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न्याय में रोड़ा बने पुलिसकर्मी: पॉक्सो और दुष्कर्म मामलों में पुलिस कर रही लापरवाही, वेतन रोकने के दिए आदेश
दुर्गेश चाहर, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 27 Feb 2026 09:48 AM IST
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सार
छेड़छाड़, पॉक्सो और दुष्कर्म मामलों में गवाही देने अदालत में उपस्थित न होने पर विशेष न्यायाधीश ने संबंधित पुलिसकर्मियों के वेतन रोकने के आदेश दिए हैं। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि गवाही के अभाव में न्याय में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छेड़छाड़, पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म के मामलों में आरोपपत्र अदालत में दाखिल होने के बाद भी पीड़िताओं को न्याय दिलाने में पुलिसकर्मी ही बाधा बन रहे हैं। वह तय तारीखों पर अपनी गवाही देने नहीं पहुंच रहे, जबकि अदालत ने चेतावनी, प्रतिकूल आदेश भी पारित किए। इस पर नाराजगी जताते हुए विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) सोनिका चौधरी ने गवाही न होने तक पुलिस आयुक्त को संबंधित पुलिसकर्मियों के वेतन रोकने के आदेश दिए हैं।
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पुलिस छेड़छाड़, पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म के मामलों में पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए प्राथमिकी दर्ज करती है। कोर्ट में पेश कर आरोपियों को जेल भेजा जाता है। इसके बाद विवेचना पूरी कर विवेचक अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर देते हैं। इसके बाद अदालत में पक्ष-विपक्ष की गवाही महत्वपूर्ण हो जाती है। इन्हीं गवाही के आधार पर अदालत अपना फैसला सुनाती है। लेकिन कई मुकदमों के विवेचक और पुलिसकर्मी शहर में तैनाती के बाद भी गवाही देने अदालत में नहीं पहुंच रहे हैं। इससे अदालत फैसला नहीं सुना पा रही है।
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केस-1
-थाना बसई अरेला में 2021 में पीड़िता ने छेड़छाड़, पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विवेचक उपनिरीक्षक मुकेश कुमार ने विवेचना कर आरोपपत्र दाखिल किया। लेकिन थाना अछनेरा में तैनात होने के बाद भी वह अदालत में गवाही देने नहीं पहुंचे। मामले में उनके अलावा सभी की गवाही हो चुकी है। कई बार प्रतिकूल आदेश के बाद भी अदालत में न आने पर वेतन रोकने के आदेश दिए गए।
-थाना बसई अरेला में 2021 में पीड़िता ने छेड़छाड़, पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विवेचक उपनिरीक्षक मुकेश कुमार ने विवेचना कर आरोपपत्र दाखिल किया। लेकिन थाना अछनेरा में तैनात होने के बाद भी वह अदालत में गवाही देने नहीं पहुंचे। मामले में उनके अलावा सभी की गवाही हो चुकी है। कई बार प्रतिकूल आदेश के बाद भी अदालत में न आने पर वेतन रोकने के आदेश दिए गए।
केस-2
- थाना बरहन में 2022 में छेड़छाड़, पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। तत्कालीन विवेचक अंकित कुमार ने विवेचना कर आरोपपत्र अदालत में दाखिल कर गवाही देना भूल गए। वह वर्तमान में थाना खंदौली में तैनात हैं। उनके अलावा सभी गवाहों की गवाही हो चुकी है। अदालत ने कई बार उनके खिलाफ प्रतिकूल आदेश पारित किए। इसके बाद भी नहीं आने पर इनका भी वेतन रोका गया है।
- थाना बरहन में 2022 में छेड़छाड़, पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। तत्कालीन विवेचक अंकित कुमार ने विवेचना कर आरोपपत्र अदालत में दाखिल कर गवाही देना भूल गए। वह वर्तमान में थाना खंदौली में तैनात हैं। उनके अलावा सभी गवाहों की गवाही हो चुकी है। अदालत ने कई बार उनके खिलाफ प्रतिकूल आदेश पारित किए। इसके बाद भी नहीं आने पर इनका भी वेतन रोका गया है।
केस- 3
- थाना न्यू में 2023 में दुष्कर्म व अन्य आरोपों में पीड़िता ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विवेचना में हेड कांस्टेबल संजय कुमार गवाह बनाए गए थे। वर्तमान में उसी थाने में तैनात होने के बाद भी गवाही देने अदालत में नहीं पहुंचे। अन्य सभी की गवाही दर्ज हो चुकी है। इनका भी वेतन अग्रिम आदेश तक के लिए रोकने के आदेश दिए गए हैं।
- थाना न्यू में 2023 में दुष्कर्म व अन्य आरोपों में पीड़िता ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विवेचना में हेड कांस्टेबल संजय कुमार गवाह बनाए गए थे। वर्तमान में उसी थाने में तैनात होने के बाद भी गवाही देने अदालत में नहीं पहुंचे। अन्य सभी की गवाही दर्ज हो चुकी है। इनका भी वेतन अग्रिम आदेश तक के लिए रोकने के आदेश दिए गए हैं।
