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UP: पत्नी फोन पर करती थी बहन से ऐसी बात, पुलिस के सुनकर उड़ गए होश; 27 साल बाद पकड़ में आए भूरा की पूरी कहानी
Sun, 19 Jul 2026 11:26 AM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 19 Jul 2026 11:26 AM IST
सार
पत्नी के रिश्ते एक पति के लिए भारी पड़ गए। पुलिस ने पति को गिरफ्तार कर लिया। पति पर पुलिसकर्मी की हत्या का आरोप है। 27 साल से पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी थी।
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पुलिसकर्मी का हत्यारोपी पकड़ा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के थाना खेरागढ़ क्षेत्र में 27 साल पहले गश्त के दौरान पुलिसकर्मियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर बंदूकें लूट कर भागे बदमाश भूरा पुत्र साबू निवासी इस्लाम नगर जगनेर को पुलिस ने 27 साल बाद मध्यप्रदेश के भोपाल जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपी नाम बदल कर ट्रक ड्राइवर बना हुआ था। उसने दूसरे नाम से दस्तावेज भी बनवा रखे थे। परिजन उसे मृत मान चुके थे। एक दावत में रिश्तेदार ने बदमाश के जीजा से उसकी बात कराई थी। यह मामला तब पुलिस की जानकारी में आया और बदमाश की तलाश शुरू की गई। पुलिस ने भूरा पर 50 हजार का इनाम घोषित कर रखा था।
31 दिसंबर 1998 की रात थाना खेरागढ़ के नगला कमाल चौराहा से उटंगन नदी की ओर सिपाही कमल सिंह, चरन सिंह और उमेश चंद्र गश्त कर रहे थे। उस समय तीनों सिपाही से कुख्यात लुटेरे रमेश कुशवाह गैंग के सदस्यों ने दो राइफल और एक एसएलआर बंदूक लूट ली थी। बदमाशों के गोली मारने से सिपाही कमल सिंह की मौत हो गई थी, जबकि सिपाही चरन सिंह घायल हुआ था। इस घटना के 10 दिन बाद पुलिस ने रमेश कुशवाह को मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके बाद गैंग के एक और सदस्य नरेंद्र भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। पुलिस ने दो राइफल बरामद कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जबकि गैंग का एक सदस्य भूरा उस समय से अंडरग्राउंड हो गया था।
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31 दिसंबर 1998 की रात थाना खेरागढ़ के नगला कमाल चौराहा से उटंगन नदी की ओर सिपाही कमल सिंह, चरन सिंह और उमेश चंद्र गश्त कर रहे थे। उस समय तीनों सिपाही से कुख्यात लुटेरे रमेश कुशवाह गैंग के सदस्यों ने दो राइफल और एक एसएलआर बंदूक लूट ली थी। बदमाशों के गोली मारने से सिपाही कमल सिंह की मौत हो गई थी, जबकि सिपाही चरन सिंह घायल हुआ था। इस घटना के 10 दिन बाद पुलिस ने रमेश कुशवाह को मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके बाद गैंग के एक और सदस्य नरेंद्र भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। पुलिस ने दो राइफल बरामद कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जबकि गैंग का एक सदस्य भूरा उस समय से अंडरग्राउंड हो गया था।
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डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार ने बताया कि पुलिस वांछित अपराधियों की तलाश के लिए अभियान चला रही थी। इसी दौरान पुलिस को भूरा के जिंदा होने का सुराग मिला। थाना पुलिस, एसओजी और सर्विलांस की टीम ने संयुक्त रूप से कार्य किया और शुक्रवार को आरोपी भूरा को आरसीसी मिक्सर प्लांट, सिहोर रोड, बिलविसगंज, भोपाल से गिरफ्तार किया गया। आरोपी भोपाल में नाम बदलकर अपनी पत्नी के साथ रह रहा था। उसने जमील पुत्र फारूख के नाम से दस्तावेज भी बनवा रखे थे। पहले पूछताछ में उसने पुलिस को बरगलाने का प्रयास किया। सख्ती करने पर उसने खुद के भूरा होने और वारदात कर छिपकर रहने की बात कबूल कर ली।
गैंग का सक्रिय सदस्य था भूरा
डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार ने बताया कि पूछताछ में आरोपी ने बताया कि रमेश कुश्वाहा गैंग का वह सक्रिय सदस्य था। घटना के समय उसकी उम्र 24 वर्ष थी। गैंग लूट, अपहरण, हत्या और डकैती करता था। घटना से 10 दिन पहले पुलिस ने गैंग के हथियारों का पूरा जखीरा पकड़ लिया था। गैंग को हथियारों की जरूरत थी। पुलिसकर्मियों को देखकर बंदूकें लूटने की योजना बनाई और हमला कर दिया था।
गैंग का सक्रिय सदस्य था भूरा
डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार ने बताया कि पूछताछ में आरोपी ने बताया कि रमेश कुश्वाहा गैंग का वह सक्रिय सदस्य था। घटना के समय उसकी उम्र 24 वर्ष थी। गैंग लूट, अपहरण, हत्या और डकैती करता था। घटना से 10 दिन पहले पुलिस ने गैंग के हथियारों का पूरा जखीरा पकड़ लिया था। गैंग को हथियारों की जरूरत थी। पुलिसकर्मियों को देखकर बंदूकें लूटने की योजना बनाई और हमला कर दिया था।
बीते 27 वर्षों से भागे बदमाश भूरा को पकड़ने के लिए डिजिटल युग में पुलिस ने मैनुअल तरीके से काम किया। मुखबिर ने आरोपी के जीजा से दोस्ती की और 50 दिनों तक साथ रहा। उसने पार्टी के दौरान नशे में दो वर्ष पहले एक रिश्तेदार के घर बकरीद की कुर्बानी में भूरा से बात होने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस कड़ियों को जोड़कर बदमाश तक पहुंच गई। पुलिस एक माह के अंदर भूरा को सजा दिलाने का दावा कर रही है।
तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक ने भूरा पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किए था। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने समीक्षा के दौरान इनाम की राशि 50 हजार रुपये कर दी थी। भूरा के परिजन भी उसे मरा मान चुके थे। पुलिस ने पहले उसके परिवार के बारे में पता लगाया। वहां से कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उसके जीजा अजमेरी के बारे में पता चला। पुलिस ने मुखबिर को उसके पास भेजा। मुखबिर ने अजमेरी से दोस्ती की और 50 दिनों तक उसके साथ रहा। भरोसे में लेने के बाद एक दिन जब अजमेरी शराब के नशे में था तो उससे भूरा के बारे में पूछा। पता चला कि दो वर्ष पहले रिश्तेदार के घर पर बकरीद के दिन कुर्बानी में गए थे। वहां आखिरी बार भूरा से मोबाइल पर बात हुई थी। पुलिस टीम ने अजमेरी को उठाया और पूछताछ की, तो उसके रिश्तेदार नन्हे के मोबाइल से बात होने का पता चला। नन्हे के बारे में पता किए तो पता चला कि भूरा की पत्नी और नन्हे की मौसी सगी बहनें हैं। उसके मोबाइल में भूरा का नंबर जमील नाम से फीड था। पुलिस ने उस नंबर को सर्विलांस पर लगाया और लोकेशन ट्रेस की गई।
तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक ने भूरा पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किए था। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने समीक्षा के दौरान इनाम की राशि 50 हजार रुपये कर दी थी। भूरा के परिजन भी उसे मरा मान चुके थे। पुलिस ने पहले उसके परिवार के बारे में पता लगाया। वहां से कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उसके जीजा अजमेरी के बारे में पता चला। पुलिस ने मुखबिर को उसके पास भेजा। मुखबिर ने अजमेरी से दोस्ती की और 50 दिनों तक उसके साथ रहा। भरोसे में लेने के बाद एक दिन जब अजमेरी शराब के नशे में था तो उससे भूरा के बारे में पूछा। पता चला कि दो वर्ष पहले रिश्तेदार के घर पर बकरीद के दिन कुर्बानी में गए थे। वहां आखिरी बार भूरा से मोबाइल पर बात हुई थी। पुलिस टीम ने अजमेरी को उठाया और पूछताछ की, तो उसके रिश्तेदार नन्हे के मोबाइल से बात होने का पता चला। नन्हे के बारे में पता किए तो पता चला कि भूरा की पत्नी और नन्हे की मौसी सगी बहनें हैं। उसके मोबाइल में भूरा का नंबर जमील नाम से फीड था। पुलिस ने उस नंबर को सर्विलांस पर लगाया और लोकेशन ट्रेस की गई।
बहन ने पहचाना तब बोला हां मैं ही भूरा
