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UP: मोटापा और तंबाकू से खतरे में गर्भ, समय से पहले जन्म और नवजातों में मिल रहीं विकृतियां
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 28 Mar 2026 12:29 PM IST
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सार
डॉक्टरों के अनुसार मोटापा, तंबाकू सेवन और संक्रमण के कारण गर्भवती महिलाओं में समय से पहले प्रसव और शिशुओं में विकृतियों का खतरा बढ़ रहा है। करीब 14% मामलों में प्री-मेच्योर डिलीवरी हो रही है, जिससे शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ रहा है।
गर्भवती
- फोटो : adobestock
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विस्तार
मोटापा और महिलाओं में धूम्रपान-तंबाकू की लत गर्भस्थ शिशु की सेहत बिगाड़ रही है। इससे विकृतियां भी हो रही हैं और प्री-मेच्योर डिलीवरी का खतरा भी बढ़ गया है। ये बातें स्त्री रोग विशेषज्ञों ने फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलाॅजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (फोग्सी) की हरीपर्वत स्थित होटल में आयोजित सेमिनार में कही।
आगरा ऑब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलाॅजिकल सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. रिचा सिंह ने कहा कि करीब 14 फीसदी गर्भवती के प्री-मेच्योर (37 सप्ताह से पहले) डिलीवरी हो रही है। इनमें से 88 फीसदी के 32 सप्ताह से पहले प्रसव हो रहा है। इससे शिशु के जन्मजात विकृतियां, मानसिक और शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह मोटापा, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई), धूम्रपान-तंबाकू और रक्त की कमी मिल रही है।
फोग्सी की डॉ. भारती माहेश्वरी ने प्री-मेच्योर डिलीवरी से बचाव के बारे में जानकारी दी। सचिव डॉ. निधि बंसल ने प्री-मेच्योर डिलीवरी वाले शिशुओं के मामले में कंगारू थेरेपी कारगर बताई। इसमें ऐसे शिशु को माता-पिता अपनी सीने पर रखते हैं। इससे उसको प्राकृतिक तापमान मिलता है। इससे उसकी सेहत में तेजी से सुधार होता है। सेमिनार में डॉ. सविता त्यागी, डॉ. नीरज यादव, डॉ पंकज कुमार, डॉ. निहारिका मल्होत्रा, डॉ. स्वाति द्विवेदी, डॉ. अनुभव जैन, डॉ. मनीष परमार आदि मौजूद रहे।
ये दिए सुझाव
- गर्भावस्था के समय नियमित जांच कराएं।
- पौष्टिक आहार लें, फास्ट फूड से बचें।
- वजन नियंत्रित करें, तंबाकू-धूम्रपान से बचें।
- नियमित योग और व्यायाम की आदत डालें।
- पेशाब में संक्रमण पर डॉक्टर को तत्काल दिखाएं।
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आगरा ऑब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलाॅजिकल सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. रिचा सिंह ने कहा कि करीब 14 फीसदी गर्भवती के प्री-मेच्योर (37 सप्ताह से पहले) डिलीवरी हो रही है। इनमें से 88 फीसदी के 32 सप्ताह से पहले प्रसव हो रहा है। इससे शिशु के जन्मजात विकृतियां, मानसिक और शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह मोटापा, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई), धूम्रपान-तंबाकू और रक्त की कमी मिल रही है।
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फोग्सी की डॉ. भारती माहेश्वरी ने प्री-मेच्योर डिलीवरी से बचाव के बारे में जानकारी दी। सचिव डॉ. निधि बंसल ने प्री-मेच्योर डिलीवरी वाले शिशुओं के मामले में कंगारू थेरेपी कारगर बताई। इसमें ऐसे शिशु को माता-पिता अपनी सीने पर रखते हैं। इससे उसको प्राकृतिक तापमान मिलता है। इससे उसकी सेहत में तेजी से सुधार होता है। सेमिनार में डॉ. सविता त्यागी, डॉ. नीरज यादव, डॉ पंकज कुमार, डॉ. निहारिका मल्होत्रा, डॉ. स्वाति द्विवेदी, डॉ. अनुभव जैन, डॉ. मनीष परमार आदि मौजूद रहे।
ये दिए सुझाव
- गर्भावस्था के समय नियमित जांच कराएं।
- पौष्टिक आहार लें, फास्ट फूड से बचें।
- वजन नियंत्रित करें, तंबाकू-धूम्रपान से बचें।
- नियमित योग और व्यायाम की आदत डालें।
- पेशाब में संक्रमण पर डॉक्टर को तत्काल दिखाएं।