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यहां डोल रहे भाजपा के पांव: मथुरा में राधे-राधे, एटा में कल्याण का वास्ता; शिवपाल के रहते मैनपुरी हिला पाएंगे?

दीपक जैन, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sun, 14 Apr 2024 10:12 AM IST
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सार

भाजपा मथुरा में राधे-राधे तो एटा में कल्याण का वास्ता देकर सियासी समीकरण साध रही है। वहीं देखना होगा कि सपा में शिवपाल के रहते फिरोजाबाद और मैनपुरी में भाजपा जीत दर्ज कर पाएगी? या ये सीटें सपना रह जाएंगी? 

BJP calculating victory On basis of caste data in Lok Sabha elections on Braj region seats
अमित शाह, अखिलेश यादव - फोटो : संवाद
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विस्तार

लोकसभा चुनाव में जातीय आंकड़ों के सहारे भाजपा जीत के समीकरण साध रही है। ब्रज की चार सीटें बचाने की भाजपा के सामने इस बार चुनौती है। वहीं सपा के मजबूत गढ़ मैनपुरी का किला ढहाने का बड़ा लक्ष्य भी है। भाजपा ने मैनपुरी से यहां के विधायक और प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह पर दांव लगाया है। जबकि फिरोजाबाद से अभी उम्मीदवार तय नहीं किया है। 

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आगरा की सीट पिछले तीन चुनाव  से भाजपा के पास है। दो बार डॉ. रामशंकर कठेरिया उसके बाद प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल यहां से सांसद चुने गए। इस बार फिर से भाजपा ने एसपी सिंह बघेल पर ही दांव लगाया है। हालांकि एसपी सिंह बघेल का आगरा संसदीय क्षेत्र में कुछ क्षेत्रों में विरोध भी इस बार दिख रहा है, लेकिन इस विरोध को मैनेज करने में भाजपा और संघ जुटे हुए हैं। 

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भाजपा के परंपरागत वैश्य समाज के वोट के साथ पिछड़े और ब्राह्मण वोटों पर भाजपा की नजर है। अनुसूचित जाति में दीगर जातियों के वोटों को भी भाजपा साध रही है। वोटों के इन्हीं समीकरण और विकास का वास्ता देकर भाजपा ने आगरा को फिर से जीतने की तैयारी की है।  
 

मथुरा में राधे-राधे, एटा में कल्याण का वास्ता

राधे-राधे गुनगुनाते हुए मथुरा सीट पर फिर से हेमा मालिनी चुनाव लड़ रही है। इस बार राष्ट्रीय लोकदल भी भाजपा के साथ है। इसलिए भाजपा मथुरा में इस बार जीत आसान मान रही है। एटा से राजवीर सिंह फिर चुनावी मैदान में है कल्याण सिंह का नाम यहां आज भी सम्मान के साथ लिया जाता है । पिछड़ी जातियों के वोट पर दांव के साथ भाजपा यहां वैश्य, जैन, क्षत्रिय और ब्राह्मण समाज के वोटों को प्लस मानते हुए जीत की रचना किए हुए है। 
 

फिरोजाबाद में वोट बैंक को बांधे रखने की चुनौती  

फिरोजाबाद सीट पर भी भाजपा का ही कब्जा है। सपा का किला ढहाते हुए 2019 के चुनाव में डॉक्टर चंद्रसेन जादौन यहां से सांसद चुने गए थे। भाजपा ने अभी यहां से प्रत्याशी तय नहीं किया है। समाजवादी पार्टी का किला ढहाने की बड़ी चुनौती इस बार भाजपा के सामने इसलिए है क्योंकि 2019 में समाजवादी नेता शिवपाल सिंह यादव की बगावत ने भाजपा की राह को आसान कर दिया था। 
 

शिवपाल सिंह यादव को 91000 से अधिक वोट मिले थे। ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी आसानी से यहां से सीट निकाल ले गई थी। इस बार समीकरण दूसरे हैं। शिवपाल यादव सपा के साथ है। यादव और मुस्लिम वोटों से इतर अन्य जाति के मतदाताओं की गोलबंदी में भाजपा और संघ बिना प्रत्याशी होते हुए भी अभी से जुटे हुए हैं। 
 

टूंडला क्षेत्र में जाट समाज का वोट भी है। क्योंकि लोकदल के साथ भाजपा का गठबंधन है इसलिए जाट समाज के वोट को भी भाजपा इस बार अपने पाले में मानकर चल रही है। गौर करने वाली बात यह है कि बसपा ने यहाँ से सतेंद्र जैन सौली को उम्मीदवार बनाया है। इस कारण भाजपा के सामने वैश्य वोटों को बांधे रखने की भी चुनौती है।  
 

मैनपुरी में मंत्री के कद की परीक्षा 

जातीय समीकरण को साधते मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा ने ठाकुर जयवीर सिंह को प्रत्याशी बनाया है। जयवीर सिंह सपा के मजबूत गढ़ मैनपुरी से सपा को हरा कर विधायक बने थे। यही वजह रही कि उन्हें प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया गया। जयवीर की गिनती यूपी कद्दावर नेताओं में है। 
 

मैनपुरी में अब उनके कद की परीक्षा भी है। बसपा यहां पहले ही शाक्य प्रत्याशी पर दांव लगा चुकी है। ऐसे में भाजपा ने क्षत्रिय उम्मीदवार उतार कर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। भाजपा यहां कितनी सफल होगी यह नतीजे बताएंगे। 
 

लाभार्थियों को वोट बैंक मान रही भाजपा 

जन कल्याणकारी योजनाओं के सहारे भी भाजपा मतदाताओं को साध रही है। पीएम आवास योजना,  फ्री राशन, किसान सम्मान निधि, आयुष्मान योजना, उज्ज्वला योजना तमाम ऐसी योजनाएं हैं, जो लोगों से सीधे जुड़ी हैं। इनके लाभार्थियों को वोट बैंक में तब्दील करने की जिम्मेदारी वार्ड इकाई से लेकर बूथ इकाई तक को दी गई है। 

भाजपा इन लाभार्थियों की पूरी सूची लेकर चुनावी  मैदान में उतरी है। भाजपा का मानना है इन कल्याणकारी योजनाओं के सहारे वह मतदाताओं तक पहुंचेगी। एक-एक लाभार्थी से वार्ड, बूथ और सेक्टर इकाई के सदस्य संपर्क कर रहे हैं। इसी आधार पर योजनाओं को लेकर सम्मेलन भी भाजपा ने किए हैं। 

इन वोटों पर है नजर 

वैश्य समाज, क्षत्रिय, ब्राह्मण, जैन, कठेरिया, शाक्य, शंखवार, निषाद, लोधे, वाल्मीकि, सविता, बघेल और जाट।
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