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श्रीमनकामेश्वर मंदिर: 22 पवित्र धाराओं से अभिषिक्त हुआ मनकामेश्वर का कुआं, लौटी सदियों पुरानी परंपरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 08 Jan 2026 09:16 AM IST
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सार
श्री मनकामेश्वर मंदिर परिसर में ऐतिहासिक कुएं में रामेश्वर से लाए गए 22 पवित्र कुओं के जल को प्रवाहित किया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कुएं का विधिवत पूजन करवाया।
श्री मनकामेश्वर मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के श्री मनकामेश्वर मंदिर परिसर में ऐतिहासिक कुएं का जीर्णोद्धार हुआ। बुधवार को विधिवत पूजन एवं लोकार्पण समारोह श्रद्धा और भाव के साथ किया गया। शुभारंभ मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने किया। मंदिर के महंत योगेश पुरी एवं मंदिर मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कुएं का विधिवत पूजन करवाया।
मंदिर मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि रामेश्वर से विशेष रूप से लाए गए 22 पवित्र कुओं के जल को कुएं में प्रवाहित किया। पवित्र जल के संग यह कुआं एक बार फिर आध्यात्मिक चेतना और परंपरा का जीवंत प्रतीक बनेगा। मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्राचीन कुएं हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर हैं। यह पहल जल संरक्षण और धार्मिक परंपराओं दोनों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
विवाह पर कुआं पूजन की परंपरा
महंत योगेश पुरी ने कहा कि यह कुआं मीठे जल का स्रोत होने के साथ-साथ विविध पूजन और संस्कारों का प्रमुख केंद्र रहा है। विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर कुआं पूजन की परंपरा निभाई जाती थी। किंतु समय के साथ यह रस्म हैडपंप तक सीमित हो गई। इसमें अमर गुप्ता एवं विजय सिंह का विशेष सहयोग रहा।
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मंदिर मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि रामेश्वर से विशेष रूप से लाए गए 22 पवित्र कुओं के जल को कुएं में प्रवाहित किया। पवित्र जल के संग यह कुआं एक बार फिर आध्यात्मिक चेतना और परंपरा का जीवंत प्रतीक बनेगा। मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्राचीन कुएं हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर हैं। यह पहल जल संरक्षण और धार्मिक परंपराओं दोनों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
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विवाह पर कुआं पूजन की परंपरा
महंत योगेश पुरी ने कहा कि यह कुआं मीठे जल का स्रोत होने के साथ-साथ विविध पूजन और संस्कारों का प्रमुख केंद्र रहा है। विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर कुआं पूजन की परंपरा निभाई जाती थी। किंतु समय के साथ यह रस्म हैडपंप तक सीमित हो गई। इसमें अमर गुप्ता एवं विजय सिंह का विशेष सहयोग रहा।