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UP: हनुमान शोभायात्रा में हाथी की सवारी, वन विभाग ने दिया नोटिस; आयोजकों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 07 Apr 2026 09:16 AM IST
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सार

हनुमान जन्मोत्सव पर निकली शोभायात्रा में बिना अनुमति हाथी के इस्तेमाल पर वन विभाग ने आयोजकों से जवाब तलब किया है। नियमों के उल्लंघन पर 3 से 7 साल तक की सजा और जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है।

Elephant in Hanuman Procession Sparks Trouble Forest Department Seeks Explanation from Organizers
हनुमान शोभायात्रा में हाथी की सवारी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

भीड़भाड़ वाले क्षेत्र फुलट्टी बाजार से पुराने शहर की तंग गलियों में निकाली गई श्री हनुमंत शोभायात्रा में शामिल किए गए हाथी के मामले में वन विभाग ने आयोजकों से जवाब मांगा है। सोमवार को वन विभाग ने आयोजक श्री केसरी नंदन महोत्सव समिति के प्रबंधक से पूछा है कि भीड़ वाली जगह पर शोभायात्रा में हाथी का इस्तेमाल क्यों किया गया और क्या इसके लिए किसी भी सक्षम स्तर से अनुमति ली गई थी।
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बीते शुक्रवार को हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर फुलट्टी बाजार से पुराने शहर में शोभायात्रा निकाली गई थी। इसमें जयपुर से लाई गई मादा हाथी झूमती का इस्तेमाल किया गया था। अमर उजाला ने रविवार के अंक में बेअसर नियम, बेबस गजराज... संरक्षण का तंत्र बना सफेद हाथी शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद सोमवार को वन विभाग ने आयोजकों को यह नोटिस जारी किया है।

 
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वन विभाग के डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि अनुमति के बिना शोभायात्रा में हाथी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। आयोजकों से पूछा गया है कि उन्होंने शोभायात्रा में हाथी निकालने के लिए कहां से अनुमति ली थी। हाथी वन्य जीव संरक्षण अधिनियम-1972 की अनुसूची-1 का वन्य प्राणी है। आयोजकों से लिखित जवाब मांगा गया है। वन विभाग ने पुलिस और संबंधित एसडीएम को भी पत्र भेजा है। डीएफओ के मुताबिक आयोजकों के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।

 

आयोजकों पर ये हो सकती है कार्रवाई
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 51 के तहत अनुसूची-1 जीव के संबंध में अपराध या नियमों के उल्लंघन पर न्यूनतम 3 साल और अधिकतम 7 साल कारावास की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है। वन विभाग ऐसे मामलों में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत धारा 9, 11, 39, 40, 44, 50, 51 में प्राथमिकी दर्ज करा सकता है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता की लोक शांतिभंग धाराओं और दंड प्रक्रिया संहिता के तहत भी कार्रवाई हो सकती है। निजी स्वामित्व वाले हाथी के सार्वजनिक उपयोग के लिए वन विभाग (चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन) की विशेष अनुमति लेनी पड़ती है, अन्यथा प्रमाणपत्र रद्द या जब्ती की कार्रवाई हो सकती है।
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