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AI: एआई बताएगा जिस जमीन पर बन रही है इमारत कितनी है सुरक्षित, एएमयू वैज्ञानिकों ने की स्मार्ट तकनीकि विकसित

इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 18 May 2026 06:38 PM IST
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सार

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के वैज्ञानिकों ने ऐसी स्मार्ट तकनीक विकसित की है, जिससे पता लगाया जा सकेगा कि मिट्टी कितनी मजबूत है और उस पर बनने वाली इमारत कितनी सुरक्षित होगी?

AI tell the strength of the soil
फ्लैट - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार

कमजोर जमीन पर बनने वाली इमारत कितनी सुरक्षित होगी? इसका जवाब अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) देगा। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के वैज्ञानिकों ने ऐसी स्मार्ट तकनीक विकसित की है, जिससे पता लगाया जा सकेगा कि मिट्टी कितनी मजबूत है और उस पर बनने वाली इमारत कितनी सुरक्षित होगी? इस पर एएमयू, पटना और थाईलैंड के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल स्प्रिंगर नेचर में प्रकाशित हुई है।



एएमयू के सैयद मोहम्मद यूसुफ के अनुसार मिट्टी की मजबूती का सटीक अनुमान अब मशीन लर्निंग से संभव हो सकेगा। अध्ययन में पाया है कि जियोग्रिड और चूना मिलाकर कमजोर सिल्टी सैंड मिट्टी की भार सहने की क्षमता को काफी बढ़ाया जा सकता है। यह तकनीक भवनों और अन्य संरचनाओं की नींव को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने में मदद कर सकती है। आयताकार फुटिंग पर कई प्रयोग किए गए। इसमें देखा गया कि जियोग्रिड को अलग-अलग गहराई पर लगाने और मिट्टी में चूने की मात्रा बदलने से मिट्टी की अंतिम भार वहन क्षमता और बैठने के व्यवहार पर क्या असर पड़ता है। 
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वैज्ञानिकों के प्रयोगों के साथ आधुनिक मशीन लर्निंग तकनीकों का भी उपयोग किया। इसके लिए चार प्रमुख मॉडल रैंडम फॉरेस्ट (आरएफ), एक्सट्रीम ग्रेडिएंट बूस्टिंग (एक्सजीबी), कैटेगोरिकल बूस्टिंग (सीएटी) और एडेप्टिव बूस्टिंग (एडीए) विकसित किए गए, ताकि मिट्टी की क्षमता का सटीक अनुमान लगाया जा सके। परिणामों में सीएटी मॉडल सबसे बेहतर साबित हुआ। इस मॉडल ने प्रशिक्षण और परीक्षण चरण में उच्च प्रदर्शन दर्ज किया। इसके बाद एक्सजीबी, एडीए और आरएफ मॉडल रहे। ये मॉडल मिट्टी के गुणों, जियोग्रिड की स्थिति और फुटिंग के व्यवहार के बीच मौजूद जटिल संबंधों को अच्छी तरह समझने में सक्षम हैं। इससे भविष्य में निर्माण कार्यों के लिए तेज, कम खर्चीला और अधिक भरोसेमंद डिजाइन तैयार करना आसान होगा।
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जर्नल में छपी वैज्ञानिकों की रिपोर्ट
एएमयू के सैयद मोहम्मद यूसुफ, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पटना बिहार के फुरकान अहमद, सूफी मोहम्मद गुलजार, इंजीनियरिंग थम्मासत यूनिवर्सिटी थाईलैंड के देवेश रंजन कुमार, रिट विपुलन्नसत की रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल स्प्रिंगर नेचर में छपी है।

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