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UP: आगरा कॉलेज की 340 बीघा जमीन पर नजर, शिक्षक-कर्मचारी हुए एकजुट; ये चेतावनी दी गई
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 07 Mar 2026 11:08 AM IST
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सार
आगरा कॉलेज की 340 बीघा भूमि पर कब्जे या हस्तांतरण की आशंका को लेकर शिक्षक और कर्मचारी एकजुट हो गए हैं। स्टाफ क्लब ने चेतावनी दी है कि 200 साल पुराने संस्थान की जमीन पर किसी भी तरह की कुदृष्टि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आगरा कॉलेज आगरा
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विस्तार
आगरा कॉलेज की भूमि और परिसंपत्तियों पर किसी भी तरह के कब्जे या हस्तांतरण के प्रयास का कड़ा विरोध किया जाएगा। यह बात आगरा कॉलेज के शिक्षकों के संगठन स्टाफ क्लब के सचिव प्रो. विजय कुमार सिंह ने कही।
उन्होंने कहा कि कुछ स्वार्थी और अराजकतत्व कॉलेज की भूमि पर नजर गड़ाए हुए हैं। स्टाफ क्लब ने ऐसे लोगों को चेतावनी दी है कि आगरा के गौरव और 200 से अधिक वर्ष पुराने ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान की संपत्ति पर किसी भी तरह की कुदृष्टि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रो. विजय कुमार सिंह ने बताया कि आगरा कॉलेज भविष्य में राज्य या केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने की दिशा में प्रयासरत है, जिसके लिए वर्तमान भूमि और अवसंरचनाएं भी कम पड़ सकती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मेट्रो रेल परियोजना के दौरान पूर्व प्राचार्य की मिलीभगत से कॉलेज का क्रीड़ांगन बिना वैध प्रक्रिया और मुआवजे के ले लिया गया।
स्टाफ क्लब का कहना है कि गजट दस्तावेजों के अनुसार कॉलेज के पास लगभग 340 बीघा भूमि है और इसके किसी भी हिस्से पर कब्जे की कोशिश का जवाब दिया जाएगा। नागरी प्रचारिणी से लेकर संपूर्ण राजा की मंडी तक की भूमि एक ही खसरा नंबर में स्थित है जिसका विधिक स्वामित्व आगरा कॉलेज के पास है। संगठन ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से भी संस्थान की भूमि और दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
बताया कि व्यापार मंडल के एक पदाधिकारी की ओर से कॉलेज की भूमि व्यापारियों को देने के संबंध में ज्ञापन देने की जानकारी मिली है। साथ ही कॉलेज के पूर्व छात्रों, जिनमें उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और सांसद डॉ. एसपी सिंह बघेल शामिल हैं, से भी भूमि संरक्षण और कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने में सहयोग की अपील की गई है।
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उन्होंने कहा कि कुछ स्वार्थी और अराजकतत्व कॉलेज की भूमि पर नजर गड़ाए हुए हैं। स्टाफ क्लब ने ऐसे लोगों को चेतावनी दी है कि आगरा के गौरव और 200 से अधिक वर्ष पुराने ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान की संपत्ति पर किसी भी तरह की कुदृष्टि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रो. विजय कुमार सिंह ने बताया कि आगरा कॉलेज भविष्य में राज्य या केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने की दिशा में प्रयासरत है, जिसके लिए वर्तमान भूमि और अवसंरचनाएं भी कम पड़ सकती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मेट्रो रेल परियोजना के दौरान पूर्व प्राचार्य की मिलीभगत से कॉलेज का क्रीड़ांगन बिना वैध प्रक्रिया और मुआवजे के ले लिया गया।
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स्टाफ क्लब का कहना है कि गजट दस्तावेजों के अनुसार कॉलेज के पास लगभग 340 बीघा भूमि है और इसके किसी भी हिस्से पर कब्जे की कोशिश का जवाब दिया जाएगा। नागरी प्रचारिणी से लेकर संपूर्ण राजा की मंडी तक की भूमि एक ही खसरा नंबर में स्थित है जिसका विधिक स्वामित्व आगरा कॉलेज के पास है। संगठन ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से भी संस्थान की भूमि और दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
बताया कि व्यापार मंडल के एक पदाधिकारी की ओर से कॉलेज की भूमि व्यापारियों को देने के संबंध में ज्ञापन देने की जानकारी मिली है। साथ ही कॉलेज के पूर्व छात्रों, जिनमें उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और सांसद डॉ. एसपी सिंह बघेल शामिल हैं, से भी भूमि संरक्षण और कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने में सहयोग की अपील की गई है।
