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Cyber Crime: गूगल से नंबर निकाल कर की कॉल, ऑर्डर के नाम पर 11.28 लाख ठगे
Sun, 26 Jul 2026 04:41 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Sun, 26 Jul 2026 04:41 PM IST
सार
गूगल सर्च रिजल्ट में आए एक मोबाइल नंबर पर उन्होंने संपर्क किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को संबंधित कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए उनसे ऑर्डर नोट कर लिया। इसके बाद ठगों ने विश्वास जीतने के लिए एक फर्जी इनवायस तैयार कर आरिफ के व्हाट्सएप नंबर पर भेज दिया। फिर शुरू हुआ ठगी का खेल...
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साइबर क्राइम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गूगल से मोबाइल नंबर निकालकर ऑनलाइन ऑर्डर करना एक व्यक्ति को महंगा पड़ गया। साइबर ठगों ने सर सैयद नगर निवासी आरिफ सईद से 11.28 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाने में केस दर्ज कर लिया गया है।
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आरिफ सईद के अनुसार, उन्होंने 19 जुलाई को गूगल पर रुंगटा स्टील बेस्ट प्राइस सर्च किया था। इस दौरान सर्च रिजल्ट में आए एक मोबाइल नंबर पर उन्होंने संपर्क किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को संबंधित कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए उनसे ऑर्डर नोट कर लिया। इसके बाद ठगों ने विश्वास जीतने के लिए एक फर्जी इनवायस तैयार कर आरिफ के व्हाट्सएप नंबर पर भेज दिया और कहा कि पेमेंट करने के बाद सामान उनके पते पर डिलीवर कर दिया जाएगा।
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आरिफ ने 21 जुलाई को ठगों द्वारा बताए गए बैंक खाते में 11.28 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। भुगतान करने के काफी दिन बीत जाने के बाद भी जब सामान की डिलीवरी नहीं हुई, तो पीड़ित ने उस नंबर पर दोबारा संपर्क करने की कोशिश की। नंबर लगातार स्विच ऑफ (बंद) मिलने पर उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास हुआ।एसपी क्राइम ममता कुरील का कहना है कि साइबर सेल और थाना पुलिस अब उस मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल और पैसों के लेन-देन के आधार पर आरोपियों की लोकेशन का पता लगाने में जुटी है। जल्द ही इस गिरोह का पर्दाफाश कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
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साइबर ठगी से बचाव के उपाय
- आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें : किसी भी बड़ी कंपनी (जैसे स्टील, सीमेंट या अन्य ब्रांड) का सामान खरीदने के लिए हमेशा उसकी आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें। गूगल पर मिलने वाले रैंडम या स्पॉन्सर विज्ञापनों और नंबरों पर तुरंत भरोसा न करें।
- वेबसाइट की प्रामाणिकता जांचें : सुनिश्चित करें कि वेबसाइट का यूआरएल सही हो और उसकी स्पेलिंग में कोई गड़बड़ी न हो। फर्जी वेबसाइट्स अक्सर असली ब्रांड के नाम से मिलती-जुलती फर्जी स्पेलिंग का इस्तेमाल करती हैं।
- बरामद या अज्ञात खातों में पैसे न भेजें : यदि कोई व्यक्ति या कंपनी किसी व्यक्तिगत बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहे, तो सतर्क हो जाएं। बड़ी कंपनियां अमूल्य भुगतान हमेशा अपने आधिकारिक चालू खाते या कंपनी के नाम से लेती हैं।
- फर्जी इनवॉइस और दस्तावेजों की जांच : ठग अक्सर विश्वास जीतने के लिए व्हाट्सएप या ईमेल पर फर्जी बिल भेजते हैं। भुगतान करने से पहले कंपनी के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके उस इनवॉइस और डीलर की सत्यता की पुष्टि जरूर करें।
- साइबर हेल्पलाइन की मदद लें : यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी हो जाती है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें या आपातकालीन स्थिति में 1930 नंबर पर कॉल करें। समय पर सूचना देने से ठगी गई रकम को बैंक खाते में होल्ड कराया जा सकता है।
(स्रोत: कर्ट-इन साइबर सुरक्षा वेबसाइट)