पुलिस टीम ने गिरफ्तार करने के बाद आरोपी भूरा से पूछताछ की तो वह भ्रमित करने लगा। जमील पुत्र फारूख बताने लगा। अपनी आईडी भी दिखाई। पुलिस के पास भूरा की कोई फोटो नहीं थी। इतने वर्षों में उसका हुलिया भी बदल गया था। पुलिस ने भूरा की बहन को बुलाया और सामना कराया। बहन ने उसे पहचान लिया। भूरा पहले बहन को भी पहचानने से मना कर रहा था। सख्ती से पूछने पर खुद के भूरा होने की बात कबूल ली।
मौके पर पूरी घटना का किए रीटेक
भूरा पुलिस के साथ घटनास्थल गया और पूरी घटना के बारे में बताया। उसकी कहानी केस डायरी से बिल्कुल मिलती हुई थी। उसके बयानों के आधार पर घटना के सभी कोण पुलिस को समझ आ गए। पुलिस टीम अब आरोपी से लूटी बंदूक की जानकारी कर रही है।
पुलिस टीम ने गिरफ्तार करने के बाद आरोपी भूरा से पूछताछ की तो वह भ्रमित करने लगा। जमील पुत्र फारूख बताने लगा। अपनी आईडी भी दिखाई। पुलिस के पास भूरा की कोई फोटो नहीं थी। इतने वर्षों में उसका हुलिया भी बदल गया था। पुलिस ने भूरा की बहन को बुलाया और सामना कराया। बहन ने उसे पहचान लिया। भूरा पहले बहन को भी पहचानने से मना कर रहा था। सख्ती से पूछने पर खुद के भूरा होने की बात कबूल ली।
मौके पर पूरी घटना का किए रीटेक
भूरा पुलिस के साथ घटनास्थल गया और पूरी घटना के बारे में बताया। उसकी कहानी केस डायरी से बिल्कुल मिलती हुई थी। उसके बयानों के आधार पर घटना के सभी कोण पुलिस को समझ आ गए। पुलिस टीम अब आरोपी से लूटी बंदूक की जानकारी कर रही है।
भूरा के कहने पर ही मारी गई थी गोली
भूरा ने पुलिस को बताया कि रमेश कुशवाह गैंग में वह जीप चलाता था। रमेश के भाई धांधू ने रेकी की। इसके बाद भूरा ने मनिया में जीप को छोड़ दिया। वहां से दूसरी नीले रंग की जीप लेकर गैंग के सदस्यों के साथ घटना स्थल पर पहुंचा। पहले उटंगन की पुलिया पर खड़े होकर डेढ़ घंटे इंतजार किया। इसके बाद चाय के खोखे के पास पहुंचे। जीप का रंग नीला होने के कारण पुलिसकर्मी उन्हें भी पुलिस वाला समझे थे। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला कर बंदूकें छीन लीं। एक पुलिसकर्मी पकड़ने का प्रयास करने लगा, तो उसने चिल्ला कर साथियों से गोली मारने को कहा। एक साथी ने कनपटी पर तमंचा रख एक पुलिसकर्मी को गोली मारी। दूसरे ने अन्य पुलिसकर्मी के पेट में गोली मारी। तीसरा पुलिसकर्मी जान बचाकर भाग गया। इसके बाद आरोपी सैंया होकर चंबल के बीहड़ों में पहुंच गए। वहां से अलग-अलग हो गए। भूरा पुलिस से बचने को जंगलों में भाग गया था। दो माह इटारसी में मजदूरी की। इसके बाद भोपाल में बिल्डिंग निर्माण का काम किया था। अब ट्रक ड्राइवर बना हुआ था। उसकी पत्नी बिहार की है। वह अपनी बहन से कभी-कभी बात करती थी। कई बार मना करने पर भी नहीं मानती थी। पत्नी के बहन प्रेम ने उसे पकड़वा दिया।
भूरा ने पुलिस को बताया कि रमेश कुशवाह गैंग में वह जीप चलाता था। रमेश के भाई धांधू ने रेकी की। इसके बाद भूरा ने मनिया में जीप को छोड़ दिया। वहां से दूसरी नीले रंग की जीप लेकर गैंग के सदस्यों के साथ घटना स्थल पर पहुंचा। पहले उटंगन की पुलिया पर खड़े होकर डेढ़ घंटे इंतजार किया। इसके बाद चाय के खोखे के पास पहुंचे। जीप का रंग नीला होने के कारण पुलिसकर्मी उन्हें भी पुलिस वाला समझे थे। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला कर बंदूकें छीन लीं। एक पुलिसकर्मी पकड़ने का प्रयास करने लगा, तो उसने चिल्ला कर साथियों से गोली मारने को कहा। एक साथी ने कनपटी पर तमंचा रख एक पुलिसकर्मी को गोली मारी। दूसरे ने अन्य पुलिसकर्मी के पेट में गोली मारी। तीसरा पुलिसकर्मी जान बचाकर भाग गया। इसके बाद आरोपी सैंया होकर चंबल के बीहड़ों में पहुंच गए। वहां से अलग-अलग हो गए। भूरा पुलिस से बचने को जंगलों में भाग गया था। दो माह इटारसी में मजदूरी की। इसके बाद भोपाल में बिल्डिंग निर्माण का काम किया था। अब ट्रक ड्राइवर बना हुआ था। उसकी पत्नी बिहार की है। वह अपनी बहन से कभी-कभी बात करती थी। कई बार मना करने पर भी नहीं मानती थी। पत्नी के बहन प्रेम ने उसे पकड़वा दिया।