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UP: गवाही से छुट्टी पर दरोगा, दुष्कर्म-पॉक्सो के मुकदमों में तारीख पर अटका न्याय; हाईकोर्ट की निगरानी भी बेअसर
Fri, 07 Aug 2026 10:37 AM IST
Dhirendra Singh
दुर्गेश चाहर, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
दुर्गेश चाहर, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 07 Aug 2026 10:37 AM IST
सार
आगरा में दुष्कर्म और पॉक्सो के कई मामलों में पीड़िताओं की गवाही पूरी होने के बावजूद जांच अधिकारी कोर्ट में गवाही देने नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे मुकदमों का निस्तारण अटक गया है। विशेष पॉक्सो अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए गवाही से गैरहाजिर तीन दरोगाओं का वेतन रोकने के आदेश दिए हैं।
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आगरा दीवानी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के गंभीर मामलों में पीड़िताएं अपना दर्द बयान कर गवाही दे चुकी हैं। अदालत भी फैसला सुनाने को तैयार है लेकिन जांच अधिकारी (विवेचक) ही कटघरे में आने से कतरा रहे हैं। नतीजा, कई मुकदमे इन्साफ की आखिरी दहलीज पर आकर थम गए हैं। हाईकोर्ट की सीधी निगरानी के बावजूद विवेचकों की मनमानी न्याय पर भारी पड़ रही है।
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अछनेरा, फतेहपुर सीकरी, हरीपर्वत और जगदीशपुरा थाने के मुकदमों में चार्जशीट दाखिल करने वाले दरोगा सम्मन के बाद भी गवाही देने हाजिर नहीं हो रहे हैं। डीजीसी क्राइम के मुताबिक विवेचक आरोपपत्र में मोबाइल नंबर तक दर्ज नहीं करते, जिससे संपर्क में अड़चन आती है। इस लापरवाही पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनिका चौधरी की अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने मैनपुरी, सहारनपुर, गाजियाबाद और आगरा के पुलिस कप्तानों को गवाही से भाग रहे दरोगाओं का वेतन रोकने के आदेश दिए हैं।
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डीजीसी क्राइम आगरा राधा कृष्ण गुप्ता ने बताया कि अधिकतर मुकदमों में विवेचक आरोपपत्र में अपना मोबाइल नंबर नहीं लिखते, सिर्फ नाम और थाना लिखते हैं। इस वजह से अभियोजन पक्ष का उनसे सीधा संवाद नहीं हो पाता। सम्मन तामील कराने में भी दिक्कत होती है। अदालत के प्रतिकूल आदेश पारित करने के बाद भी कुछ विवेचक गवाही देने हाजिर नहीं हो रहे हैं। उनके खिलाफ अदालत ने संज्ञान लिया है। उनका वेतन रोकने के साथ-साथ हाजिर कराने के भी उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
केस-1
थाना फतेहपुर सीकरी में 2021 में जुगेंद्र के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। मुकदमा विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनिका चौधरी की अदालत में लंबित है। वर्तमान में मुकदमे के विवेचक दरोगा नीलकमल मैनपुरी के थाना एलाऊ में तैनात हैं। विवेचक की गवाही न होने से मुकदमे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। अदालत ने गत 20 जुलाई को पुलिस अधीक्षक मैनपुरी को इनका वेतन रोकने का आदेश दिया है।
थाना फतेहपुर सीकरी में 2021 में जुगेंद्र के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। मुकदमा विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनिका चौधरी की अदालत में लंबित है। वर्तमान में मुकदमे के विवेचक दरोगा नीलकमल मैनपुरी के थाना एलाऊ में तैनात हैं। विवेचक की गवाही न होने से मुकदमे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। अदालत ने गत 20 जुलाई को पुलिस अधीक्षक मैनपुरी को इनका वेतन रोकने का आदेश दिया है।
केस-2
थाना हरीपर्वत में 2022 में राहुल के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। दरोगा अमित प्रसाद ने विवेचना कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। वर्तमान में वह सहारनपुर पुलिस लाइन में तैनात हैं। अदालत ने गत 13 जुलाई को सहारनपुर के एसएसपी को दरोगा अमित प्रसाद का वेतन रोकने का आदेश दिया है।
थाना हरीपर्वत में 2022 में राहुल के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। दरोगा अमित प्रसाद ने विवेचना कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। वर्तमान में वह सहारनपुर पुलिस लाइन में तैनात हैं। अदालत ने गत 13 जुलाई को सहारनपुर के एसएसपी को दरोगा अमित प्रसाद का वेतन रोकने का आदेश दिया है।
केस-3
वर्ष 2021 में थाना अछनेरा में दुर्गेश के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। तत्कालीन दरोगा प्रदीप कौशिक ने विवेचना कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। जिले में तैनात होने के बाद भी दरोगा प्रदीप कौशिक के अलावा अन्य सभी गवाहों की गवाही दर्ज हो चुकी है। अदालत ने गत 10 जुलाई को पुलिस आयुक्त आगरा को उनका वेतन रोकने का आदेश दिया है।
वर्ष 2021 में थाना अछनेरा में दुर्गेश के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। तत्कालीन दरोगा प्रदीप कौशिक ने विवेचना कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। जिले में तैनात होने के बाद भी दरोगा प्रदीप कौशिक के अलावा अन्य सभी गवाहों की गवाही दर्ज हो चुकी है। अदालत ने गत 10 जुलाई को पुलिस आयुक्त आगरा को उनका वेतन रोकने का आदेश दिया है।