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कासगंज: हजारा नहर में अठखेलियां करती दिखीं डॉल्फिन, चल रही है संरक्षण की कवायद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 24 Jan 2021 08:11 AM IST
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हजारा नहर में दिखीं डॉल्फिन
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज जिले में लगातार डॉल्फिन संरक्षण के लिए चल रही कवायद के बीच झाल के पुल के पास हजारा नहर में डॉल्फिन का कुनबा मिला है। जिला वन अधिकारी दिवाकर वशिष्ठ ने स्वयं इस डॉल्फिन के कुनबे को देखकर वीडियो शूट किया। वन विभाग की टीम भी नहर के और इलाकों में डॉल्फिन की तलाश करती रही। डीएफओ ने डॉल्फिन का कुनबा मिलने की जानकारी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम को दी है।
जिले में गंगानदी में डॉल्फिन दिखाई देने के कारण पिछले तीन माह से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग की टीम लगातार सक्रिय बनी हुई हैं। इसी सक्रियता के चलते डॉल्फिन संरक्षण की दिशा में जिले में कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। तीन दिन पूर्व ही गंगा के तटवर्तीय इलाकों के ग्रामीणों को डॉल्फिन एवं कछुआ संरक्षण के लिए प्रशिक्षित भी किया गया।
गंगानदी में डॉल्फिन की संख्या बढ़ रही है। गंगा के नरौरा बैराज से हजारा नजर में पानी छोड़ा जाता है। इसी पानी के वेग के साथ डॉल्फिन का कुनबा हजारा नहर में आ गया है। ऐसी स्थिति में गंगा में डॉल्फिन के संरक्षण के अलावा हजारा नहर में भी डॉल्फिन संरक्षण की अब जरूरत है। जिला वन अधिकारी दिवाकर वशिष्ठ बताते हैं कि उन्होंने स्वयं डॉल्फिन का एक कुनबा देखा है।
जिसमें एक नर व एक मादा डॉल्फिन है और एक शिशु डॉल्फिन है। उन्होंने बताया कि डॉल्फिन मछली अंधी होती है। वह ढाई वर्ष में एक बार गर्भवती होती है। गर्भधारण करने के नौ माह बाद ही वह शिशु को जन्म देती है। उन्होंने बताया कि डॉल्फिन के कुनबे के बारे में पूरा वीडियो शूट किया गया है जो डब्ल्यूडब्ल्यूएफ को भेजा गया है।
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जिले में गंगानदी में डॉल्फिन दिखाई देने के कारण पिछले तीन माह से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग की टीम लगातार सक्रिय बनी हुई हैं। इसी सक्रियता के चलते डॉल्फिन संरक्षण की दिशा में जिले में कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। तीन दिन पूर्व ही गंगा के तटवर्तीय इलाकों के ग्रामीणों को डॉल्फिन एवं कछुआ संरक्षण के लिए प्रशिक्षित भी किया गया।
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गंगानदी में डॉल्फिन की संख्या बढ़ रही है। गंगा के नरौरा बैराज से हजारा नजर में पानी छोड़ा जाता है। इसी पानी के वेग के साथ डॉल्फिन का कुनबा हजारा नहर में आ गया है। ऐसी स्थिति में गंगा में डॉल्फिन के संरक्षण के अलावा हजारा नहर में भी डॉल्फिन संरक्षण की अब जरूरत है। जिला वन अधिकारी दिवाकर वशिष्ठ बताते हैं कि उन्होंने स्वयं डॉल्फिन का एक कुनबा देखा है।
जिसमें एक नर व एक मादा डॉल्फिन है और एक शिशु डॉल्फिन है। उन्होंने बताया कि डॉल्फिन मछली अंधी होती है। वह ढाई वर्ष में एक बार गर्भवती होती है। गर्भधारण करने के नौ माह बाद ही वह शिशु को जन्म देती है। उन्होंने बताया कि डॉल्फिन के कुनबे के बारे में पूरा वीडियो शूट किया गया है जो डब्ल्यूडब्ल्यूएफ को भेजा गया है।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम कर रही डॉल्फिन की गणना
डॉल्फिन की गणना का कार्य डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने गंगानदी में बिजनौर बैराज से नरौरा बैराज तक पूरा कर लिया है। जिसमें 60-70 डॉल्फिन मछलियों का आंकड़ा सामने आया है। वहीं नरौरा बैराज के बाद सांकरा क्षेत्र में 16-17 डॉल्फिन मछली होने का अनुमान है और लहरा से कादरगंज के बीच 9-10 डॉल्फिन होने का अनुमान है। हजारा नहर में फिलहाल एक ही कुनबा है।
डॉल्फिन की गणना का कार्य डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने गंगानदी में बिजनौर बैराज से नरौरा बैराज तक पूरा कर लिया है। जिसमें 60-70 डॉल्फिन मछलियों का आंकड़ा सामने आया है। वहीं नरौरा बैराज के बाद सांकरा क्षेत्र में 16-17 डॉल्फिन मछली होने का अनुमान है और लहरा से कादरगंज के बीच 9-10 डॉल्फिन होने का अनुमान है। हजारा नहर में फिलहाल एक ही कुनबा है।