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UP: डिजिटल अरेस्ट से AI डीपफेक तक बदल रहे साइबर ठगी के तरीके, पुलिस ने बताया कैसे बचें; यहां पढ़ें हर एक जवाब
Tue, 28 Jul 2026 12:34 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 28 Jul 2026 12:34 PM IST
सार
आगरा में आयोजित साइबर जागरूकता कार्यशाला में पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग, डीपफेक और वॉइस क्लोनिंग जैसी नई साइबर ठगी से सतर्क रहने की सलाह दी। विशेषज्ञों ने कहा कि साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने से रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
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पुलिस आयुक्त दीपक कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डिजिटल अरेस्ट, निवेश के नाम पर ठगी, फिशिंग लिंक, फर्जी कस्टमर केयर, सोशल मीडिया हैकिंग, एआई आधारित डीपफेक एवं वॉइस क्लोनिंग, ऑनलाइन गेमिंग...। साइबर अपराधी इन्हीं तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। इनसे बचने के लिए लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है। पुलिस को भी नई-नई तकनीक से दक्ष रहना होगा। यह बात सोमवार को पुलिस लाइन के शहीद प्रशांत मेमोरियल सभागार में साइबर जागरूकता कार्यशाला में पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने कही। कार्यशाला में साइबर अपराध के बदलते स्वरूप, अपराधियों की कार्यप्रणाली, डिजिटल जांच की चुनौतियों और बचाव के व्यावहारिक उपायों पर प्रशिक्षण दिया गया। साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि साइबर अपराध की रोकथाम में जन-जागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम है।
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पुलिस आयुक्त ने कहा कि साइबर अपराध केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौती भी बन चुके हैं। एक कदम आगे रहने के लिए पुलिस बल का तकनीकी रूप से दक्ष, सतर्क एवं निरंतर अपडेट रहना अत्यंत आवश्यक है। साइबर अपराधी केवल आम नागरिकों को ही नहीं, बल्कि सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों, चिकित्सकों, अभियंताओं एवं अन्य शिक्षित एवं अनुभवी व्यक्तियों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। पुलिसकर्मी अपने-अपने थाना क्षेत्रों के विद्यालयों, महाविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों में जाकर और थाने पर स्थापित साइबर हेल्प डेस्क पर नियुक्त अधिकारी एवं कर्मचारी अपने पास आने वाले प्रत्येक नागरिक, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों एवं सेवानिवृत्त अधिकारियों/कर्मचारियों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करें। कार्यशाला में साइबर एक्सपर्ट रक्षित टंडन के अलावा पुलिस उपायुक्त आदित्य सिंह, साइबर सेल और थाना के पुलिसकर्मी मौजूद रहे।
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से सोमवार को राजकीय बालिका इंटर काॅलेज में पुलिस की पाठशाला का आयोजन किया गया। शिक्षक की भूमिका में एसीपी लोहामंडी गाैरव सिंह शामिल हुए। उन्होंने छात्राओं को साइबर अपराध से लेकर यातायात नियमों के बारे में बताया। जागरूक बनकर जिम्मेदार नागरिक बनने की सीख दी। इस दाैरान सवाल पूछने वाली छात्राओं ज्योति, प्रिया, किरन, मिली, दिव्यांशी, गुंजन, निधि, भूमि, रिया सेन, कामिनी, दिव्या पाठक, वर्षा, दिव्यांशी कुशवाहा, सरिता, रोनक, संजना, वैष्णवी, सोनल, स्वीटी, सुहाना को अमर उजाला की ओर से पुस्तकें प्रदान की गईं। इस अवसर पर शिक्षिकाएं उपमा देवी, अन्नपूर्णा और अंजना चाैहान माैजूद रहीं।
महिला संबंधी शिकायतों के लिए मिलाएं 1090
- साइबर अपराधी लालच में फंसाकर, डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इससे सावधान रहने की जरूरत है।
- दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट जरूर लगाएं। चार पहिया वाहन चलाने पर सीट बेल्ट का प्रयोग करें।
- घर के आसपास कुछ भी गलत होता हुआ देखें तो पुलिस से शिकायत करें। चुप नहीं रहना चाहिए।
- थाने पर सुनवाई न हो तो पुलिस अधिकारियों से शिकायत करें।
- महिला संबंधी शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर 1090 पर काॅल करें। घर बैठे ही शिकायत दर्ज हो जाएगी।
- मोबाइल पर आने वाले मैसेज को पहचानें। फर्जी मैसेज पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
- साइबर अपराधी लालच में फंसाकर, डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इससे सावधान रहने की जरूरत है।
- दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट जरूर लगाएं। चार पहिया वाहन चलाने पर सीट बेल्ट का प्रयोग करें।
- घर के आसपास कुछ भी गलत होता हुआ देखें तो पुलिस से शिकायत करें। चुप नहीं रहना चाहिए।
- थाने पर सुनवाई न हो तो पुलिस अधिकारियों से शिकायत करें।
- महिला संबंधी शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर 1090 पर काॅल करें। घर बैठे ही शिकायत दर्ज हो जाएगी।
- मोबाइल पर आने वाले मैसेज को पहचानें। फर्जी मैसेज पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
सवाल-जवाब
सवाल : साइबर अपराध होने पर क्या करना चाहिए?
जवाब : किसी भी तरह की साइबर ठगी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
सवाल : साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस क्या करती है?
जवाब : साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया जाता है। इसके बाद अदालत तय करती है कि आरोपी जेल भेजा जाना है या फिर जमानत दी जाएगी।
सवाल : क्या ठगी होने पर पुलिस रकम वापस करा पाती है?
जवाब : कई मामलों में रकम वापस करा दी जाती है। गोल्डन ऑवर (शुरुआती एक घंटा) में शिकायत करने वालों को अधिक फायदा होता है।
सवाल : पुलिस लोगों के साथ अभद्रता और मारपीट तक कर देती है। तब क्या करें?
जवाब : अगर कोई पुलिसकर्मी रुपयों की मांग करता है या फिर थाने-चाैकी में अभद्रता करता है तो पुलिस अधिकारियों से शिकायत करें। ऐसे मामलों में जांच के बाद कार्रवाई की जाती है।
सवाल : दुष्कर्म करने वालों को पुलिस सजा दिला पाती है या नहीं?
जवाब : पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करती है। इसके बाद साक्ष्य और गवाह पेश किए जाते हैं। सुनवाई के बाद साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट सजा सुनाती है।