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Aligarh News: प्रसव के बाद पेट में ही छोड़ दी रूई ऑपरेशन का खर्च न देने पर हंगामा
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पीडि़त महिला। संवाद
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मैरिस रोड स्थित कृष्णा नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान एक महिला के पेट में रूई छूट गई। तबीयत बिगड़ने पर जब सीटी स्कैन कराया तो इसका पता चला। वादे के मुताबिक ऑपरेशन के रुपये नहीं मिलने पर परिजनों ने हंगामा किया।
दरअसल, नर्सिंग होम के डाॅक्टरों ने दूसरी जगह ऑपरेशन कराकर कॉटन निकलवाने और सारा खर्चा देने का वादा किया था। चंडौली बुजुर्ग निवासी अरविंद चौहान ने बताया कि आठ महीने पहले गांव के ही निरंजन ने उनकी बेटी जागृति की कृष्णा नर्सिंग होम में सामान्य प्रसव कराने की बात कही थी।
अस्पताल में 40 हजार रुपये जमा कराने के बाद महिला का ऑपरेशन किया गया, लेकिन डॉक्टरों ने पेट के अंदर ही कॉटन छोड़ दी। प्रसव के बाद से ही जागृति को लगातार पेट में गंभीर दर्द रहने लगा। अस्पताल के लोग हर बार दवा देकर टालते रहे। जब हालत ज्यादा बिगड़ी तो परिजनों ने सीटी स्कैन कराया। इसमें पेट के अंदर रूई होने की पुष्टि हुई। पीड़िता की बहन प्रियंका ने बताया कि इस गंभीर लापरवाही के कारण जागृति का वजन घटकर महज 20 किलो रह गया है और उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
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परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने नर्सिंग होम प्रबंधन को यह बात बताई, तो बदनामी के डर से डॉक्टर ने कहा, मामला उछालो मत। दूसरे अस्पताल में ऑपरेशन करा लो, सारा खर्च मैं दूंगा। डॉक्टर के भरोसे पर परिजनों ने महिला का दोबारा ऑपरेशन कराया, जिसमें करीब 3.20 लाख रुपये का खर्च आया। जब पीड़िता के परिजन बिल का भुगतान मांगने कृष्णा नर्सिंग होम पहुंचे, तो संचालक ने पैसे देने से साफ मना कर दिया और उन्हें पहचानने तक से इन्कार कर दिया।
मंगलवार को नर्सिंग होम संचालक की वादाखिलाफी से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और स्टाफ के साथ तीखी नोकझोंक हुई। हंगामे को बढ़ता देख आरोपी डॉक्टर अस्पताल छोड़कर भाग गए। सूचना पर थाना सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची लोगों को शांत कराया। पीड़िता के पिता अरविंद चौहान की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच सब-इंस्पेक्टर अनिल कुमार को सौंपी है।
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दरअसल, नर्सिंग होम के डाॅक्टरों ने दूसरी जगह ऑपरेशन कराकर कॉटन निकलवाने और सारा खर्चा देने का वादा किया था। चंडौली बुजुर्ग निवासी अरविंद चौहान ने बताया कि आठ महीने पहले गांव के ही निरंजन ने उनकी बेटी जागृति की कृष्णा नर्सिंग होम में सामान्य प्रसव कराने की बात कही थी।
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अस्पताल में 40 हजार रुपये जमा कराने के बाद महिला का ऑपरेशन किया गया, लेकिन डॉक्टरों ने पेट के अंदर ही कॉटन छोड़ दी। प्रसव के बाद से ही जागृति को लगातार पेट में गंभीर दर्द रहने लगा। अस्पताल के लोग हर बार दवा देकर टालते रहे। जब हालत ज्यादा बिगड़ी तो परिजनों ने सीटी स्कैन कराया। इसमें पेट के अंदर रूई होने की पुष्टि हुई। पीड़िता की बहन प्रियंका ने बताया कि इस गंभीर लापरवाही के कारण जागृति का वजन घटकर महज 20 किलो रह गया है और उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
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परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने नर्सिंग होम प्रबंधन को यह बात बताई, तो बदनामी के डर से डॉक्टर ने कहा, मामला उछालो मत। दूसरे अस्पताल में ऑपरेशन करा लो, सारा खर्च मैं दूंगा। डॉक्टर के भरोसे पर परिजनों ने महिला का दोबारा ऑपरेशन कराया, जिसमें करीब 3.20 लाख रुपये का खर्च आया। जब पीड़िता के परिजन बिल का भुगतान मांगने कृष्णा नर्सिंग होम पहुंचे, तो संचालक ने पैसे देने से साफ मना कर दिया और उन्हें पहचानने तक से इन्कार कर दिया।
मंगलवार को नर्सिंग होम संचालक की वादाखिलाफी से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और स्टाफ के साथ तीखी नोकझोंक हुई। हंगामे को बढ़ता देख आरोपी डॉक्टर अस्पताल छोड़कर भाग गए। सूचना पर थाना सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची लोगों को शांत कराया। पीड़िता के पिता अरविंद चौहान की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच सब-इंस्पेक्टर अनिल कुमार को सौंपी है।