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Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी व्रत आज, जानें नियम और विधि; 24 एकादशियों के बराबर मिलेगा पुण्य
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 25 Jun 2026 09:54 AM IST
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सार
Nirjala Ekadashi Vrat 2026: ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी आज श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। महिलाएं अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की आराधना कर रही हैं।
एकादशी पर नियमों का पालन करें
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी के लिए महिलाओं और श्रद्धालुओं में उत्साह है। इस बार यह व्रत बेहद शुभ संयोग में पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्रा ने बताया कि एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6:12 बजे से शुरू हो गई है, यह 25 की रात 8:09 बजे तक रहेगी। इससे 25 को उदया तिथि के अनुसार निर्जला एकादशी महाव्रत रखा जाएगा।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार यदि कोई श्रद्धालु इस दिन बिना जल ग्रहण किए साधना करता है तो उसे वर्ष भर की समस्त 24 एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और अखंड सौभाग्य के लिए यह कठिन तप करती हैं। व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक (लगभग 24 घंटे) जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती है। हालांकि, उन्होंने सलाह दी कि यदि कोई गंभीर बीमारी, डायबिटीज या स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझ रहा है तो वह निर्जल व्रत न रखे।
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अखंड सौभाग्य के लिए सबसे कठिन व्रत
ज्योतिषाचार्य डॉ. पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि सनातन धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे सैनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन बिना जल के उपवास रखकर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। इस व्रत में दान का अनंत फल मिलता है। भीषण गर्मी से राहत दिलाने वाले साधन जैसे मिट्टी का मटका, हाथ का पंखा, रसीले फल और मीठे शरबत का दान करना बेहद शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि सनातन धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे सैनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन बिना जल के उपवास रखकर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। इस व्रत में दान का अनंत फल मिलता है। भीषण गर्मी से राहत दिलाने वाले साधन जैसे मिट्टी का मटका, हाथ का पंखा, रसीले फल और मीठे शरबत का दान करना बेहद शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।
हममें अटूट श्रद्धा
भावना एस्टेट निवासी राखी ने बताया कि गर्मी के बावजूद इस व्रत में हममें अटूट श्रद्धा है। ठाकुरजी की कृपा से बिना पानी के भी यह साधना पूरी होती है। यह व्रत हमारे परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आधार है।
भावना एस्टेट निवासी राखी ने बताया कि गर्मी के बावजूद इस व्रत में हममें अटूट श्रद्धा है। ठाकुरजी की कृपा से बिना पानी के भी यह साधना पूरी होती है। यह व्रत हमारे परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आधार है।
सबसे फलदायी व्रत
दयालबाग निवासी कांति देवी का कहना है कि निर्जला एकादशी साल का सबसे कठिन लेकिन सबसे फलदायी व्रत है। इस दिन दान-पुण्य और मिट्टी के घड़े का दान करने का विशेष महत्व है। हम सभी सखियां मिलकर इस उत्सव की तैयारी कर रही हैं।
दयालबाग निवासी कांति देवी का कहना है कि निर्जला एकादशी साल का सबसे कठिन लेकिन सबसे फलदायी व्रत है। इस दिन दान-पुण्य और मिट्टी के घड़े का दान करने का विशेष महत्व है। हम सभी सखियां मिलकर इस उत्सव की तैयारी कर रही हैं।
निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 5 काम
तामसिक भोजन का सेवन न करें
क्रोध और विवाद से बचें
तुलसी के पत्ते न तोड़ें
आलस्य और अधिक नींद से दूर रहें
किसी का अपमान न करें
तामसिक भोजन का सेवन न करें
क्रोध और विवाद से बचें
तुलसी के पत्ते न तोड़ें
आलस्य और अधिक नींद से दूर रहें
किसी का अपमान न करें
निर्जला एकादशी पर क्या दान करें?
जल से भरा मिट्टी का घड़ा
खरबूजा, तरबूज और आम जैसे मौसमी फल
हाथ का पंखा या छाता
सत्तू और चने की दाल
जल से भरा मिट्टी का घड़ा
खरबूजा, तरबूज और आम जैसे मौसमी फल
हाथ का पंखा या छाता
सत्तू और चने की दाल
निर्जला एकादशी पर मंत्र जाप
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान।
यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।
शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्, विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम् , वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान।
यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।
शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्, विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम् , वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को क्या अर्पित करें?
निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
भगवान को पीले रंग के पुष्प अर्पित किए जाते हैं, जो शुभता और समृद्धि का प्रतीक हैं।
चंदन का तिलक लगाकर श्रीहरि की पूजा की जाती है।
अक्षत (चावल) अर्पित कर मंगलकामना की जाती है।
पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करना पुण्यदायी माना जाता है।
मौसमी फल और नैवेद्य अर्पित कर भगवान का भोग लगाया जाता है।
पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर आराधना की जाती है।
निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
भगवान को पीले रंग के पुष्प अर्पित किए जाते हैं, जो शुभता और समृद्धि का प्रतीक हैं।
चंदन का तिलक लगाकर श्रीहरि की पूजा की जाती है।
अक्षत (चावल) अर्पित कर मंगलकामना की जाती है।
पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करना पुण्यदायी माना जाता है।
मौसमी फल और नैवेद्य अर्पित कर भगवान का भोग लगाया जाता है।
पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर आराधना की जाती है।
निर्जला एकादशी पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करके उसे तैयार करें।
हाथ में जल और पुष्प लेकर निर्जला एकादशी व्रत तथा भगवान विष्णु की पूजा का संकल्प लें।
एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उसे फूलों से सजाएं और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करें।
श्रीहरि को पीले पुष्प, चंदन, अक्षत, हल्दी, तुलसी दल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी और वस्त्र अर्पित करें।
श्रद्धापूर्वक विष्णु सहस्रनाम और विष्णु चालीसा का पाठ करें।
निर्जला एकादशी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
कपूर या घी के दीपक से भगवान विष्णु की आरती करें।
पूजा पूर्ण होने पर जल से भरा मिट्टी का कलश दान करें।
पूरे दिन निराहार रहकर व्रत का पालन करें और भजन-कीर्तन तथा भगवान के स्मरण में समय बिताएं।
सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में दीप प्रज्वलित कर पुनः विष्णु पूजा करें।
रात्रि में यथाशक्ति जागरण कर भगवान का भजन करें।
अगले दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा करें।
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करके उसे तैयार करें।
हाथ में जल और पुष्प लेकर निर्जला एकादशी व्रत तथा भगवान विष्णु की पूजा का संकल्प लें।
एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उसे फूलों से सजाएं और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करें।
श्रीहरि को पीले पुष्प, चंदन, अक्षत, हल्दी, तुलसी दल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी और वस्त्र अर्पित करें।
श्रद्धापूर्वक विष्णु सहस्रनाम और विष्णु चालीसा का पाठ करें।
निर्जला एकादशी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
कपूर या घी के दीपक से भगवान विष्णु की आरती करें।
पूजा पूर्ण होने पर जल से भरा मिट्टी का कलश दान करें।
पूरे दिन निराहार रहकर व्रत का पालन करें और भजन-कीर्तन तथा भगवान के स्मरण में समय बिताएं।
सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में दीप प्रज्वलित कर पुनः विष्णु पूजा करें।
रात्रि में यथाशक्ति जागरण कर भगवान का भजन करें।
अगले दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा करें।