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UP: भ्रष्टाचार का भस्मासुर बन गया था मनरेगा...अब दिखेगा असली काम, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ये कहा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 09 Jan 2026 01:25 PM IST
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सार
आगरा आए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जी राम जी अधिनियम की खूबियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि मनरेगा में बड़े पैमाने पर फर्जी हाजिरी, कागजी काम और धन के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आईं। इसी को देखते हुए सरकार अब नई योजना लाकर जमीन पर वास्तविक काम सुनिश्चित करना चाहती है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शुक्रवार को आगरा आए। उन्होंने जी राम जी अधिनियम की खूबियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि मनरेगा की मूल भावना ग्रामीण श्रमशक्ति और गांवों के विकास की थी, लेकिन समय के साथ यह योजना भ्रष्टाचार का भस्मासुर बन गई।
उप मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मनरेगा में बड़े पैमाने पर फर्जी हाजिरी, कागजी काम और धन के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आईं। इसी को देखते हुए सरकार अब नई योजना लाकर जमीन पर वास्तविक काम सुनिश्चित करना चाहती है। नई योजना में कार्य शुरू करने से पहले छह महीने तक सख्त कानूनी और प्रशासनिक तैयारियां की जाएंगी, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति करने वालों को यह बदलाव करंट जैसा लग रहा है, क्योंकि नई योजना पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत ग्राम रोजगार योजना में ग्रामीणों को 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जबकि मनरेगा में यह सीमा 100 दिन थी। योजना के तहत कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर काम दिखाई देगा।
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उप मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मनरेगा में बड़े पैमाने पर फर्जी हाजिरी, कागजी काम और धन के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आईं। इसी को देखते हुए सरकार अब नई योजना लाकर जमीन पर वास्तविक काम सुनिश्चित करना चाहती है। नई योजना में कार्य शुरू करने से पहले छह महीने तक सख्त कानूनी और प्रशासनिक तैयारियां की जाएंगी, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
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उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति करने वालों को यह बदलाव करंट जैसा लग रहा है, क्योंकि नई योजना पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत ग्राम रोजगार योजना में ग्रामीणों को 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जबकि मनरेगा में यह सीमा 100 दिन थी। योजना के तहत कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर काम दिखाई देगा।