है। इससे व्यापारियों का शोषण होता है। खेती में कीटनाशक का अत्यधिक उपयोग करने से ऐसा होता है। मसालों की जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहिए।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed