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Kargil War Vijay Diwas 2024: मैनपुरी के ये पांच वीर सपूत, कारगिल में दी शहादत; इतिहास में हुए अमर
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 25 Jul 2024 07:25 PM IST
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Kargil War Vijay Diwas 2024
- फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी के उन वीर जवानों ने कारगिल युद्ध में हंसते-हंसते देश के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया। देश का नाम रोशन कर पांच परिवारों के दीपक हमेशा-हमेशा के लिए बुझ गए। आज कारगिल विजय दिवस है। लोगों को कारगिल में देश की रक्षा के लिए मर मिटने वालों पर गर्व है, लेकिन कारगिल शहीदों के परिजन को आज भी सरकार से पीड़ा है। कुछ शहीदों के लिए सरकार ने किया वादा पूरा नहीं किया। कुछ का कहना है कि शहीदों के परिजन की कोई सुनने वाला नहीं है। कम से कम प्रशासनिक अधिकारी साल में एक दिन तो उनके घर पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुनें।
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शहीद अरुद्दीन
- फोटो : अमर उजाला
काफी मशक्कत के बाद लगी शहीद अमरुद्दीन की प्रतिमा
कारगिल युद्ध के दौरान 3 जुलाई को किशनी को गांव दिवनपुर साहिनी निवासी अमरुद्दीन शहीद हो गए थे। शहीद की पत्नी मोमना बेगम का कहना है कि सरकार ने अन्य शहीदों को जो सुविधाएं दीं उनके परिवार को साथ सौतेला व्यवहार किया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के बाकी शहीदों को सरकारी भूमि के पट्टे दिये गए थे। जबकि उन्होंने कई बार अधिकारियों से इस बारे में बात की पर जमीन का पट्टा नहीं दिया गया। तत्कालीन विधायक द्वारा प्रदान की गई आदमकद प्रतिमा भी काफी मशक्कत के बाद ही लगवाई जा सकी। अधिकारी शहीद के परिजन से मिलना तक उचित नहीं समझते हैं।
कारगिल युद्ध के दौरान 3 जुलाई को किशनी को गांव दिवनपुर साहिनी निवासी अमरुद्दीन शहीद हो गए थे। शहीद की पत्नी मोमना बेगम का कहना है कि सरकार ने अन्य शहीदों को जो सुविधाएं दीं उनके परिवार को साथ सौतेला व्यवहार किया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के बाकी शहीदों को सरकारी भूमि के पट्टे दिये गए थे। जबकि उन्होंने कई बार अधिकारियों से इस बारे में बात की पर जमीन का पट्टा नहीं दिया गया। तत्कालीन विधायक द्वारा प्रदान की गई आदमकद प्रतिमा भी काफी मशक्कत के बाद ही लगवाई जा सकी। अधिकारी शहीद के परिजन से मिलना तक उचित नहीं समझते हैं।
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शहीद मुनीष कुमार यादव
- फोटो : अमर उजाला
कम से कम साल में एक दिन तो आएं अधिकारी
कारगिल चोटी पर पाक सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए बेवर क्षेत्र के ग्राम गढिय़ा घुटारा के ग्रेनेडियर सिपाही मुनीष कुमार 3 जून को शहीद हो गए थे। उनकी शहादत के बाद गांव में बना स्मारक उनकी शहादत की याद दिलाता है। उनके माता-पिता गांव में रहते हैं। पत्नी मंजू यादव भरथना में रहकर बच्चों को पढ़ा लिखा रही हैं। पत्नी का कहना है कि सरकार ने बहुत दिया लेकिन परिजन को जो सम्मान मिलना चाहिए वह नहीं मिलता है। अधिकारियों को साल में कम से कम एक दिन शहीदों के परिवार से मिलने के लिए निकालना चाहिए।
कारगिल चोटी पर पाक सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए बेवर क्षेत्र के ग्राम गढिय़ा घुटारा के ग्रेनेडियर सिपाही मुनीष कुमार 3 जून को शहीद हो गए थे। उनकी शहादत के बाद गांव में बना स्मारक उनकी शहादत की याद दिलाता है। उनके माता-पिता गांव में रहते हैं। पत्नी मंजू यादव भरथना में रहकर बच्चों को पढ़ा लिखा रही हैं। पत्नी का कहना है कि सरकार ने बहुत दिया लेकिन परिजन को जो सम्मान मिलना चाहिए वह नहीं मिलता है। अधिकारियों को साल में कम से कम एक दिन शहीदों के परिवार से मिलने के लिए निकालना चाहिए।
शहीद सत्यदेव यादव
- फोटो : अमर उजाला
शहीद के माता पिता से नहीं पूछता कोई हाल
कारगिल चोटी पर पाक सैनिकों के साथ युद्ध में घिरोर क्षेत्र के गांव शाहजहांपुर निवासी सत्यदेव सिंह 24 जुलाई 1999 को शहीद हो गए थे। उनके परिवार को सरकार ने सुविधाएं दीं। परिजन भी सरकारी की सुविधाओं से संतुष्ट हैं। शहीद की मां जावित्री देवी का कहना है कि बूढ़े मां-बाप के पास पहले तो बहुत लोग उनका हाल जानने के लिए आते थे। लेकिन अब उनका हाल जानने कोई नहीं पहुंचता है। कम से कम कारगिल विजय दिवस पर तो अधिकारी आकर उनका हाल जान लेते।
कारगिल चोटी पर पाक सैनिकों के साथ युद्ध में घिरोर क्षेत्र के गांव शाहजहांपुर निवासी सत्यदेव सिंह 24 जुलाई 1999 को शहीद हो गए थे। उनके परिवार को सरकार ने सुविधाएं दीं। परिजन भी सरकारी की सुविधाओं से संतुष्ट हैं। शहीद की मां जावित्री देवी का कहना है कि बूढ़े मां-बाप के पास पहले तो बहुत लोग उनका हाल जानने के लिए आते थे। लेकिन अब उनका हाल जानने कोई नहीं पहुंचता है। कम से कम कारगिल विजय दिवस पर तो अधिकारी आकर उनका हाल जान लेते।
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शहीद हेमचरन यादव
- फोटो : अमर उजाला
शहीद के परिजन से किया वादा भूली सरकार
औंछा क्षेत्र के ग्राम नगला आंध्रा निवासी हेमचरन कारगिल की लड़ाई में 23 जुलाई 1999 को शहीद हो गये थे। पत्नी संगीता देवी की सन 2005 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उनके एक बेटा व एक बेटी है। बेटा शुभम व बेटी शिल्पी यादव बाहर रहकर नौकरी कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार कहा गया था कि शहीद हेमचरन के नाम से गांव में एक कॉलेज खोला जाएगा। कॉलेज के लिए परिजन द्वारा जमीन का भी इंतजाम कर लिया गया। मगर प्रशासन द्वारा आज तक कॉलेज के लिए कोई पहल नहीं की गई है।
औंछा क्षेत्र के ग्राम नगला आंध्रा निवासी हेमचरन कारगिल की लड़ाई में 23 जुलाई 1999 को शहीद हो गये थे। पत्नी संगीता देवी की सन 2005 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उनके एक बेटा व एक बेटी है। बेटा शुभम व बेटी शिल्पी यादव बाहर रहकर नौकरी कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार कहा गया था कि शहीद हेमचरन के नाम से गांव में एक कॉलेज खोला जाएगा। कॉलेज के लिए परिजन द्वारा जमीन का भी इंतजाम कर लिया गया। मगर प्रशासन द्वारा आज तक कॉलेज के लिए कोई पहल नहीं की गई है।