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ईरान-इस्राइल युद्ध विराम: व्यापार भरेगा उड़ान, हस्तशिल्प और जूता निर्यात में लौटेगी रौनक; कारोबारियोंं को राहत
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 09 Apr 2026 11:18 AM IST
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सार
ईरान-इस्राइल तनाव कम होते ही आगरा के निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है, रुका हुआ कारोबार फिर पटरी पर लौटने की उम्मीद जगी है। भाड़ा घटने, ऑर्डर बहाल होने और फंसे भुगतान मिलने से जूता व हस्तशिल्प उद्योग में नई जान आने की संभावना है।
जूता उद्योग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
ईरान और इस्राइल के बीच जारी संघर्ष पर दो सप्ताह के लिए लगे विराम से ताजनगरी के निर्यातक खुश हैं। मंदी और अनिश्चितता की मार झेल रहे हस्तशिल्प और जूता निर्यातकों के चेहरे खिल उठे। उद्यमियों का मानना है कि इस शांति से न केवल व्यापारिक बाधाएं दूर होंगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की धमक फिर से सुनाई देगी।
पिछले कुछ समय से पहले बढ़े टैरिफ और फिर युद्ध के हालात ने आगरा के मुख्य उद्योगों की कमर तोड़ दी थी। स्थिति यह थी कि करोड़ों रुपये के कंसाइनमेंट बंदरगाहों पर फंसे थे, नए ऑर्डर मिलने बंद हो गए थे और पुराना भुगतान भी अटक गया था। सबसे बड़ी मार भाड़े पर पड़ी थी, जिससे उत्पादन की लागत कई गुना बढ़ गई। अब युद्धविराम के बाद यह उम्मीद जगी है कि रसद व्यवस्था सुधरेगी और शिपिंग खर्च में कमी आएगी।
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पिछले कुछ समय से पहले बढ़े टैरिफ और फिर युद्ध के हालात ने आगरा के मुख्य उद्योगों की कमर तोड़ दी थी। स्थिति यह थी कि करोड़ों रुपये के कंसाइनमेंट बंदरगाहों पर फंसे थे, नए ऑर्डर मिलने बंद हो गए थे और पुराना भुगतान भी अटक गया था। सबसे बड़ी मार भाड़े पर पड़ी थी, जिससे उत्पादन की लागत कई गुना बढ़ गई। अब युद्धविराम के बाद यह उम्मीद जगी है कि रसद व्यवस्था सुधरेगी और शिपिंग खर्च में कमी आएगी।
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आगरा का निर्यात एक नजर में
जूता उद्योग: सालाना करीब 3500 से 4000 करोड़ रुपये का निर्यात।
हस्तशिल्प उद्योग: सालाना करीब 1500 करोड़ रुपये का कारोबार।
रोजगार: जूता उद्योग से 4 लाख और हस्तशिल्प से 30 हजार कारीगर जुड़े हैं।
जूता उद्योग: सालाना करीब 3500 से 4000 करोड़ रुपये का निर्यात।
हस्तशिल्प उद्योग: सालाना करीब 1500 करोड़ रुपये का कारोबार।
रोजगार: जूता उद्योग से 4 लाख और हस्तशिल्प से 30 हजार कारीगर जुड़े हैं।
युद्धविराम से ऐसे पड़ेगा फर्क
- अटके ऑर्डर होंगे बहाल : युद्ध के कारण विदेशी खरीदारों ने नए ऑर्डर देने पर रोक लगा दी थी। अब अनिश्चितता खत्म होने से क्रिसमस और न्यू ईयर सीजन के लिए नए अनुबंध होने की संभावना है।
- लॉजिस्टिक्स और भाड़े में कमी : युद्ध के कारण जहाजों के रास्ते बदलने और जोखिम बढ़ने से समुद्री भाड़ा आसमान छू रहा था। युद्धविराम से रूट सुरक्षित होंगे और माल भेजने की लागत कम होगी।
