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किसानों का दर्द: आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलें, 50 हजार प्रति एकड़ मुआवजा; कर्ज माफी की मांग

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 07 Apr 2026 09:32 AM IST
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सार

आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से फसल बर्बादी के बाद किसानों ने 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा और कर्ज माफी की मांग उठाई। ज्ञापन सौंपकर किसानों ने सर्वे में पारदर्शिता और नुकसान का सही आकलन कराने की मांग भी की।
 

Farmers Demand 50,000 Per Acre Compensation After Crop Loss Due to Hailstorm
ओलावृष्टि से खड़ी फसल बर्बाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आगरा में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों के मामले में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को कलेक्ट्रेट में मुख्यमंत्री को संबोधित मांग पत्र अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) शुभांगी शुक्ला को सौंपा। रालोद के प्रदेश उपाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने कहा कि वर्तमान में सिंचित भूमि के लिए मात्र 17,500 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा का प्रावधान है जबकि इतनी तो केवल जुताई की लागत आती है।
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फसल शत-प्रतिशत नष्ट हो चुकी है। सरकार को 50 हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता राशि देनी चाहिए। राजस्व वसूली तत्काल स्थगित करने व किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का एक वर्ष का ब्याज माफ करने की मांग भी की। इस दौरान नरेंद्र बघेल, दुर्गेश शुक्ला, चौ. दिलीप सिंह, भूदेव सिंह प्रधान, सतवीर रावत, संजीव शर्मा, आलोक चौधरी, मास्टर सुरेंद्र सिंह व अन्य मौजूद रहे। 
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कृषि ऋण माफ करें, जल्द मुआवजा दिलाएं
 बारिश और भीषण ओलावृष्टि से कराह रहे किसानों के लिए सोमवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी से मुलाकात की। भाजपा किसान नेता मोहन सिंह चाहर के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में किसानों ने फसल नुकसान का सही आकलन, मुआवजा और कृषि ऋण माफ करने की मांग उठाई। चाहर ने बताया कि किरावली तहसील के सरसा, अरहेरा, दूरा, मई बुजुर्ग और सिकरौदा सहित जनपद के सैकड़ों गांवों में गेहूं और सब्जियों की फसल 80 प्रतिशत तक बर्बाद हो चुकी है।

आरोप लगाया कि लेखपाल सर्वे में अनियमितता बरतते हैं और 33 फीसदी से अधिक नुकसान को भी कम दिखाकर किसानों को मुआवजे से वंचित कर देते हैं। ऐसे में पारदर्शिता के साथ आकलन कराया जाए। डीएम ने किसान नेता से अधिक प्रभावित गांवों की सूची भी मांगी है ताकि सर्वे रिपोर्ट का मिलान किया जा सके। इस दौरान हाकिम सिंह चाहर, केशवदेव शर्मा, भीष्मपाल सोलंकी, भरत सिंह, महावीर प्रधान सहित कई किसान नेता मौजूद रहे।
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