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UP: जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की कमी, आगरा के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका; 14 अप्रैल को सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sat, 07 Mar 2026 10:38 PM IST
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सार
जन औषधि केंद्रों पर जेनेरिक दवाओं की कमी है। दवाओं की उपलब्धता से मरीजों को राहत मिलेगी। खासतौर से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, कैंसर मरीजों को सुविधा हो जाएगी।
दवाएं
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
जन औषधि केंद्रों पर जेनेरिक दवाओं की कमी पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में वाद दायर किया था। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए 14 अप्रैल की तिथि तय की है। अधिवक्ता का तर्क है कि चिकित्सक जेनेरिक दवाएं अनिवार्य रूप से लिखें, ऐसा न करने वालों पर कार्रवाई हो। ऐसा होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने बताया कि वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। केंद्र सरकार, नेशनल मेडिकल काउंसिल, नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथाॅरिटी (एनपीपीए) को नोटिस भी दिए, जिसमें संबंधित ने जवाब भी दाखिल किए हैं। इसमें अब अगली सुनवाई 14 अप्रैल को होगी। वर्ष 2002 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार चिकित्सकों को जेनेरिक नाम से दवाएं लिखनी होगी। संशोधन कर जेनेरिक दवाएं स्पष्ट शब्दों में लिखना अनिवार्य कर दिया।
जेनेरिक दवाओं की कीमत 50-90 फीसदी तक कम होती है। डॉक्टर जेनेरिक दवाएं नहीं लिख रहे हैं, जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की भी कमी है। दवाओं की उपलब्धता से मरीजों को राहत मिलेगी। खासतौर से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, कैंसर मरीजों की सुविधा हो जाएगी। जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की कमी के चलते मरीजों को निजी स्टोरों से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। ये दवाएं महंगी होने के चलते कई बार मरीज इनकी खरीद नहीं कर पाते। इससे इलाज बीच में ही छूट जाता है। याचिका में नियमित और प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट, डिजिटल पर्ची प्रणाली, दवा का जेनेरिक नाम, मात्रा और अवधि का स्पष्ट उल्लेख समेत अन्य सुझाव दिए हैं।
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वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने बताया कि वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। केंद्र सरकार, नेशनल मेडिकल काउंसिल, नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथाॅरिटी (एनपीपीए) को नोटिस भी दिए, जिसमें संबंधित ने जवाब भी दाखिल किए हैं। इसमें अब अगली सुनवाई 14 अप्रैल को होगी। वर्ष 2002 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार चिकित्सकों को जेनेरिक नाम से दवाएं लिखनी होगी। संशोधन कर जेनेरिक दवाएं स्पष्ट शब्दों में लिखना अनिवार्य कर दिया।
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जेनेरिक दवाओं की कीमत 50-90 फीसदी तक कम होती है। डॉक्टर जेनेरिक दवाएं नहीं लिख रहे हैं, जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की भी कमी है। दवाओं की उपलब्धता से मरीजों को राहत मिलेगी। खासतौर से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, कैंसर मरीजों की सुविधा हो जाएगी। जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की कमी के चलते मरीजों को निजी स्टोरों से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। ये दवाएं महंगी होने के चलते कई बार मरीज इनकी खरीद नहीं कर पाते। इससे इलाज बीच में ही छूट जाता है। याचिका में नियमित और प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट, डिजिटल पर्ची प्रणाली, दवा का जेनेरिक नाम, मात्रा और अवधि का स्पष्ट उल्लेख समेत अन्य सुझाव दिए हैं।
