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Aligarh Exhibition: नुमाइश कल से शुरू, प्रभारी मंत्री करेंगे उद्घाटन, घोड़ा मेले से अलीगढ़ महोत्सव का सफर

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Thu, 15 Jan 2026 10:49 AM IST
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सार

हर साल की तरह इस बार भी अलीगढ़ की नुमाइश में लाखों लोगों के आने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यहां पर पांच हजार से अधिक दुकानदार अपनी दुकानें लगाते हैं। पूरे 25 दिन यहां के तीनों मंचों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। एक दिन में एक समय में यहां 50 हजार से अधिक लोग तक मौजूद रहते हैं।

Aligarh Numaish from January 16, Minister in charge to inaugurate
नुमाइश मैदान झूला तैयार करते कर्मचारी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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गंगा-जमुनी तहजीब के लिए विख्यात अलीगढ़ की राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी (नुमाइश) एक बार फिर सज-धज कर तैयार है। 16 जनवरी को जिले के प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी भव्य समारोह के साथ इस 145 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक प्रदर्शनी के इस वर्ष के आयोजन का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।

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घोड़ा मेले से शुरू हुआ नुमाइश का 145 साल का सफर
1880 में एक मामूली घोड़ा मेले से शुरू हुआ यह सफर आज आधुनिक भारत की प्रगति का आइना बन चुका है। यह मैदान न केवल मनोरंजन का केंद्र है, बल्कि आजादी के आंदोलन से लेकर आज के आत्मनिर्भर भारत तक की गौरवगाथा का साक्षी रहा है। जनवरी के मध्य से शुरू होने वाली यह प्रदर्शनी लगभग एक महीने तक चलेगी। इसमें देशभर के व्यापारी अपनी स्टॉल लगा चुके हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों लोगों के आने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यहां पर पांच हजार से अधिक दुकानदार अपनी दुकानें लगाते हैं।
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पूरे 25 दिन यहां के तीनों मंचों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। एक दिन में एक समय में यहां 50 हजार से अधिक लोग तक मौजूद रहते हैं। एडीएम सिटी किंशुक श्रीवास्तव कहती हैं कि नुमाइश की सुरक्षा के लिए पूरे परिसर को सीसीटीवी के दायरे में लाया गया है। पूरे परिसर को सेक्टर में बांट कर सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

नुमाइश के इतिहास के सुनहरे पन्ने

  • शुरुआत वर्ष 1880- तत्कालीन कलेक्टर एचजी क्रॉफ्ट ने पशु नस्ल सुधार और घुड़सवारी को बढ़ावा देने के लिए इसे ''क्रॉफ्ट मेले'' के रूप में शुरू किया था।
  • सर सैयद का योगदान- एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खान ने इसे शिक्षा और समाज सुधार का जरिया बनाया। उन्होंने शिक्षा कोष जुटाने के लिए यहां सांस्कृतिक नाटकों की नींव रखी।
  • ऐतिहासिक दरबार हॉल- वर्ष 1888 में निर्मित दरबार हॉल आज भी अपनी वास्तुकला से लोगों को आकर्षित करता है। यह दशकों से जिले की महत्वपूर्ण बैठकों और गरिमामय आयोजनों का गवाह रहा है।
  • मित्तल गेट : स्वतंत्रता के बाद सबसे पहले वर्ष 1952 में तत्कालीन कलेक्टर केसी मित्तल ने इस प्रदर्शनी को राजकीय स्वरूप दिया। मित्तल गेट का निर्माण कराया। प्रदर्शनी जिले के औद्योगिक और कृषि के विकास का मंच बनी।
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