सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Dharnidhar Mela begins with Kalash Yatra

ब्रज कुंभ: धरणीधर पर भव्य कलश यात्रा के साथ मेला शुरू, उमड़ा आस्था का सैलाब, एक माह तक होंगे विविध आयोजन

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 18 May 2026 06:03 PM IST
विज्ञापन
सार

ब्रज की 84 कोस परिक्रमा मार्ग का आठ कोस का हिस्सा अलीगढ़ से होकर गुजरता है। श्रद्धालु हरियाणा के रास्ते टप्पल के मारव और जैदपुरा से होते हुए मथुरा के सुरीर व कराहरी पहुंचते हैं। यहां से यात्रा कूबरा, गोरई, श्रृंगार गढ़ी और कलिजरी होते हुए बेसवां पहुंचती है।

Dharnidhar Mela begins with Kalash Yatra
धरणीधर सरोवर पर कलश यात्रा से मेला शुरू, ठहराव के लिए बनी कुटिया - फोटो : जागरूक पाठक व आयोजक
विज्ञापन

विस्तार

अधिक मास में ब्रज कुंभ मेले का रविवार से शुभारंभ हो गया। सिर पर 1001 कलश धारण करके महिलाएं व कन्याएं कलश यात्रा में शामिल हुईं। करीब एक माह तक अलीगढ़ के बेसवां स्थित धरणीधर स्थल पर यह आयोजन होगा।

Trending Videos


पूर्व कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चारण और पूजा-अर्चना के साथ मेले का उद्घाटन किया। अधिकमास के पावन अवसर पर धरणीधर सरोवर पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन में दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया। बैंड-बाजों और जयघोषों के बीच यात्रा कस्बा बेसवां के प्रमुख मार्गों से होती हुई धरणीधर सरोवर पहुंची। आयोजन समिति के अध्यक्ष सपन चौधरी ने बताया है कि कलशों में 21 पवित्र नदियों और 21 पौराणिक कुओं का जल रखा गया था, जिसे वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सरोवर में प्रवाहित किया गया। श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान कर मंदिरों की परिक्रमा की।
विज्ञापन
विज्ञापन


पूर्व मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि धरणीधर सरोवर ब्रज क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है और इसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। शाम को राधा-कृष्ण घाट पर भव्य आरती हुई, जबकि अधिकमास भर यहां भजन-कीर्तन, संत प्रवचन और धार्मिक कार्यक्रम चलते रहेंगे।

विज्ञापन

84 कोस परिक्रमा में शामिल है धरणीधर
ब्रज की 84 कोस परिक्रमा मार्ग का आठ कोस का हिस्सा अलीगढ़ से होकर गुजरता है। श्रद्धालु हरियाणा के रास्ते टप्पल के मारव और जैदपुरा से होते हुए मथुरा के सुरीर व कराहरी पहुंचते हैं। यहां से यात्रा कूबरा, गोरई, श्रृंगार गढ़ी और कलिजरी होते हुए बेसवां पहुंचती है। बेसवां में रात्रि विश्राम और दर्शन के बाद श्रद्धालु नयावास, कालाआम, पिथैर और मान चूहरा होते हुए पुनः मथुरा जनपद की सीमा में प्रवेश करते हैं। ऋषि विश्वामित्र की तपोस्थली बेसवां विशेष स्थान रखती है। मान्यता है कि जब राक्षस ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ में विघ्न डालते थे, तब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और लक्ष्मण ने यहां यज्ञ पूर्ण कराया था।

तीन राज्यों को जोड़ती है 84 कोस की परिक्रमा
यात्रा उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के भौगोलिक क्षेत्रों को जोड़ती है। कुल परिक्रमा पथ 250 किलोमीटर से अधिक है, जिसमें 80 प्रतिशत हिस्सा मथुरा में पड़ता है।24 किमी. अलीगढ़ इगलास व टप्पल से गुजरता है। यात्रा को पैदल चलकर औसतन 20-40 दिनों में पूर्ण करते हैं।

मेले में रोज शामिल होंगे एक लाख से अधिक श्रद्धालु
देव भूमि धरणीधर तीर्थ न्यास के हरीश कटारा ने बताया है कि मेले में इस बार एक लाख से अधिक श्रद्धालु रोज शामिल होने की संभावना है। इन्होंने बताया है कि न्यास के प्रचार वाहन ने इस बार बेसवां के आसपास के 500 से अधिक गांवों में जाकर प्रचार किया था। लोगों को मेले में शामिल होने के लिए जागरूक भी किया है।

साधु-संतों विश्राम के लिए बनाईं गईं कुटिया
कटारा ने बताया है कि 84 कोस परिक्रमा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के िवश्राम के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। कुटिया बनाई गई हैं, जिनमें एक बार 250 से अधिक श्रद्धालु विश्राम कर सकते हैं। इसके अलावा पास में बने आम के बाग भी अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। इधर, लोगों के मनोरंज के लिए सेल्फी प्वाइंटों बनाए गए हैं जो मेले की शोभा बढ़ा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed