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UP: आलू-सरसों के बाद किसान कर लें ये फसल, पशुओं के लिए चारे की नहीं होगी कमी; 65 से 75 दिन में बंपर होगी कमाई

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Sat, 07 Mar 2026 10:13 AM IST
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सार

आलू और सरसों की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में किसान ग्रीष्मकालीन बाजरे की बुवाई कर अतिरिक्त धन कमा सकते हैं। यह फसल कम लागत और कम समय में 30–40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है।

Farmers Can Earn Extra Income with Summer Pearl Millet Crop Ready in 65–75 Days
बाजरा की फसल। संवाद
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विस्तार

 जनपद में आलू और सरसों की फसल कटने के बाद मार्च में अधिकांश खेत खाली हो जाते हैं। ऐसे में किसान सिंचाई की सुविधा होने पर ग्रीष्मकालीन बाजरा की बुवाई कर सकते हैं। यह फसल 65 से 75 दिनों में तैयार होकर अतिरिक्त आय देती है।
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आरबीएस कॉलेज कृषि संकाय के प्रोफेसर राजवीर सिंह के अनुसार, ग्रीष्मकालीन बाजरा कम अवधि और लागत में अच्छी पैदावार देता है। यह जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में एक सुरक्षित विकल्प है। खरीफ में बाजरा बारिश, जलभराव और कीट-रोगों से प्रभावित होता है। गर्मियों में सिंचाई से नमी का संतुलन बनाए रखना आसान होता है। इससे फसल की बढ़वार समान रहती है और दाना भराव बेहतर होता है। इस मौसम में कीट-रोग और खरपतवार का प्रकोप भी कम रहता है। यह फसल 30-40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है। संवाद

 
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फसल प्रबंधन और किस्में
बुवाई 15 मार्च तक करना उपयुक्त है जिसमें बीज दर 5-7 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें। कतार से कतार की दूरी 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10-15 सेंटीमीटर उचित है। बीज उपचार के बाद 20-25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें। मृदा परीक्षण के आधार पर 80 किग्रा नत्रजन, 40 किग्रा फाॅस्फोरस और 40 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर दें। 10-15 दिन के अंतराल पर सिंचाई लाभकारी रहेगी। संकर किस्मों में टीजी-37, आर-2008, आर-9251, डीएच-86, एएम-52, पीवी-180, प्रोएग्रो-9555, प्रोएग्रो-9444 और नंदी-72 प्रमुख हैं। संकुल किस्मों में पूसा कम्पोजिट-383, राज-171 और आईसीटीपी-8203 अच्छी मानी जाती हैं।

 

यह हैं फायदे -
65–75 दिनों में तैयार फसल
30–40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक संभावित उत्पादन
कम पानी और कम लागत
पशुओं के लिए अच्छा हरा चारा
 
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