- रुका हुआ भुगतान : पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कई देशों की बैंकिंग ट्रांजेक्शन और पेमेंट साइकिल प्रभावित थी। अब निर्यातकों को उम्मीद है कि उनका फंसा हुआ करोड़ों का भुगतान जल्द मिल जाएगा।
- बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा : लागत कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में आगरा के जूते और हस्तशिल्प आइटम अन्य देशों के मुकाबले बेहतर कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे।
- अटके ऑर्डर होंगे बहाल : युद्ध के कारण विदेशी खरीदारों ने नए ऑर्डर देने पर रोक लगा दी थी। अब अनिश्चितता खत्म होने से क्रिसमस और न्यू ईयर सीजन के लिए नए अनुबंध होने की संभावना है।
- लॉजिस्टिक्स और भाड़े में कमी : युद्ध के कारण जहाजों के रास्ते बदलने और जोखिम बढ़ने से समुद्री भाड़ा आसमान छू रहा था। युद्धविराम से रूट सुरक्षित होंगे और माल भेजने की लागत कम होगी।
- रुका हुआ भुगतान : पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कई देशों की बैंकिंग ट्रांजेक्शन और पेमेंट साइकिल प्रभावित थी। अब निर्यातकों को उम्मीद है कि उनका फंसा हुआ करोड़ों का भुगतान जल्द मिल जाएगा।
- बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा : लागत कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में आगरा के जूते और हस्तशिल्प आइटम अन्य देशों के मुकाबले बेहतर कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे।
उद्यमियों की जुबानी
फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने कहा कि युद्धविराम की खबर आगरा के जूता उद्योग के लिए ऑक्सीजन की तरह है। भाड़ा बढ़ने से हमारा मुनाफा खत्म हो गया था और खरीदार डरे हुए थे। अब सप्लाई चेन पटरी पर लौटेगी और रुके हुए कंसाइनमेंट समय पर पहुंच सकेंगे।
फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने कहा कि युद्धविराम की खबर आगरा के जूता उद्योग के लिए ऑक्सीजन की तरह है। भाड़ा बढ़ने से हमारा मुनाफा खत्म हो गया था और खरीदार डरे हुए थे। अब सप्लाई चेन पटरी पर लौटेगी और रुके हुए कंसाइनमेंट समय पर पहुंच सकेंगे।
आगरा हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अस्थाना का कहना है कि हस्तशिल्प उद्योग पूरी तरह से वैश्विक शांति पर निर्भर है। युद्ध के कारण पत्थर और मार्बल की कलाकृतियों की मांग गिर गई थी। इस विराम से यूरोप और खाड़ी देशों के बाजारों में फिर से सुगबुगाहट शुरू होगी।
हस्तशिल्प निर्यातक शीनू ने कहा कि सबसे बड़ी राहत लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर मिलेगी। युद्ध के चलते बीमा और फ्रेट चार्जेस ने निर्यातकों का बजट बिगाड़ दिया था। अब अनिश्चितता के बादल छंटेंगे और कारोबार में स्थिरता आएगी।
हस्तशिल्प निर्यातक विप्नेश त्यागी ने बताया कि हमारे हजारों कारीगरों की रोजी-रोटी निर्यात पर टिकी है। ऑर्डर रुकने से कारखानों में काम कम हो गया था। युद्धविराम से नए ऑर्डर की उम्मीद है, जिससे मध्यम और लघु उद्योगों को जबरदस्त सहारा मिलेगा।
प्लास्टिक उद्यमी जतिन अग्रवाल ने कहा कि व्यापार के लिए पूर्वानुमान बहुत जरूरी है। युद्ध ने भविष्य को धुंधला कर दिया था। दो सप्ताह का विराम ही सही, लेकिन यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और आगरा के एमएसएमई सेक्टर के लिए शुभ संकेत है।